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छत्तीसगढ़

लूटकाल 1: छत्तीसगढ़ में 14 लाख रुपये में बनी अटल बिहारी की तांबे की मूर्ति पहली ही बारिश में सीमेंट हो गई!

News36 thumbnail showing an orange statue with raised fist and Hindi headline about 14 lakh ki pratima controversy (overlay text).

कोरबा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारों में गजब तरीके का लूटकाल चल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की करीब 14 लाख रुपये की प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। वायरल तस्वीरों और रिपोर्टों के मुताबिक, बारिश के बाद प्रतिमा के कुछ हिस्सों से बाहरी परत उखड़ गई, जिसके बाद अंदर सीमेंट जैसा पदार्थ दिखाई देने लगा।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रतिमा को तांबे की बताकर तैयार किया गया था, लेकिन बारिश के बाद इसके कुछ हिस्सों की परत निकलने से निर्माण में इस्तेमाल सामग्री को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

वायरल तस्वीरों में प्रतिमा के चेहरे, हाथ और शरीर के कुछ हिस्सों पर बाहरी परत क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है। इन जगहों पर अंदर का हिस्सा साफ नजर आ रहा है। इसे लेकर प्रतिमा की गुणवत्ता और निर्माण लागत पर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है।

हालांकि, उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती कि प्रतिमा पूरी तरह तांबे की थी या तांबे की बाहरी परत के साथ किसी अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। न ही उपलब्ध स्रोतों से यह स्पष्ट है कि प्रतिमा के निर्माण में कुल कितनी तांबे की सामग्री इस्तेमाल हुई थी।

इस मामले में संबंधित स्थानीय प्रशासन या प्रतिमा निर्माण एजेंसी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही निर्माण सामग्री और गुणवत्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


जब ये लोग भगवान को नहीं छोड़ते तो मृत इंसान को क्या छोड़ेंगे?? मामला छग का है.. अटलजी की 14 लाख की तांबे की प्रतिमा बताई गई,, जबकि वास्तव में मुश्किल से 1 लाख में सीमेंट की बनाकर उस मूर्ति पर तांबे का रंग पोत दिया.. फिर तेज बारिश में पोल खुल गई..
इससे पहले हम उज्जैन के महाकाल लोक में बनी फाइबर की मूर्तियों को हवा में उड़ते टूटते देख चुके हैं,, वहां पर उन देवताओं की मूर्तियों को पत्थर का बताकर लाखो रुपए अंदर किए थे.. अगर तूफान नहीं आता तो किसी को वर्षों तक पता नहीं चलता.. हंगामा होने पर उन्हें दोबारा पत्थर से बनाया गया.. (यानी डबल भ्रष्टाचार)..
लगता है मंदिरों और मूर्तियों में चोरी की आदत पड़ चुकी है इन्हें.
-सुरेश चिपलुनकर

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