उपराष्ट्रपति के इशारे पर भी अमित शाह उपस्थित नहीं हुए – बड़ी खबर है। जब सीबीआई बोफर्स मामले में कुछ साबित नहीं कर सकी और मामला बंद हो गया तो नीट मामले में मास्टरमाइंड ठहराने की उसकी ‘जांच’ खबर क्यों होनी चाहिए? दोनों में एक समानता है, भाजपा का हित सधता है। इसलिए दोनों लीड हो या दोनों नहीं हो। अमर उजाला ने एक को लीड बनाया है। द हिन्दू ने भी बोफर्स की खबर की तरह पहले पन्ने पर है। दूसरी खबर को कहीं महत्व नहीं मिली जबकि यह पक्की है। वैसे भी जबकि आरोप से बड़ी खबर बरी होना।
संजय कुमार सिंह
वैसे तो आज की सबसे बड़ी खबर यही होनी थी कि उपराष्ट्रपति का इशारा भी नाकाम रहा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राज्य सभा नहीं पहुंचे। मेरे दस अखबारों में यह सिर्फ द टेलीग्राफ में लीड है। दिल्ली के लिए आज दूसरी बड़ी खबर बारिश से परेशानी है। कई अखबारों में ट्रैफिक जाम और पानी से भरी सड़क की तस्वीर है। देशबन्धु में यह खबर लीड है। इसका शीर्षक है, दिल्ली-एनसीआर में आफत की बारिश। उपशीर्षक है, सड़कें बनी स्विमिंग पूल, जलभराव से थमी गाड़ियों की रफ्तार, जगह-जगह जलभराव से लोगों की मुश्किलें बढ़ीं। जाहिर है, इस खबर से सरकारी तैयारियों की पोल खुलती है। राजधानी समेत पूरे एनसीआर में डबल इंजन की सरकार तो है ही नगर निगमों और स्थानीय निकायों पर भी भाजपा ही हावी है। फिर भी समस्या पहले के मुकाबले ज्यादा है लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया में सरकार को राहत देने वाली खबर है। शीर्षक के अनुसार, शहर में अगस्त का पहला हफ्ता 16 वर्षों का सबसे गीला रिकार्ड हुआ है। इस खबर के साथ देश की राजधानी में सबसे गीले हफ्ते के दौरान शाहीनबाग की हालत दिखाने वाली फोटो भी है। आम तौर पर जब पानी भरी सड़कों और इस कारण ट्रैफिक जाम की फोटो है या बारिश की चर्चा ही नहीं है तब सबसे अधिक बारिश की खबर और शाहीनबाग की फोटो अलग किस्म की पत्रकारिता है और मेरे 10 अखबारों में सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया में है। इस लिहाज से हिन्दुस्तान टाइम्स में पानी से भरी सड़क की चार कॉलम की फोटो, उसमें कार, स्कूल बस, खेलते बच्चे, धक्का लगाते मोटर साइकिल सवार आदि हैं। लीड का शीर्षक है, जानी-पहचानी उपेक्षा के तहत आसमान खुला, एनसीआर डूबा। इसके साथ सबसे ज्यादा बारिश वाले मोहल्लों की सूची है और बताया गया है कि कहां कितनी बारिश हुई। मुख्य खबर के साथ छपी एक खबर के अनुसार, बारिश के कारण कई घर, दीवार और पेड़ गिर गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस और दि एशियन एज की लीड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात की खबर है। आप जानते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव करीब है और समझा जा रहा है कि यह मुलाकात चुनावी गठजोड़ के संबंध में हुई हो सकती है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अकाली नेता ने कहा भी है कि लोग पुराने गठजोड़ को फिर से नया करने के लिए आवाज उठा रहे हैं। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, जाम में बंधक बनी दिल्ली। उपशीर्षक है, लगातार बरसात से जगह-जगह जलभराव, आईटीओ पर घंटों फंसे रहे लोग। इसके साथ लंबे ट्रैफिक जाम की फोटो है जिसमें सैकड़ों गाड़ियां खड़ी हैं। द हिन्दू की लीड सबसे अलग है। खबर है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। एक संयुक्त बयान के अनुसार, इसका मकसद सुरक्षा को मज़बूत करना और ‘क्षेत्र में शांति व स्थिरता’ को बढ़ावा देना है। इन देशों ने किसी भी सदस्य के ख़िलाफ़ आक्रामकता का मिलकर जवाब देने का वादा करते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, “नीट पेपर लीक : मामले में तीन विशेषज्ञ मास्टर माइंड, कई महीने पहले रची साजिश”। इस खबर से यह दिखाने-बताने की कोशिश की गई है कि नीट पेपर लीक मामले में सरकार कार्रवाई कर रही है और अच्छी शिक्षा-परीक्षा के लिए कॉक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन के कारण हो या वैसे ही, कार्रवाई चल रही है।
