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टीवी TRP पर क्यों लगा ब्रेक? BARC रेटिंग सिस्टम से विज्ञापन के रिश्ते तक पूरी कहानी

डॉ. धरवेश कठेरिया-

टेलीविजन देखने वाले आम दर्शक के लिए हर सप्ताह की TRP (टेलीविजन रेटिंग पॉइंट) शायद सिर्फ यह जानने का माध्यम रही है कि कौन-सा सीरियल नंबर वन है, कौन-सा चैनल आगे है और किस शो की लोकप्रियता बढ़ रही है। लेकिन टीवी उद्योग के भीतर TRP की कहानी इससे कहीं बड़ी है। इसके पीछे दर्शकों की पसंद को मापने की एक पूरी व्यवस्था काम करती है, जिसका संबंध चैनलों की कार्यक्रम योजना, विज्ञापन की कीमत, मीडिया योजना और करोड़ों रुपये के विज्ञापन बजट से है। इसी व्यवस्था में BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) की भूमिका सामने आती है। यही वजह है कि 2026 में जब टीवी दर्शक मापन और TRP प्रकाशन पर ब्रेक लगा, तो सवाल केवल यह नहीं था कि इस सप्ताह कौन-सा शो शीर्ष पर रहा। असली सवाल यह बन गया कि आखिर वह व्यवस्था क्यों रुकी, जिसके आंकड़ों के आधार पर टेलीविजन उद्योग लंबे समय से अपने फैसले लेता रहा है। आम दर्शक के लिए यह समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि TRP और BARC को अक्सर एक ही चीज समझ लिया जाता है, जबकि दोनों की भूमिकाएं अलग हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक कानूनी पहलू भी जुड़ गया। Landing Page से संबंधित प्रावधान को लेकर अदालत में चुनौती हुई, जिस पर अंतरिम रोक लगी और बाद में वह रोक हटा दी गई। इससे TRP की नई पद्धति को लागू करने का रास्ता साफ हुआ, लेकिन अदालत का आदेश अपने आप BARC को रेटिंग शुरू करने का निर्देश नहीं था। इसलिए इस पूरी कहानी को समझने के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि TRP बंद है। यह समझना भी जरूरी है कि TRP बनती कैसे है, BARC किस तरह दर्शक मापन करता है, इसका विज्ञापन बाजार से क्या संबंध है, नई नीति में क्या बदला है, अदालत की भूमिका क्या रही और अब इसकी वापसी की स्थिति क्या है?

TRP क्या है और BARC कैसे काम करता है?

TRP यानी Television Rating Point, टेलीविजन दर्शकों के देखने के व्यवहार को मापने वाली रेटिंग व्यवस्था का हिस्सा है। आसान भाषा में कहें तो इससे यह समझने की कोशिश की जाती है कि कौन-सा टीवी कार्यक्रम या चैनल कितने लोगों तक पहुंच रहा है और उसे कितना देखा जा रहा है।

इसलिए जब किसी शो की TRP अधिक बताई जाती है, तो सामान्य अर्थ यह होता है कि मापन व्यवस्था में उस कार्यक्रम की दर्शक पहुंच मजबूत दिखाई दी।

लेकिन यहां एक जरूरी फर्क है। ज्यादा TRP का मतलब यह नहीं कि कोई कार्यक्रम पत्रकारिता, मनोरंजन या गुणवत्ता की हर कसौटी पर बेहतर है। TRP मुख्य रूप से दर्शकों के व्यवहार और पहुंच का संकेत देती है। खासकर किसी समाचार चैनल की विश्वसनीयता, तथ्य-जांच या पत्रकारिता की गुणवत्ता का फैसला केवल उसकी TRP से नहीं किया जा सकता। BARC यानी Broadcast Audience Research Council टेलीविजन दर्शक मापन से जुड़ी संस्था है। आम भाषा में TRP और BARC को अक्सर एक ही चीज समझ लिया जाता है, जबकि दोनों अलग हैं। BARC मापन व्यवस्था संचालित करता है और उसके द्वारा जुटाए गए दर्शक आंकड़ों से टेलीविजन रेटिंग तैयार होती हैं।

इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं। किसी प्रयोगशाला में जांच की जाती है और उसके बाद रिपोर्ट तैयार होती है। उसी तरह BARC दर्शक मापन करता है और उससे मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर टेलीविजन रेटिंग सामने आती हैं। इसलिए BARC को TRP कहना सही नहीं है और TRP को BARC की संस्था समझना भी गलत है। अब सवाल उठता है कि करोड़ों घरों में चल रहे टीवी को हर समय कैसे मापा जा सकता है। जवाब है, हर घर को मापा ही नहीं जाता। इसके बजाय देशभर से चुने गए घरों का एक पैनल बनाया जाता है, जिनमें दर्शक मापन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। People Meter जैसी तकनीक देखने के व्यवहार को दर्ज करने में भूमिका निभाती है।

इसका उद्देश्य यह समझना है कि कौन-सी सामग्री कब और कितनी देर देखी जा रही है। इस तरह मिलने वाला आंकड़ा पूरे देश के हर घर की सीधी गिनती नहीं होता, बल्कि एक वैज्ञानिक नमूने के आधार पर व्यापक टेलीविजन बाजार के देखने के व्यवहार का अनुमान तैयार करने में मदद करता है। इसलिए नमूने का सही प्रतिनिधित्व बेहद महत्वपूर्ण है। भारत जैसे विविध देश में अलग-अलग भाषा, राज्य, बाजार और देखने की आदतों को पर्याप्त रूप से शामिल करना जरूरी है। नई TV Ratings Policy 2026 में मापे जाने वाले घरों की संख्या को 50,000 से बढ़ाकर 80,000 करने का प्रावधान है। उपलब्ध सामग्री में BARC के 70,876 घरों तक पहुंचने और 80,000 तक जाने की दिशा में काम का उल्लेख है। यह पैनल संबंधी प्रगति है, इसे अपने आप अंतिम पंजीकरण या रेटिंग की बहाली नहीं माना जा सकता।

TRP की जरूरत और विज्ञापन से इसका रिश्ता

TRP का महत्व केवल टीवी चैनल तक सीमित नहीं है। यह पूरे टेलीविजन विज्ञापन तंत्र से जुड़ी है। प्रसारक के लिए दर्शक पहुंच का आंकड़ा कार्यक्रम योजना और व्यावसायिक निर्णयों में मदद कर सकता है। विज्ञापनदाता के लिए यह समझना जरूरी होता है कि उसका विज्ञापन किस तरह के दर्शकों तक पहुंच सकता है। मीडिया एजेंसियां टेलीविजन योजना, विज्ञापन खरीद और अभियान के मूल्यांकन में दर्शक मापन का इस्तेमाल करती हैं। दर्शक के लिए TRP मुख्यतः यह संकेत देती है कि दूसरे दर्शक क्या देख रहे हैं। चैनल के लिए यह प्रदर्शन का एक संकेत है। विज्ञापनदाता के लिए यह निवेश संबंधी निर्णय का एक आधार है। इसीलिए टेलीविजन उद्योग में रेटिंग को एक साझा मापन मुद्रा की तरह देखा जाता है।

TRP और विज्ञापन के बीच संबंध को एक सरल श्रृंखला से समझा जा सकता है: दर्शक मापन से दर्शक पहुंच का अनुमान मिलता है, उस अनुमान से मीडिया योजना बनती है और मीडिया योजना के आधार पर विज्ञापन संबंधी निर्णय लिए जाते हैं। यदि किसी कार्यक्रम की दर्शक पहुंच मजबूत दिखाई देती है, तो विज्ञापनदाता वहां अपना विज्ञापन देने में अधिक रुचि दिखा सकते हैं। इसके विपरीत, यदि एक स्वतंत्र और साझा टेलीविजन मापन उपलब्ध न हो, तो अभियान के बाद यह समझना कठिन हो सकता है कि टीवी पर लगाया गया पैसा किस दर्शक वर्ग तक पहुंचा। इसी कारण रेटिंग का लंबे समय तक अनुपलब्ध रहना प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों तीनों के लिए योजना और मूल्यांकन की समस्या पैदा कर सकता है।

2026 में TRP पर ब्रेक क्यों लगा?

