संजय कुमार सिंह
बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी हिन्दू युवक की मौत के बाद भड़की हिन्सा में भारतीय उच्चायोग समेत तीन अखबारों के दफ्तर में आग लगा दी गई। डेली स्टार के 25 पत्रकार चार घंटे तक छत पर फंसे रहे। आज यह खबर कई अखबारों की लीड है तो नवोदय टाइम्स के पहले पन्ने से गायब।
भारत से संबंधित इस खबर की प्रस्तुति अखबारों का मिजाज समझने में मददगार हो सकती है। वैसे भी अखबारों के भिन्न शीर्षक और प्रस्तुति दिलचस्प है। आज अमर उजाला में प्रदूषण की खबर चार कॉलम में सेकेंड लीड है जबकि बांग्लादेश की खबर चार कॉलम की लीड। शीर्षक है, बांग्लादेश में हिंसा, 3 अखबारों के दफ्तर फूंके, हिंदू युवक की पीट-पीट कर हत्या। उपशीर्षक है, उपद्रवियों ने चटगांव में भारतीय दूतावास को निशाना बनाया, छात्र नेता ओस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिन्सा और डेली स्टार अखबार की इमारत में आग के बाद छत पर फंसे रहे 25 पत्रकार। दैनिक भास्कर (दिल्ली) और नवभारत टाइम्स (मुंबई) में भी यह खबर लीड है। नभाटा ने पीटीआई की खबर छापी है। देशबन्धु में चार कॉलम की खबर का शीर्षक है, बांग्लादेश में भड़की हिंसा, भारत विरोधी नारे लगाए।
मेरे अंग्रेजी अखबारों में सिर्फ द हिन्दू में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, प्रमुख नेता की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़की। बाकी सभी अखबारों में यह खबर लीड है। कोलकाता के द टेलीग्राफ में यह बैनर है और बांग्ला अखबार की जलती बिल्डिंग की फोटो छपी है जिसमें हैरान-परेशान लोग भी नजर आ रहे हैं। एक और तस्वीर द डेली स्टार के दफ्तर की है जिसमें तोड़-फोड़ का असर दिख रहा है। शीर्षक है – बांग्लादेश जल रहा है, भारत पर गुस्सा। दि एशियन एज का शीर्षक है, बांग्लादेश फिर उबल रहा है, भारतीय उच्चायोग पर हमला। तीन बुलेट वाले फ्लैग शीर्षक में एक है, भारत समर्थक अखबारों के दफ्तर पर हमला। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, भारत विरोधी कट्टरपंथी की मौत के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन। इंट्रो है, भीड़ ने हिन्दू व्यक्ति को लिन्च किया; अखबार के कार्यालय में आग लगाई गई।
हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, बांग्लादेश में फिर से अशांति, भारतीय मिशन अलर्ट पर। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, हसीना विरोधी एक्टिविस्ट की मौत पर हिंसा भड़की, ढाका में दो दैनिक अखबारों के दफ्तर में आग लगाई गई। इंट्रो है – सैनिक सड़कों पर उतरे, अंतरिम सरकार ने फरवरी में चुनाव से पहले शांति बनाए रखने की अपील की।
देश में मोदी सरकार के बनाए नए नियमों के अनुसार, बैंको, व्यवसायों, दान लेने वालों के लिए अपने ग्राहकों को जानना उनका पूरा विवरण होना जरूरी है। बैंक केवाईसी के नाम पर खाता खोलने के लिए ग्राहकों से आधार-पैन सब मांगते हैं। 2014 के आस-पास जो जन-धन खाते बहुत कम दस्तावेज से उदारता के साथ खोले गए थे उनके लिए भी 10 साल बाद केवाईसी जरूरी हो गया और गरीबों को काफी परेशान होना पड़ा। लेकिन मतदाता सूची में लोगों के पिता का नाम तो ठीक नहीं ही है, मकान नंबर के लिए शून्य लिखा गया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ने उसकी भी दिलचस्प व बहुचर्चित व्याख्या की थी। डिजटल भारत में चुनाव आयोग डिजिटल मतदाता सूची नहीं देता है लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी के बहुचर्चित, लोकप्रिय और सुविधाजनक मोहल्ला क्लिनिक की सुविधाओं का लाभ उठाने वालों का पूरा नाम पता नहीं था तो उसमें भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई। अब भाजपा की सरकार ने उसका नाम बदलकर मोहल्ला क्लिनिक का स्वरूप बदल दिया है। अब उसकी जगह आयुष्मान योजना लागू है जो अलग तरह के जरूरतमंदों के लिए है और मोहल्ला क्लिनिक का विकल्प नहीं है।
संसद में कहा जा चुका है कि इसकी डिजाइन ही दोषपूर्ण है। मैंने भी यहां लिखा है कि अस्पताल न हों तो बीमा का क्या लाभ लेकिन ऐसे उदाहरण हैं जब सरकार ग्राहक या उपयोगकर्ता या वोटर का विवरण न दे तो ठीक है लेकिन विपक्ष की सरकार के मामले में वह भ्रष्टाचार हो जाता है। इस बारे में मैंने हाल में यहां लिखा भी है। आज इंडियन एक्सप्रेस में इससे संबंधित एक दिलचस्प खबर है। आप जानते हैं कि सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का कितना प्रचार किया है। उसके नतीजों के बारे में कोई सूचना नहीं है। ऐसी इस सरकार की तमाम योजनाओं और प्रचार के बारे में कहा जा सकता है। इसी क्रम में आज की खबर बताती है कि योजना में बैंक खाते का नंबर 11111111111 है और बिहार के गया तथा उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक ही फोटो का उपयोग किया गया है। ऐसे कई केंद्र बंद किए जा चुके हैं और 34 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को पैसे दिए जाने हैं। सरकार ने यह योजना युवाओं की बेरोजगारी दूर करने के लिए की थी और वर्षों कौशल विकास मंत्री रहे सांसद रुद्र प्रताप रुड़ी ने सांसद निधि से एम्बुलेंस खरीदे थे जो कोविड के समय ढंककर रखे थे और इसका कारण यह बताया गया था कि ड्राइवर नहीं हैं। यह 2021 की बात है और कौशल विकास योजना का खुलासा अब हुआ है। यह सीएजी की जांच में पता चला है और खबर इसी हवाले से है। खबर के अनुसार, योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी। आज की खबरों में एक खबर देशबन्धु में है। इसका शीर्षक है, नकली कफ सिरप कारोबारियों पर सरकार का बुलडोजर खामोश। इसके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहा छपा है, सपा से रहे माफिया के संबंध। इसपर अखिलेश यादव ने कहा है, जब खुद फंस जाओ तो दूसरे पर इल्जाम लगाओ, ये खेल बहुत पुराना है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


