नौशाद अली-
सहकारिता मंत्रालय और केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) द्वारा जारी पीआईबी बयान में रिफंड पोर्टल की बहाली और 9,267 करोड़ रुपये के आंशिक भुगतान का दावा किया जा रहा है। लेकिन विश्व भारती जनसेवा संस्थान ने इस पूरे प्रकरण को सिर्फ पोर्टल और आंशिक भुगतान तक सीमित न रखते हुए ठोस जवाबदेही का मुद्दा बनाया है। संस्थान का कहना है कि यह मामला अब केवल सहारा समूह से भुगतान का नहीं, बल्कि देश के लगभग 10 करोड़ जमाकर्ताओं की पूरी देनदारी और उनके अधिकारों का प्रश्न बन चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
संस्थान ने गंभीर आरोप लगाया है कि सहारा समूह ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए बहुत सारी जमीनों और संपत्तियों को बेच दिया है। संस्थान के पास इन बिक्री सौदों के पुख्ता प्रमाण उपलब्ध हैं। न्यायालय ने सहारा समूह की संपत्तियों को जमाकर्ताओं के हित में संरक्षित रखने और वसूली की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर संपत्तियों का निपटान होना गंभीर उल्लंघन है।
संस्थान का कहना है कि इन प्रमाणों के बावजूद सरकार और सरकारी संस्थान सीआरसीएस द्वारा इस मामले को अनदेखा किया जा रहा है। न तो इन बिक्री सौदों की स्वतंत्र जांच का कोई ठोस कदम दिख रहा है, और न ही वसूली की प्रभावी कार्रवाई का कोई स्पष्ट खाका सामने आया है।
आंकड़ों से साफ है अंतर
आरटीआई और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रिफंड पोर्टल पर लगभग 1 करोड़ 42 लाख आवेदक हैं, जिनके क्लेम की राशि करीब 90 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ईडी कोलकाता की जांच में सहारा समूह पर लगभग 1.70 से 1.74 लाख करोड़ रुपये की देनदारी सामने आई है। अब तक भुगतान की गई राशि महज 9,267 करोड़ रुपये है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक केवल लगभग 30 प्रतिशत जमाकर्ताओं ने ही पोर्टल पर आवेदन किया है। शेष 70 प्रतिशत जमाकर्ता या तो जानकारी के अभाव में, या तकनीकी-दस्तावेजी बाधाओं, आयु, शिक्षा और दूरदराज क्षेत्रों में रहने के कारण आवेदन नहीं कर पाए। सवाल यह है कि क्या इन 70 प्रतिशत लोगों को अब भुगतान से वंचित रखा जाएगा?
10 करोड़ जमाकर्ताओं का मामला
संस्थान ने स्पष्ट किया कि यह प्रकरण सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं है जिन्होंने पोर्टल पर आवेदन किया। सहारा समूह से जुड़े विभिन्न योजनाओं, एमआईएस खातों, पुराने रिकॉर्ड और सदस्यता अभिलेखों में देश के करीब 10 करोड़ जमाकर्ताओं का पैसा फंसा हुआ बताया जाता है। केवल पोर्टल पर आवेदन करने वालों को आंशिक राशि देकर बाकी करोड़ों लोगों की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना न्यायसंगत नहीं हो सकता।
मृत जमाकर्ताओं, उनके नामित व्यक्तियों और कानूनी उत्तराधिकारियों के दावों की स्पष्ट, सरल और तेज व्यवस्था अभी भी नहीं बनाई गई है। कई परिवार तकनीकी जटिलताओं के कारण अपनी वैध राशि से वंचित हो रहे हैं।
सहारा समूह और सरकार दोनों की जिम्मेदारी
संस्थान का मूल प्रश्न है,जिस सहारा समूह ने जमाकर्ताओं से पैसा लिया, उसकी जिम्मेदारी कहां गई? और सरकार तथा सीआरसीएस अपनी निगरानी और जवाबदेही से कैसे बच सकते हैं? सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर संपत्तियां बेचीं- इसके पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।
सरकार और सीआरसीएस इस उल्लंघन को अनदेखा कर रहे हैं।
2. उपलब्ध निधि और वसूली की राशि कुल देनदारी के मुकाबले बहुत कम है।
3. 70 प्रतिशत जमाकर्ता अभी भी अंधेरे में हैं।
4. मृत जमाकर्ताओं और उत्तराधिकारियों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए भी, सरकार और सीआरसीएस को यह स्पष्ट करना होगा कि:
- सहारा समूह द्वारा बेची गई संपत्तियों की पूरी जांच और वसूली कब और कैसे होगी?
- 10 करोड़ जमाकर्ताओं की कुल देनदारी कितनी है और उसका भुगतान कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?
- 70 प्रतिशत उन जमाकर्ताओं का क्या होगा जिन्होंने अभी आवेदन नहीं किया?
- मृत जमाकर्ताओं और उत्तराधिकारियों के दावों का निपटान कब तक होगा?
- पूरी देनदारी की समयबद्ध और पारदर्शी कार्ययोजना कब सार्वजनिक की जाएगी?
संस्थान ने कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों आम जमाकर्ताओं के जीवन भर की मेहनत की कमाई और सरकार की जवाबदेही का सवाल है। केवल पोर्टल बहाली और आंशिक भुगतान के दावों से काम नहीं चलेगा। सरकार, सीआरसीएस और सहारा समूह इन ठोस सवालों से भाग नहीं सकते। जमाकर्ताओं को पूरी और सुरक्षित वापसी का अधिकार है।


Md rashid Ansari
September 27, 2026 at 8:56 pm
Kab tak calem kar sakte hai
Anil Awasthi
September 28, 2026 at 5:18 am
जिन लोगों ने क्लेम किया है उनको भी जबरदस्ती लटकाए हुए रखा है उनकी क्लेम आवेदन में खामियां बताई जा रही है जबकि खामियां कुछ है भी नहीं तो भी अगर 100 लोगों ने क्लेम किया है तो सिर्फ दो लोगों को पैसा मिला है बाकी आवेदकों में खामियां गिनाई जा रही है जबकि उसमें कुछ खामियां हैं ही नहीं