2026 की कहानी को समझने के लिए दो अलग घटनाओं को अलग रखना जरूरी है। नई TV Ratings Policy 2026 ने टेलीविजन रेटिंग के लिए नियामकीय ढांचे में बदलाव किए। BARC ने इस नई नीति के तहत 29 अप्रैल, 2026 को पंजीकरण के लिए आवेदन किया।

इसके बाद 1 जुलाई, 2026 से BARC को टेलीविजन दर्शक मापन और नई TRP रिपोर्ट प्रकाशित करने से रोक दिया गया, जब तक नई नीति के अनुरूप पंजीकरण और अनुपालन की प्रक्रिया पूरी न हो। इसलिए जुलाई 2026 की रोक का मूल संदर्भ नई नियामकीय व्यवस्था, पंजीकरण और नीति अनुपालन है। इसे किसी एक कार्यक्रम की रेटिंग, सामान्य आंकड़ा विवाद या किसी चैनल के प्रदर्शन से जोड़ना सही नहीं होगा।

मार्च 2026 में समाचार चैनलों की रेटिंग रिपोर्टिंग पर अलग रोक लगाई गई थी। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार 6 मार्च, 2026 को BARC को न्यूज चैनलों की TRP चार सप्ताह के लिए रोकने का निर्देश दिया गया था। इसकी पृष्ठभूमि Israel-Iran conflict की कवरेज के दौरान कथित अटकलबाजी और सनसनीखेज टेलीविजन प्रस्तुति को लेकर उठी चिंताओं से जुड़ी थी। इसके तुरंत बाद 27 मार्च, 2026 को नई TV Ratings Policy 2026 अधिसूचित हुई, जिसने 2014 की पुरानी नीति की जगह ली। जुलाई 2026 की व्यापक रोक इससे अलग थी। उसका संबंध BARC के नई नीति के तहत पंजीकरण और अनुपालन से था, न कि किसी विशेष कवरेज विवाद से। इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही कारण से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

नई TV Ratings Policy में क्या बदला और Landing Page क्यों महत्वपूर्ण है?

नई नीति का उद्देश्य केवल रेटिंग को फिर शुरू करना नहीं, बल्कि मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करना भी है। नीति में मापे जाने वाले घरों की संख्या 50,000 से बढ़ाकर 80,000 करने, तकनीक-निरपेक्ष मापन को बढ़ावा देने, Connected TV और OTT पर उपलब्ध टीवी चैनलों को मापन के दायरे में लाने, स्थापना सर्वेक्षण, Landing Page से मिलने वाली दर्शक संख्या को रेटिंग गणना से बाहर करने, स्वतंत्र लेखा-परीक्षण और अनुपालन न होने पर क्रमिक दंड जैसे प्रावधान हैं। रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 33 प्रतिशत स्वतंत्र निदेशक रखने की शर्त भी है। इसके साथ हितों के टकराव, साझा हिस्सेदारी, सुरक्षा मंजूरी, पारदर्शिता और लेखा-परीक्षण से जुड़े सुरक्षा उपाय रखे गए हैं। इनका उद्देश्य दर्शक मापन की कार्यात्मक और व्यावसायिक स्वतंत्रता को मजबूत करना है।

अब समझते हैं Landing Page क्या है?

कई टीवी या set-top box चालू करते ही कोई चैनल अपने आप स्क्रीन पर खुल जाता है। इसे Landing Page कहा जाता है। नई नीति में Landing Page से मिलने वाली दर्शक संख्या को आधिकारिक रेटिंग की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य अपने आप खुलने वाले चैनल और दर्शक द्वारा जानबूझकर चुने गए चैनल के बीच अंतर करना है, ताकि रेटिंग दर्शक की वास्तविक पसंद को अधिक सटीक रूप से दिखा सके। इस बदलाव का असर सभी चैनलों पर समान होना जरूरी नहीं है। उद्योग विश्लेषण के अनुसार उन चैनलों पर प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है जिन्हें Landing Page पर मिलने वाली स्वचालित दृश्यता से अतिरिक्त लाभ मिलता रहा हो। दूसरी ओर, जिन कार्यक्रमों के लिए दर्शक जानबूझकर चैनल चुनकर बैठते हैं, उनकी रेटिंग पर यह बदलाव अपेक्षाकृत कम असर डाल सकता है। यह एक संभावित प्रभाव है, अंतिम परिणाम नई रेटिंग आने के बाद ही स्पष्ट होगा। दूसरा बड़ा बदलाव Connected TV यानी इंटरनेट से जुड़े Smart TV और अन्य जुड़े उपकरणों की देखने की गतिविधि से जुड़ा है। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार BARC ऐसे घरों को अपने पैनल में शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है।