सच्चाई यह है कि खबर सरकारी है और सरकारी कार्रवाई को सामान्य बताने के लिए ही इसे इतनी प्रमुखता दी गई है। अगर खबर में कुछ दम होता तो सभी अखबारों में लीड बन सकती थी। सच्चाई यह है कि सिर्फ द हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर चार कॉलम में छपी है। दैनिक भास्कर में लीड नीट परीक्षा और पेपर लीक से संबंधित खबर ही है लेकिन इसका दूसरा पहलू है। शीर्षक है – नीट-सीबीएसई जैसे नतीजों में इस बार रिकार्ड देरी, सत्र आगे खिसके। अमर उजाला और द हिन्दू की खबर से अगर यह लग रहा है या लग सकता है कि सब सामान्य है तो इस खबर से बच्चों की परेशानी का अंदाजा लगता है। नीट पेपर लीक के लिए भले ही मास्टर माइंड को पकड़ लेने का दावा किया जा रहा है लेकिन जरूरी नहीं है कि इन्हें सजा हो ही जाए या यही मास्टर माइंड हों। पुराने कई ऐसे मामले मिल जाएंगे जब सीबीआई या जांच एजेंसी ने तो प्रमुख अपराधी या मास्टर माइंड को पहचाना लिया था लेकिन अपराध में उनका शामिल होना सबित नहीं हुआ। इस सरकार में भी विपक्ष के नेताओं के साथ ऐसा किया और मुख्यमंत्रियों को भी जेल में रखा जा चुका है लेकिन सरकारी पार्टी को स्वतंत्रता रही है। इसलिए यह मामला भी महत्वपूर्ण है कि मोदी-शाह की जोड़ी को मुश्किल में डालने वाला काम करके पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी नौकरी गवां चुके हैं। इसके बावजूद उपराष्ट्रपति ने संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से गृह मंत्री की उपस्थिति के बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ कहा। अपने आप में यह बड़ी खबर थी लेकिन कल के अखबारों में ऐसा नहीं था। दूसरी ओर, गृहमंत्री ने उसे नहीं माना और उनका फिर भी राज्यसभा में नहीं पहुंचना बताता है कि मामला फंस गया हो सकता नहीं है। इसलिए भी यह महत्वपूर्ण खबर थी। पर आज यह सिर्फ द टेलीग्राफ में लीड है।
जहां तक पेपर लीक के मास्टर माइंड ठहराए तीन विषय विशेषज्ञों का सवाल है, मुझे नहीं लगता है कि प्रश्नपत्र बनाने वाला प्रश्न लीक करेगा या लीक करके पैसे कमाना होगा तो पकड़ा जाएगा, हाथ के लिखे पर्चे देगा और वह बरामद हो जाएगा। अगर ऐसा है तो उन्हें प्रश्नपत्र बनाने का काम क्यों, कैसे, किसके कहने पर मिला और पहली बार मिला था या पहले भी मिला है। अगर पेपर लीक में आएएसएस या उससे जुड़े लोग शामिल होंगे तो उसकी जांच कैसे होगी और जैसे होगी उसमें सच्चाई सामने आएगी, इसपर भी संदेह है। इसके लिए जिन खबरों की जांच गोदी मीडिया कर सकता है वह सब नहीं है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है। अभी मजबूत केस नहीं बना तो वर्षों बाद अभियुक्तों का भी बरी हो जाना बहुत सामान्य होगा। क्योंकि मामला आरएसएस-बीजेपी से जुड़ता है। जो नाम आज अखबारों में छपे हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कड़ी राजस्थान के बिवाल परिवार से भाजपा तक जाती है। दिनेश बिवाल के भाजपा से संबंध हैं और खबरों के अनुसार इन्होंने गुरुग्राम के करियर कौंसेलर यश यादव से कथित तौर पर ₹15 लाख में प्रश्नपत्र खरीदा था। लीक करने वाले मास्टरमाइंड को पैसा मिलना साबित नहीं होगा तो लीक पैसे के लिए कराना साबित नहीं होगा फिर किसी पढ़ाने वाले का किसी को कुछ प्रश्न लिखकर देना लीक करना कैसे हो सकता है। बीच की जानकारी नहीं होने से मामला अभी स्पष्ट नहीं है और समय ऐसा है जो शक पैदा करता है कि इस खबर का मकसद कुछ और है। नीट मामले में सीबीआई चार्जशीट के आधार पर अगर खबर लीड बन सकती है तो आज यह भी खबर है कि बोफर्स मामला 40 साल बाद बंद हो गया और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे और नहीं खींच सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के 2005 के फैसले के खिलाफ वकील व भाजपा नेता अजय अग्रवाल ने यह अपील की थी

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


