पहला, आपने जो खबर प्रकाशित की थी कि इकबाल अहमद ने इस्तीफा दे दिया है, वह अब वापस हो गया है। बताया जा रहा है कि आपकी (Bhadas4Media) खबर प्रकाशित होने के बाद उनका इस्तीफा वापस ले लिया गया।
दूसरा, वहां काम करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि यह कहना सही नहीं है कि BBC इंडिया में मुसलमानों को मौका नहीं मिलता। उनके मुताबिक, उन्हें पर्याप्त अवसर मिलते हैं, बल्कि कुछ विभागों में उनकी संख्या अधिक है। उदाहरण के तौर पर, वीडियो एडिटर टीम का प्रमुख मुस्लिम है और दावा किया जा रहा है कि उसकी टीम में अधिकांश सदस्य मुस्लिम हैं तथा उसने कोई हिंदू नियुक्त नहीं किया।
तीसरा, हाल ही में हिंदी टीम की एक महिला कर्मचारी ने कथित तौर पर एक मुस्लिम सहकर्मी से परेशान होकर इस्तीफा दे दिया। आरोप है कि मामले में कार्रवाई उस पुरुष कर्मचारी के बजाय महिला पर ही की गई और उसके खिलाफ ही अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया गया।
चौथा, BBC इंडिया की पत्रकार सर्वप्रिया सांगवान को लेकर भी अंदरूनी असंतोष की चर्चा है। कुछ कर्मचारियों का दावा है कि मेहताब आलम ने भी उनसे परेशान होकर नौकरी छोड़ी थी। अब चर्चा है कि सर्वप्रिया सांगवान स्वयं भी किसी अन्य संस्थान में जाने की तैयारी में हैं और उससे पहले अपनी प्रोफाइल मजबूत करने में लगी हैं। आरोप है कि इसी वजह से वह अपने लगभग हर वीडियो की हेडलाइन में रिपोर्ट के विषय के बजाय अपना नाम प्रमुखता से लिखवा रही हैं। उदाहरण के तौर पर, राखी सावंत के एक इंटरव्यू में हेडलाइन में “Featuring Sarvapriya Sangwan” लिखा गया, जिसे कुछ कर्मचारी BBC की संपादकीय परंपरा और नियमों के खिलाफ बता रहे हैं।
पांचवां, कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि BBC इंडिया में अब पहले की तुलना में कर्मचारियों का आना-जाना काफी बढ़ गया है। कुछ लोगों का आरोप है कि अब नियुक्तियों में मेरिट के बजाय सिफारिश का प्रभाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि पहले कर्मचारी कई वर्षों तक संस्थान में बने रहते थे, जबकि अब लगातार भर्ती और इस्तीफों का सिलसिला देखने को मिल रहा है।




एक पत्रकार द्वारा भेजे गए इनपुट पर आधारित
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