संजय कुमार सिंह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। शनिवार को खराब मौसम के कारण नादिया में उनका हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया तो उन्होंने कोलकाता से ही वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया। बंगाल में टीएमसी शासन की आलोचना की तथा महा जंगल राज खत्म करने का वादा किया है। यह खबर अन्य अखबारों के साथ इंडियन एक्सप्रेस में भी प्रमुखता से है। इंडियन एक्सप्रेस में कल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में घपले की खबर के बाद आज खबर है कि इलेक्टोरल बांड को खारिज किए जाने के बाद राजनीतिक दलों को चुनावी ट्रस्ट का चंदा तीन गुना हो गया है। खबर यह भी है कि भाजपा को 2024-25 में कुल 3811 करोड़ रुपए का 82 प्रतिशत मिला है जबकि कांग्रेस का हिस्सा 8 प्रतिशत से भी कम है। बाकी 10 प्रतिशत में अन्य सभी दल हैं। हाल की एक खबर से पता चला था कि चुनाव आयोग के आडिट रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2024 की स्थिति के अनुसार भाजपा के पास बैंक और नकद मिलाकर लगभग ₹7,113 करोड़ का फंड था। यही रिपोर्ट बताती है कि कांग्रेस के पास उस समय लगभग ₹857 करोड़ का फंड बैलेंस था। कांग्रेस सांसद अजय माकन ने कहा है कि भाजपा के पास इतनी धनराशि होने के कारण चुनावी मैदान असंतुलित हो गया है। वैसे भी, एक चुनाव के समय आयकर विभाग ने कांग्रेस का खाता सील कर दिया था और तब भी लेवल प्लेइंग फील्ड की बात उठी थी। इस तरह, देश में चल रहे राम राज और राज्यों में इसके विस्तार की प्रधान प्रचारक की कोशिशों की खबर आज अखबारों में एक साथ है। इसका सार यही है कि राम राज में जब चुनाव चोरी और वोट चोरी पर कोई कार्रवाई नहीं है, जबरदस्ती एसआईआर हो रहा है तो इलेक्टोरल बांड को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद चुनाव ट्रस्ट से मिलने वाला चंदा तीन गुना हो गया है। उसके 82% पर भाजपा का कब्जा है और देश के प्रधानमंत्री या प्रधान सेवक तथा भाजपा के प्रधान प्रचारक को पश्चिम बंगाल में ‘महा जंगल राज’ होने की चिन्ता है तथा कहा है कि बिहार को लालू के जंगल राज से बचाने के बाद अब बंगाल को ममता के महा जंगल राज से बचाना है।
पश्चिम बंगाल का चुनाव 2026 में होने वाला है और हमेशा की तरह चुनाव जीतने की सरकारी कोशिशें शुरू हो गई हैं। कल की रैली में प्रधानमंत्री को पश्चिम बंगाल के लिए योजनाओं की घोषणा करनी थी लेकिन गो बैक के नारों और बैनर के साथ खराब मौसम के कारण प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया तो बाद में राज्यपाल ने योजनाओं की घोषणा की। चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को प्रगति विरोधी कहा और यह आरोप भी लगाया कि वे घुसपैठियों को बचाने के लिए एसआईआर का विरोध कर रही हैं। दूसरी ओर, असम के विकास की प्रतीक राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर सात हाथियों के मरने की खबर है। रामराज में भारत की महानता का आलम यह है कि नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार, एपस्टीन फाइलों में भारत के आयुर्वेद का भी उल्लेख है। कहने की जरूरत नहीं है कि एपस्टीन फाइलों की चर्चा सारी दुनिया में है। भारत में भी जबरदस्त चर्चा रही लेकिन मेरे किसी अखबार के पहले पन्ने पर आज दिखी। वह भी आयुर्वेद के उल्लेख के लिए। पहले पन्ने की खबरों में एक टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर भी उल्लेखनीय है। इसके अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा है कि असम को पूर्वी पाकिस्तान यानी मौजूदा बांग्लादेश का भाग बनाने की साजिश में कांग्रेस लगभग शामिल हो गई थी। हम जानते हैं कि कांग्रेस या इंदिरा गांधी ने 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग करवाकर दुनिया का नक्शा बदल दिया था और प्रधानमंत्री उस समय की इस साजिश को अब बता रहे हैं या अब जान पाए हैं। जो भी हो वे कहेंगे तो पहले पन्ने की खबर होगी ही। सोशल मीडिया में प्रचारकों ने जो गंदगी फैला रखी है वह भी लगभग