प्रशांत कनौजिया-
NDTV कभी सच्ची पत्रकारिता और ईमानदारी के लिए जाना जाता था। पहले वह सरकार से कड़े और तीखे सवाल पूछता था। वह आम लोगों के पक्ष में पत्रकारिता करता था।
लेकिन NDTV की एंकर पद्मजा जोशी जेफ्री एपस्टीन के समर्थन में आ गईं, क्योंकि EpsteinFile में मोदी और एक केंद्रीय मंत्री का नाम सामने आया था।
अडानी के NDTV टेकओवर के बाद वहां सारे गोदी मीडिया के कचरे को इकट्ठा कर लिया गया और नौकरी पर रख लिया गया। इसके बाद चैनल नियमित रूप से भाजपा सरकार की चाटुकारिता करने लगा। वह सुधर्शन चैनल का एक ‘रिफाइंड वर्जन’ बन गया।
पद्मजा जोशी ने अपने उत्साह में प्रमोशन पाने के चक्कर में एपस्टीन का पक्ष चुन लिया, ताकि मोदी सरकार की छवि बचाई जा सके।
हा हा मीडिया दुर्दशा, न जाई देखी..
१) ‘NDTV’ की एंकर जैफरी एप्स्टीन और उसके गिरोह के समर्थन में गला फाड़ रहीं हैं।
२) ‘आजतक’ पर अंजना ओम ‘मोदी’ ओह क्षमा कीजिये अंजना ओम कश्पय, मुगल बादशाह बाबर के यौन व्यवहार की ‘मस्तराम’ टाइप कहानी सुना रहीं हैं। -डॉ राकेश पाठक, वरिष्ठ पत्रकार
सुप्रिया श्रीनेत-
दुनिया एपस्टीन पर थूक रही है और हिंदुस्तान में उस कुकर्मी को एक ‘power broker’ बताया जा रहा है. उसके निजी जीवन और काम का अंतर समझाया जा रहा है
यह एक महिला एंकर कर रही हैं और सिर हिला कर, बोलकर सहमति BJP की महिला प्रवक्ता दे रही हैं।
मोदी मंत्री के बचाव में नैतिकता जाये भाड़ में…।
सुरेंद्र राजपूत-
देश को समाज को और राजनीति को ऐसे मीडिया से असली खतरा है। ये मीडिया जेफरी एपस्टीन जैसे नीच अपराधी को भी बिजनेसमैन बता कर बचा रहा है!
शर्मनाक है ये और ये सब मोदी सरकार को बचाने का कुत्सित प्रयास है। नीचता का अतिरेक है।
सदफ आफरीन-
ये है वो शर्मनाक चेहरा जो बच्चों के बलात्कारियों को “प्रोफेशनल नेटवर्किंग” का नाम देकर बचाने में लगी है!
Jeffrey Epstein सिर्फ “पावर ब्रोकर” नहीं था, वो एक क्रूर बाल-यौन शोषक, ट्रैफिकर और रेपिस्ट था!
जब आपके “नेताओं” के नाम एपस्टीन फाइल्स में आए तो अचानक “प्रोफेशनल मीटिंग” हो गई??
जब बेटियों की इज़्ज़त लुट रही हो, तब “नेटवर्किंग” कहकर सफाई दे दो?? शर्म करो! औरत होने के नाते भी शर्म करो!
ये गोदी मीडिया नहीं, ये आत्मा बेच चुके दलाल है, जो बलात्कारियों को बचाने के लिए हर हद पार कर रहे है!
शर्मनाक! ये मीडिया लालची है! ये बस पैसा और पॉवर वालो की है!
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