नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच शनिवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की अहम बैठक हुई। बैठक के बाद चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर प्रेस रिलीज जारी कर फैसलों की जानकारी दी। आयोग ने तीनों चुनाव आयुक्तों की एक साझा तस्वीर भी पोस्ट की।
इस तस्वीर में टेबल पर रखी पानी की छोटी-छोटी बोतलों ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। तस्वीर में दिखाई दे रही बोतलें Aava ब्रांड की हैं। इन बोतलों की कीमत सामान्य पैकेज्ड वाटर की तुलना में काफी ज्यादा है।
250 एमएल की बोतल, करीब 125 रुपये कीमत
तस्वीर में दिखाई दे रही Aava की बोतल 250 एमएल की है। Aava की वेबसाइट पर 250 एमएल की कांच की बोतलों का आठ बोतलों वाला पैक 999 रुपये में सूचीबद्ध है। इस हिसाब से एक बोतल की कीमत करीब 125 रुपये बैठती है और प्रति लीटर कीमत लगभग 500 रुपये पड़ती है।
तुलना करें तो आम तौर पर बाजार में मिलने वाली सामान्य पैकेज्ड वाटर की छोटी बोतलों की कीमत इससे काफी कम होती है। यही वजह है कि चुनाव आयोग की बैठक की तस्वीर सामने आने के बाद पानी की इन बोतलों की कीमत भी चर्चा का विषय बन गई।
गुजरात की कंपनी है Aava
Aava Natural Mineral Water गुजरात की कंपनी है। कंपनी की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। इसके संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर बेहराम मेहता का नाम सामने आता है। कंपनी खुद को प्राकृतिक मिनरल वाटर उपलब्ध कराने वाले ब्रांड के रूप में पेश करती है।
कंपनी के मुताबिक उसके पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, मिनरल्स, बाइकार्बोनेट्स और पोटेशियम जैसे तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं। Aava का दावा है कि उसका पानी अरावली रेंज के प्राकृतिक स्रोत से आता है।
अरावली की तरंगा पहाड़ियों से पानी लेने का दावा
कंपनी के अनुसार अरावली रेंज की तरंगा पहाड़ियों में हाइड्रोजियोलॉजिस्ट्स ने प्राकृतिक पानी के स्रोत की पहचान की थी। इसके बाद 2005 में Aava Natural Mineral Water को लॉन्च किया गया।
कंपनी खुद को पश्चिमी भारत का पहला बोतलबंद प्राकृतिक मिनरल वाटर ब्रांड भी बताती है। कंपनी का दावा है कि उसके पानी में मौजूद मिनरल्स प्राकृतिक स्रोत से मिलते हैं और इसी वजह से इसे सामान्य पैकेज्ड वाटर से अलग श्रेणी में रखा जाता है।

छह चरणों में फिल्ट्रेशन का दावा
Aava की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, स्रोत से मिलने के बाद पानी को कई चरणों में फिल्टर किया जाता है। कंपनी के अनुसार प्रेशर सैंड फिल्ट्रेशन के जरिए पानी से मैलापन हटाया जाता है। इसके बाद माइक्रोन कार्ट्रिज यूनिट्स के जरिए निलंबित ठोस पदार्थों को हटाया जाता है।
कंपनी का दावा है कि पूरी फिल्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने पर ध्यान दिया जाता है और यदि कोई सूक्ष्मजीव मौजूद हों तो उन्हें हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
SIR विवाद के बीच सामने आई तस्वीर
तीनों चुनाव आयुक्तों की यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरें चर्चा में हैं। बैठक के बाद आयोग ने अपने बयान में SIR से जुड़े फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति की बात कही।
हालांकि, बैठक की आधिकारिक तस्वीर में नजर आई Aava की बोतलों ने सोशल मीडिया पर एक अलग चर्चा शुरू कर दी। चर्चा का केंद्र बोतलों का ब्रांड और उनकी कीमत रही।
यह खबर चौंकाने वाली मगर सच है कि भारत जैसे गरीब देश में चुनाव आयोग के अधिकारी 600 रुपए प्रति लीटर का पानी पी रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई आज की तस्वीर में इस सच का खुलासा हुआ है।
आयोग द्वारा जारी की गई तस्वीर में आवा ब्रांड की बोतल नजर आ रही है। यह पानी 600 रूपये प्रति लीटर है। पत्रकार साथी प्रकाश के रे बताते हैं कि आवा नेचुरल मिनरल वाटर अरावली की पहाड़ियों से निकलने वाला प्राकृतिक अल्कलाइन मिनरल वाटर बताया जाता है, जो बिना RO या केमिकल ट्रीटमेंट के सीधे सोर्स से बॉटल किया जाता है।
इस ब्रांड की शुरुआत 2005 में बेहराम मेहता द्वारा की गई थी और इसे शीलपे एंटरप्राइज कंपनी बनाती है। अडानी भी यही पानी पीता है।
-आवेश तिवारी, पत्रकार
प्रकाश के रे-
चुनाव आयुक्तों की बैठक की तस्वीर में मेरा ध्यान पानी की बोतल पर गया. आवा ब्रांड का पानी है. आमेज़न पर इसका मूल्य 600 रुपये प्रति लीटर है, पर अभी 17% की छूट है. अब एक लीटर का दाम 499.50 रुपये है.
यह एक गुजरात स्थित कंपनी का प्रॉडक्ट है. इसे प्राकृतिक रूप से मिनरल वाटर बताया जाता है. इसमें कैल्शियम, मैग्नेशियम, बाइकॉर्बोनेट्स, सिलिका होता है.
इसे अरावली रेंज का पानी बताया गया है. एक और ख़ासियत है कि इसे शीशे के बोतल में बेचा जाता है.
केंद्रीय जल आयोग की 2019 की रिपोर्ट पर भारत सरकार की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, “2021 और 2031 के लिए औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता क्रमशः 1486 घन मीटर और 1367 घन मीटर आंकी गई है. 1700 घन मीटर से कम वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता को जल संकट की स्थिति माना जाता है और 1000 घनमीटर से कम वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता को जल कमी की स्थिति माना जाता है.”


