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तीन माह के वेतन के लिए संघर्ष!

मेरा नाम नलिनी सिंह पालीवाल है। मैंने APN News में निष्ठा और ईमानदारी से अपना कार्य किया। लगातार तीन महीने तक वेतन न मिलने के कारण मैंने कई बार एमडी से मुलाकात कर अपना वेतन देने का अनुरोध किया, लेकिन मुझे किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली। मुझे कमरे का किराया देना होता था और भुगतान न होने के कारण मकान मालिक ने मुझे घर खाली करने के लिए कहना शुरू कर दिया।

कंपनी द्वारा वेतन का भुगतान न किए जाने से मैं मानसिक रूप से अत्यंत परेशान हो गई और रोज़मर्रा के जीवन-यापन की मजबूरी में मुझे इस्तीफ़ा देना पड़ा। इस्तीफ़ा देने से पहले मेरी मुलाकात कंपनी की एमडी से हुई थी। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया था कि मेरा पूरा बकाया वेतन शीघ्र दे दिया जाएगा।

इस बात को अब लगभग दो वर्ष होने वाले हैं। कई बार एचआर को फोन करने के बावजूद न तो फोन उठाया गया और न ही ईमेल का कोई उत्तर दिया गया। एमडी ने मुझे X और व्हाट्सऐप पर भी ब्लॉक कर दिया, क्योंकि मैं उनसे अपने वेतन के बारे में पूछ रही थी।

आज मैं नौ महीने की गर्भवती अवस्था में अपने बकाया वेतन के लिए लेबर कमिश्नर कार्यालय, नोएडा के चक्कर काट रही हूँ। मेरा अपराध केवल इतना है कि मैंने प्रबन्धन की बातों पर भरोसा किया। तीन महीने की मेरी मेहनत की कमाई आज तक मुझे नहीं मिली, बल्कि बदले में एक धमकी भरा ईमेल मिला।

ये लोग सामने से अत्यंत सौम्यता और अपनत्व से बात करते हैं, मानो आपके हितैषी हों, लेकिन बाद में उनका वास्तविक व्यवहार सामने आता है। इन्हें कानून का भी कोई भय नहीं है। मैं पहली कर्मचारी नहीं हूँ जिसके साथ ऐसा हुआ है; मेरे जैसे और भी कई लोग हैं।

सैलरी संकट के दौरान भी हमने तीन महीने तक संस्थान का कठिन परिस्थितियों में साथ दिया, लेकिन बदले में हमें हमारा हक तक नहीं मिला। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं लंबे समय तक अदालतों के चक्कर काट सकूँ, फिर भी मैं मजबूर हूँ, क्योंकि मुझे अपना हक और अपनी मेहनत की कमाई चाहिए।

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