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सुख-दुख

टीवी न्यूज की दुनिया में मेहनत से आगे बढ़ने वाली लड़कियों के लिए विभा कौल हमेशा एक मिसाल रहेंगी!

पंकज प्रसून-

शायद साल 2006-07 होगा….उन दिनों स्टार न्यूज हुआ करता था… एक लंबे संघर्ष के बाद और अपने बड़े भाई रविंद्र जी के अथक प्रयासों से यहां इंटर्नशिप करने का अवसर प्राप्त हुआ तो मानो लगा बड़ा सपना साकार हो गया…इतना बड़ा ऑफिस…और इस ऑफिस में काम करने वाले सभी लोग मेरे लिए बड़ी हस्ती….सिक्योरिटी गार्ड को भी मैं सर ही कहकर संबोधित करता था।

हालांकि ये स्वभाव मेरा आज तक बना हुआ है….एक-एक दिन का अनुभव एक कहानी है लेकिन आज बात दोपहर 2:30 बजे की…ढाई बज गए क्या….ढाई मतलब ‘सास बहु और साजिश’…TRP का मीटर हाई हो जाता था जब ‘सास बहु और साजिश’ का प्रसारण होता था….ये वो दौर था जब सीरियल का लोगों को इंतजार होता था। सीरियल के किरदारों में लोग अपना जुड़ाव महसूस करते थे….और इंतजार होता था कि सीरियल में आज क्या दिखाया जाएगा….

सीरियल्स की शूटिंग कैसे होती है….सीरियल्स की कहानी कौन गढ़ता है…सीरियल के कलाकारों की आपस में क्या ट्यूनिंग है….इस तरह के कई सवाल दर्शकों को मन के अंदर चलते थे…तो इस तरह के हर सवालों का जवाब बस ‘सास बहू और साजिश’ में मिल पाता था….भूकंप आ जाए या जलजला….सास बहू और साजिश को ड्रॉप करने की हिम्मत किसी में नहीं थी…..सास बहू और साजिश अगर चलना है तो चलेगा ही….सास बहू और साजिश की असली हीरो विभा मैम थी….

आज अचानक से पता चला कि विभा मैम हम लोगों के बीच नहीं रहीं….स्तब्ध कर देने वाली खबर….हालांकि मैंने कभी उनकी टीम में काम नहीं किया और ना मुझे वो व्यक्तिगत तौर पर जानती थीं…लेकिन मैं उनको जानता था..उनकी मेहनत….लगन…उनके समर्पण से बहुत कुछ सीखा था…..मीडिया इंडस्ट्री में एंटरटेनमेंट बीट को नई पहचान दिलाने वाली विभा मैम को शत…शत नमन…विनम्र श्रद्धांजलि….


सर्जना शर्मा-

विभा कौल भट्ट की खबर पर यकीन नहीं हो रहा है। विभा ज़ी न्यूज में डेस्क पर आऊट पुट टीम में थी। बहुत मेहनती, काम के अलावा उसको कुछ नहीं सूझता था। अपनी शिफ्ट में तेजी से काम करती भागती दौड़ती विभा। लेकिन अपनी 8 घंटे की शिफ्ट के बाद भी वो काम करती थी। वो एसाईनममेंट डेस्क पर जा कर इनपुट एडिटर से बात करके अपने लिए कोई एसाइनमेंट ले लेती थी। डेस्क पर काम करने के बाद फील्ड में स्टोरी करने निकल जाती थी। फिर आ कर अपनी स्टोरी की स्क्रिप्ट लिखना वायस ओवर करना और एडिट करवाना।

मैंने एक दिन विभा से पूछा इतनी मेहनत क्यों करती हो अपने एक दिन के 15-16 घंटे तो तुम ज़ी न्यूज को दे देती हो। उसने कहा कि वो एक अच्छी रिपोर्टर बनना चाहती है। उसका जवाब मुझे अच्छा लगा। वो अपने काम के बलबूते पर अपनी क्षमता साबित करना चाहती थी। उसका ध्यान सजने धजने में कम रहता और काम पर ज्यादा। किसी की चमचागिरी चापलूसी वो नहीं करती थी।