BARC और Comscore Linear TV, OTT और Digital Platforms की संयुक्त Cross-Media Measurement के लिए Proof of Concept पर भी काम कर रहे हैं। यह अभी विकास और परीक्षण की दिशा में है, इसलिए इसे पूरी तरह लागू व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

केरल हाईकोर्ट, TRP की वापसी और पहली नई रेटिंग

फिलहाल TRP की वापसी की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। 24 जुलाई, 2026 को केरल हाईकोर्ट द्वारा Landing Page प्रावधान पर लगी अंतरिम रोक हटाए जाने से नई पद्धति को लागू करने की कानूनी बाधा जरूर कम हुई है, लेकिन इससे अपने आप BARC को रेटिंग शुरू करने की अनुमति नहीं मिल जाती। पंजीकरण, अनुपालन और नई व्यवस्था के तहत आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होना भी जरूरी है। उद्योग जगत में साप्ताहिक रेटिंग जल्द लौटने की संभावना को लेकर रिपोर्टें जरूर सामने आई हैं, लेकिन 11 अगस्त, 2026 तक BARC या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से TRP दोबारा जारी करने की कोई निश्चित तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए अभी यह कहना उचित होगा कि TRP की वापसी का रास्ता पहले की तुलना में साफ हुआ है, लेकिन वापसी की तारीख अभी अनिश्चित है।

यदि BARC नई पद्धति के तहत साप्ताहिक रेटिंग जारी करता है, तो शुरुआती आंकड़ों पर प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों की विशेष नजर रहेगी। Landing Page से मिलने वाली दर्शक संख्या को हटाने के बाद पहली बार चैनलों की साप्ताहिक स्थिति नए मापदंड के तहत सामने आएगी। शुरुआती सप्ताहों में कुछ चैनलों की स्थिति में बदलाव संभव है, लेकिन पहली ही रेटिंग के आधार पर स्थायी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उद्योग को यह देखना होगा कि नई व्यवस्था के तहत दर्शक मापन कितना स्थिर रहता है और क्या सामने आने वाले आंकड़े वास्तव में दर्शकों की सक्रिय पसंद को पहले की तुलना में बेहतर ढंग से दिखाते हैं? यही नई व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होगी।

TRP रुकने का असर और इसकी सीमाएं

TRP के आंकड़े उपलब्ध न होने का असर सबसे पहले प्रसारकों के कार्यक्रम प्रदर्शन और व्यावसायिक योजना पर पड़ा है। साप्ताहिक दर्शक आंकड़े न होने से कार्यक्रमों की रैंकिंग, विज्ञापन दरों और विज्ञापन समय के मूल्यांकन में एक महत्वपूर्ण संदर्भ गायब हो जाता है। विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के लिए भी टेलीविजन की मीडिया योजना तथा विज्ञापन अभियान के मूल्यांकन में कठिनाई हो रही है।

इसका अर्थ यह नहीं कि टेलीविजन विज्ञापन पूरी तरह बंद हो गए हैं। दूसरे आंकड़े मौजूद रहते हैं, लेकिन एक स्वतंत्र और साझा मापन के अभाव में सभी पक्षों के बीच साझा मापदंड कमजोर हो जाते हैं।