असह्य है। हालांकि, प्रधानमंत्री का खुलासा 1971 के बारे में नहीं 1947 के बारे में है। इसपर हंसा ही जा सकता है लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा है तो खबर भी है। आप जानते हैं कि इससे पहले वंदेमातरम भी मुद्दा था और इसपर संसद में चर्चा हो चुकी है। यही नहीं, प्रधानमंत्री ने यह सवाल भी किया है कि टीएमसी घुसपैठियों से वापस जाने के लिए क्यों नहीं कहती है। यह भी टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर है और असम वाली खबर के साथ छपी है। कहने की जरूरत नहीं है कि विदेशी नागरिकों और विदेश नीति का मामला केंद्र सरकार का होता है। वे कहते रहे हैं कि घुसपैठियों को वोट के लिए बसाया जाता है। उन्हीं को हटाने के लिए एसआईआर हो रहा है और अब वे टीएमसी से सवाल पूछ रहे हैं। देशबन्धु में खबर भी है, कांग्रेस ने वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को छूट दी।
प्रधानमंत्री जब 1947 और पश्चिम बंगाल के महा जंगल राज की चिन्ता में हैं तब हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, शीत लहरी, घने कोहरे ने उत्तर भारत को पंगु बनाया। इंडियन एक्सप्रेस में आज ही खबर है कि डबल इंजन वाले राम राज्य में लड़कियों को परेशान करने के आरोपी लड़कों की मांओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। थानेदार चाहते हैं कि इन लड़कों की मांओ को सीख दें। विकास, प्रगति और राम राज की इन खबरों के बीच असम में राजधानी एक्सप्रेस से हाथियों की टक्कर और सात हाथियों की मौत की खबर द टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड और द हिन्दू में सेकेंड लीड है। अमर उजाला की लीड तो बांग्लादेश है लेकिन असम में सात हाथियों की मौत की खबर भी पहले पन्ने पर है। आज के अखबारों और पहले पन्ने की इन खबरों से साफ है कि प्रधानमंत्री अब बंगाल जीतने के लिए रोज 18 घंटे मेहनत करेंगे और यह मई में किसी समय चुनाव नतीजे आने तक जारी रहेगा। अखबारों में पुरानी बातें याद करने का रिवाज नहीं है पर आपको शायद याद होगा कि 2016 में चुनाव प्रचार के दौरान कोलकाता में एक निर्माणाधीन पुल गिर गया था तो नरेन्द्र मोदी ने इसका कारण भ्रष्टाचार को बताया था और ममता बनर्जी ने उसे ईश्वर की कार्रवाई यानी ऐक्ट ऑफ गॉड कहा था। नरेन्द्र मोदी उसे ऐक्ट ऑफ फ्रॉड कहकर ममता बनर्जी का मजाक उड़ाते रहे। उसके बाद देश भर में और डबल इंजन वाले राज्यों में भी कई पुल गिरे हैं। अब पुल या भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं होता है। 2021 में दीदी ओ दीदी की उनकी फूहड़ प्रचार शैली चर्चित हुई थी और उन्होंने एलान कर दिया था, दो मई दीदी गई। पर वो सब नहीं हुआ और अब महा जंगल राज का नया शिगूफा है। कहने की जरूरत नहीं है कि जंगल राज को याद करने वाले चुनाव प्रचार के बाद बिहार की जीत से उत्साहित नरेन्द्र मोदी अब महा जंगल राज की नई हवा बना रहे हैं।
नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद ना खाउंगा ना खाने दूंगा की घोषणा की थी और 11 वर्षों बाद भी वे विपक्षी सरकारों को भ्रष्ट बताते हैं और अपनी भ्रष्टाचार के तमाम आरोपियों के साथ सरकारें तथा पार्टी चला रहे हैं। जहां तक चुनाव प्रचार की बात है 2014 से पहले चुनाव की तैयारियां पार्टियां और चुनाव लड़ने वाले करते हों सरकार और प्रधानमंत्री तो नहीं ही करते थे। चुनाव की घोषणा से पहले चुनाव की चर्चा भी दुर्लभ थी। फिर भी प्रधानमंत्री ने बिहार जीतने के बाद बंगाल में डबल इंजन और महा जंगल राज का राग छेड़ दिया है। प्रधानमंत्री का ऐसा कहना द टेलीग्राफ के लिए भी लीड है और फ्लैग शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने बंगाल को लालू के बिहार से खराब कहा। मुख्य शीर्षक है, टीएमसी पर महा जंगल राज का हमला। कहने की जरूरत नहीं है कि प्रधानमंत्री ने कहा है तो इसके समर्थन में भी चीजें होनी चाहिए। नरेन्द्र मोदी अपने आरोपों के समर्थन में तर्क या सबूत नहीं देते हैं। मीडिया उसे जस का तस प्रचारित करने से ज्यादा कुछ नहीं करता है और प्रधानमंत्री का