फिल्म और कल्चर में उसने अपनी अच्छी पकड़ बना ली। जब दिल्ली में अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव हुआ करता था तो मुझे और विभा को एक टीम के रूप में फेस्टीवल कवर करने की जिम्मेदारी दी गयी। आप यकीन मानिए उसने कितने सितारों के साथ लाइन अप कर लिए। कैमरामैन साथ रहता था बहुत सारे इंटरव्यू हम कर लेते थे। उस साल केरल की करूणम् फिल्म को गोल्डन पिकॉक मिला था। फिल्म के निर्माता निर्देशक को वो स्टूडियो ले आयी।

मीडिया में विभा जैसी लड़किया कम ही देखने को मिलती है जब लड़किया शार्ट कट खोजती है विभा कौल ने मेहनत की कठिन राह चुनी। उसकी मेहनत लगन और काम के प्रति समपर्ण रंग लाया। उसने अपने लिए जगह बनायी केवल मेहनत के बल पर।

जी न्यूज में रहते हुए ही उसके पापा चल बसे उस समय वो हिल गयी उसका भाई उससे छोटा था। उसने हिम्मत नहीं हारी वो और मजबूत बनी। फिर उसकी शादी कपिल भट्ट् से हो गयी उसको मुबंईं जाना पड़ा शादी करके। उसने मुबंई तबादला ले लिया। फिर वो स्टार न्यूज चली गयी वहां उसने सास बहू और साजिश प्रोग्राम बनाना शुरू किया जो कि छोटे पर्दे का सबसे हिट और लंबा चलने वाला शो बना। सभी फिल्मी सितारों से टीवी स्टार्स से उसकी जिगरी दोस्ती बनी। मुंबई में वो फिल्म और टीवी शो की महारथी बनी। जरा सोचिए शायद आपकी अदालत के बाद ये एक ऐसा शो है जो पिछले 21 साल से लोकप्रिय है।

विभा कौल भट्ट जैसी मेहनती लड़कियां मुझे बहुत अच्छी लगती हैं जो अपनी मेहमत से बडा मुकाम हासिल करती हैं। और वहां टिकी भी रहती हैं। विभा कौल ये समय तो नहीं था तुम्हारे चले जाने का। अलविदा विभा भगवान तुम्हें सदगति दे अपने चरण कमलों में तुमको स्थान दे। टीवी न्यूज की दुनिया में मेहनत से आगे बढ़ने वाली लड़कियों के लिए तुम हमेशा एक मिसाल रहोगी।

जिस बात का जिक्र मैं नहीं करना चाहती थी वो सुमित अवस्थी ने लिखा है उसकी शादी को लेकर। मेरा और विभा का एक अच्छा रिश्ता बन गया था काम काज से कुछ अलग व्यक्तिगत रिश्ता। विभा नाइट शिफ्ट में मेरे साथ अपनी शादी की दुविधा पर लंबी बात करती। उसको बहुत समझाया कि यदि तुमने अपनी मम्मी की बात नहीं मानी तो सोचो उनको कितना दुख होगा। तुम्हारे पापा भी इस दुनिया में नहीं हैं। उसको समझाना कोई आसान काम नहीं था मामला दिल का था। खैर मेरी कांऊसलिंग रंग लायी। वो कपिल से शादी करने को राजी हो गयी। बाद में उसमें मुझे कई बार धन्यवाद दिया कि आपने सही समझाया था। यदि सुमित अवस्थी न लिखता तो शायद मैं इस बारे में लिखती ही ना।