यह भी समझना जरूरी है कि ज्यादा TRP का मतलब अच्छी पत्रकारिता नहीं है। TRP यह बताती है कि दर्शक क्या देख रहे हैं, लेकिन यह अपने आप यह नहीं बताती कि वह सामग्री कितनी सटीक, निष्पक्ष या जिम्मेदार है। किसी चैनल को बहुत अधिक दर्शक मिल सकते हैं, फिर भी उसकी किसी खबर की तथ्यात्मक शुद्धता या प्रस्तुति पर सवाल उठ सकते हैं। इसी तरह कोई गंभीर कार्यक्रम कम रेटिंग के बावजूद उच्च गुणवत्ता का हो सकता है। इसलिए पत्रकारिता का मूल्यांकन तथ्यात्मक शुद्धता, विश्वसनीय स्रोत, पुष्टि की प्रक्रिया, निष्पक्षता, पर्याप्त संदर्भ, गलती होने पर सुधार और जनहित जैसे मानकों से भी होना चाहिए। TRP दर्शकों के व्यवहार का मापन है, पत्रकारिता की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र नहीं।

डिजिटल दौर में लगभग हर मंच अपने दर्शकों का आंकड़ा रखता है। फिर टेलीविजन को एक स्वतंत्र दर्शक मापन व्यवस्था की जरूरत क्यों है? इसका एक बड़ा कारण यह है कि विज्ञापन तंत्र को एक ऐसे साझा मापदंड की जरूरत होती है जिसे प्रसारक, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसी सभी संदर्भ के रूप में इस्तेमाल कर सकें। किसी एक मंच का अपना आंकड़ा बहुत विस्तृत हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मापन की भूमिका अलग होती है। इसी वजह से TRP का रुकना केवल साप्ताहिक रैंकिंग का रुकना नहीं है। यह टेलीविजन उद्योग की उस साझा मापन व्यवस्था का रुकना है, जिस पर व्यावसायिक योजना और दर्शक विश्लेषण का एक बड़ा हिस्सा निर्भर करता है। नई नीति में पैनल का विस्तार, Landing Page को अलग करना, Connected TV मापन, स्वतंत्र प्रशासन और लेखा-परीक्षण जैसे बदलाव इसी भरोसे को मजबूत करने की कोशिश हैं।

TRP की पूरी कहानी को केवल इस सवाल तक सीमित नहीं किया जा सकता कि कौन-सा शो नंबर वन है। इसके पीछे दर्शकों की देखने की आदत, चैनलों की कार्यक्रम रणनीति, विज्ञापनदाताओं का निवेश और पूरे टेलीविजन तंत्र की व्यावसायिक योजना जुड़ी हुई है। इसलिए जब TRP का आंकड़ा रुकता है, तो केवल एक रैंकिंग गायब नहीं होती, बल्कि एक साझा मापन भाषा भी अस्थायी रूप से कमजोर पड़ती है। 2026 की घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि किसी रेटिंग व्यवस्था की असली ताकत केवल उसके आंकड़ों में नहीं, बल्कि इस बात में होती है कि उन आंकड़ों पर कितना भरोसा किया जा सकता है और उन्हें किस नियामकीय तथा कानूनी प्रक्रिया से गुजरकर हासिल किया गया है। फिलहाल TRP की वापसी का रास्ता पहले की तुलना में अधिक साफ दिखाई देता है, लेकिन संभावित वापसी को निश्चित तारीख मानना जल्दबाजी होगी।

आगे पंजीकरण, अनुपालन और नई पद्धति के तहत आने वाली पहली रेटिंग यह बताएगी कि बदलाव वास्तव में कितना प्रभावी रहा। अंततः सवाल यह है कि जब टेलीविजन रेटिंग दोबारा नियमित रूप से सामने आएंगी, तो क्या वे दर्शकों की वास्तविक देखने की आदतों की अधिक पारदर्शी, प्रतिनिधिक और विश्वसनीय तस्वीर पेश करेंगी? टीवी की दुनिया में नंबर जरूरी हैं, लेकिन उन नंबरों पर भरोसा उससे भी ज्यादा जरूरी है।

संप्रति:
लेखक : डॉ. धरवेश कठेरिया
एसोसिएट प्रोफेसर, जनसंचार विभाग
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
Email: [email protected]

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