विरोध तो कर ही नहीं सकता है। वरना किसी अखबार या पत्रकार को बताना चाहिए कि कैसे योगी का उत्तर प्रदेश लालू के बिहार से बेहतर और कैसे ममता का बंगाल चंद्रबाबू के आंध्रप्रदेश से खराब है। विकास के दावों के बावजूद द हिन्दू की लीड के अनुसार अमेरिका चाहता है कि भारत के परमाणु नियम वैश्विक स्तर पर तालमेल में हों। उपशीर्षक है, ट्रम्प के दस्तखत वाले दस्तावेजों में 2008 के परमाणु करार को लागू किए जाने का आकलन करने के लिए व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि कांग्रेस के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने एक समय के अच्छे फ्रेंड की नाराजगी कम करने के लिए जबरन शांति बिल पास कराया। कहने की जरूरत नहीं है कि कांग्रेस का यह आरोप पर्याप्त गंभीर है लेकिन प्रधानमंत्री ने बंगाल को महा जंगल राज कह दिया तो यह भी महत्वपूर्ण है। हमलोग इसी को हेडलाइन मैनेजमेंट कहते हैं। संसद में जबरन पास कराए गए शांति विधेयक पर कांग्रेस का यह आरोप और किसी अखबार में प्रमुखता से तो नहीं दिखा।

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
सरकारी मनमानी जारी है और इसमें मनरेगा का नाम बदल कर उसे जबरन वीबी जी राम जी किया जाना शामिल है। सोनिया गांधी ने इसका विरोध किया है लेकिन यह खबर दि एशियन एज में सिंगल कॉलम में है। और नरेन्द्र मोदी की खबर लीड है। इस तरह, अब यह साफ हो चला है कि वोट और चुनाव चोरी के आरोपी नरेन्द्र मोदी चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करेंगे। अदाणी से दोस्ती और समूह पर अपनी कृपा जारी रखेंगे। दि एशियन एज ने गुवाहाटी में नए टर्मिनल बिल्डिंग के उद्घाटन के मौके पर अदाणी के साथ प्रधानमंत्री की फोटो छापी है। भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कुछ नहीं करेंगे, नेशनल हेरल्ड मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) हार नहीं मानेगा और चुनावी चंदे का बंटवारा ईमानदारी से नहीं होने दिया जाएगा। यह स्थिति कई साल में बनी है। मीडिया का बड़ा हिस्सा सरकार का प्रचार करता रहता है और इंडियन एक्सप्रेस की खबरों से अब पहले जैसा हंगामा नहीं होता है। खुलासों से सरकार और आम पाठकों पर प्रभाव नहीं पड़ता है लेकिन एक एंकर का अचानक रंग बदलना चर्चा में है। हालांकि, ज्यादातर प्रचारक आंख मूंद कर सरकार के समर्थन में कुतर्क पेश कर रहे हैं। प्रख्यात पत्रकार रजत शर्मा ने एक्स पर लिखा है (संपादित), दिल्ली में हालत इसीलिए ज़्यादा खराब है क्यूंकि यहां पर गाड़ियों का ज़हरीला धुआं, सड़कों पर उड़ती धूल और कोयले से चल रहे प्लांट्स हवा को और भी प्रदूषित कर देते हैं। एक्सपर्ट्स ये भी बताते हैं कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति भी एक बड़ी वजह है। दिल्ली की आकृति एक कटोरे की तरह है जो तीन तरफ से अरावली की पहाड़ियों से घिरी है। इसलिए भी प्रदूषित हवा दिल्ली में कैद हो जाती है। बाहर नहीं निकल पाती। इसलिए दिल्ली के प्रदूषण का इलाज ना तो एक दिन में हो सकता है ना एक सीजन में। इसके लिए एक दीर्घकालिक योजना बनाने की ज़रूरत है। इसमें सबके सहयोग की आवश्यकता होगी। इससे पहले दिल्ली के पर्यावरण मंत्री दिल्ली के प्रदूषण के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। ऐसे जैसे तब अरावली की ये पहाड़ियां नहीं रही हों। हालांकि, रजत शर्मा ने 10 साल में कुछ नहीं किए जाने का कारण यह बताया है, लखनऊ का प्रदूषण स्तर तो कंट्रोल में है लेकिन दिल्ली के प्रदूषण की चर्चा पूरी दुनिया में है। दिल्ली के आस-पास के इलाके नोएडा और गुड़गांव भी प्रदूषण की वजह से खबरों में हैं। लेकिन ये प्रदूषण सिर्फ इन इलाकों तक सीमित नहीं है। हरिद्वार से देहरादून तक हवा में ज़हर है। बिहार में छपरा और हाजीपुर जैसे इलाके सबसे ज़्यादा प्रदूषित हैं। झारखंड में धनबाद की हवा खराब है तो उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर, लखनऊ और मुज़फ्फरनगर से जो रपटें आई हैं उनके मुताबिक बुरा हाल है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