सुमित अवस्थी-

तीस वर्षों का साथ अचानक ख़त्म हो गया… करीब तीस साल पहले विभा से परिचय हुआ… ज़ी न्यूज़ के उन दिनों में विभा एक बहुत बड़ी शख़्सियत पर जान छिड़कती थी (जानबूझकर नाम नहीं लिख रहा हूं… क्योंकि उससे इजाज़त नहीं ले पाया ना मैं) … उसके बाद उसकी शादी की जब खबर मिली तो हमने उसकी बहुत टांग खिंची थी…. पर विभा के जीवन में आये कपिल भट से जब मुलाकात हुई… भेंट हुई तो समझ में आ गया कि इससे परफेक्ट मैच विभा को मिल ही नहीं सकता…

बेहद अंडरस्टैंडिंग और बहुत शानदार दोस्त .. वो कपिल और विभा की शादी हम ज़ी न्यूज़ के करीबी दोस्तों ने एटेंड की और पहली कश्मीरी पंडित की शादी को शायद हम दोस्तों ने इतने करीब से देखा… तब से लेकर आजतक विभा से दोस्ती बनी रही… इन तीस सालों में हम दोनों अलग-अलग चैनल्स में रहे पर दोस्त बने रहे .. बात करते रहे… मौके-बेमौके मिलते रहे। एक दो बार तो मैं मुंबई में विभा के घर पर खाना खाने भी गया हूं… जबकि हम अलग-अलग चैनलों में काम करते थे! इसके बाद तो भगवान कहिये, बप्पा कहिये या किस्मत … हम 2018 में फिर मिले जब मैंने एबीपी न्यूज़ ज्वाइन किया!

एबीपी न्यूज़ में बेहद करीब से साथ-साथ काम किया … हंसी मजाक, पार्टी के अलावा मुद्दों पर बहस, academic चीजों पर एक दूसरे से नाराज़गी… वो सब हमने देखी! पर दफ्तर के बाहर दोस्ती कम नहीं हुई… सम्मान, प्यार और भरोसा बना रहा…!! कल ही मैं मुंबई में था..विभा के शहर में! मन में ख्याल भी उसका आया खासकर तब जब मैं बप्पा के दर्शन करने सिद्धि विनायक के दरबार में गया…विभा गणपति बप्पा को .. 11/11 को बहुत मानती थी… दीवानेपन की हद तक! विभा को सरप्राइज करने की आदत थी…कई बार चौंका चुकी थी… पर इस बार चौंकाया नहीं झटका दिया है… शॉक दिया है!

दिलदार इंसान, हंसमुख व ऊर्जा से भरी और अपनी टीम व दोस्तों के लिये जान छिड़कने वाली विभा जीवन में इन ऊंचाइयों पर जायेगी इसका एहसास मुझे उसको ज़ी न्यूज की नौकरी के शुरुआती दिनों में हो गया था! बहुत बहुत लगनशील थी! काम खत्म नहीं तो घर नहीं जाना है… दफ्तर में ही बने रहना है! एक बेहतरीन इंसान विभा कौल भट का चले जाना…हमारे परिवार की निजी क्षति है ! ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में स्थान दे एवं ‘कपिल’ व ‘खुशी’ को यह दुख सहन करने की शक्ति दे … ॐ शांति!


दोनों का नाम हिन्दी के ‘व’ (यानी अंग्रेजी के ‘V’) से शुरु होता है…. मेरी बुआ विमलाजी और मेरी दोस्त विभा कौल भट। (पहली तीन तस्वीरें बुआजी और परिजनों की है; आखिरी की दो तस्वीरें विभा के साथ ABP News के दिनों की हैं) दोनों कल सुबह-सुबह लगभग एक ही समय पर अपनों का साथ छोड़ गयीं….

बुआजी करीब 85 साल की थीं लखनऊ में दीदी के घर पर थीं और विभा महज 52 साल की थीं, पर वो मुंबई के जाने माने अस्पताल लीलावती में एक सर्जरी के लिये भर्ती थीं….

दोनों को आज 25 नवंबर 2025 अनंत यात्रा पर जाना होगा.. जाने कब और कहां किस्मत में ये लिखा होगा!! प्रभुलीला जाने न कोय! ये दिन बहुत-बहुत कष्टदायक रहा!

मूल खबर…

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