पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिए प्रचार पर भी बड़ी रकम खर्च की। चुनाव आयोग को पार्टी की ओर से दिए गए खर्च के दस्तावेजों के आधार पर The Telegraph Online ने यह जानकारी सामने रखी है। इन्फ्लुएंसर्स के जरिए भाजपा के समर्थन में रील, वीडियो, चुनावी गीत और राजनीतिक विश्लेषण जैसी सामग्री तैयार कराई गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भुगतान पाने वाले इन्फ्लुएंसर्स में बंगाली अभिनेता और सोशल मीडिया क्रिएटर सायक चक्रवर्ती का नाम शामिल है। रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया। एक अन्य नाम शमिक अधिकारी का है, जो सोशल मीडिया पर Nonsane के नाम से जाने जाते हैं। उन्हें 13 लाख रुपये दिए गए।
अधिकारी ने जनवरी में आरजी कर मामले की पृष्ठभूमि में ‘बटन’ नाम से एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए मतदाताओं से सोच-समझकर वोट देने की अपील की थी। वीडियो को भाजपा नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया था।
The Telegraph Online के मुताबिक, भुगतान पाने वाले अन्य इन्फ्लुएंसर्स के नाम भी चुनाव आयोग को दिए गए खर्च के रिकॉर्ड में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की ओर से एक राजनीतिक कंसल्टेंसी कंपनी ने कुछ इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया था। भुगतान की रकम उनके सोशल मीडिया प्रभाव और पहुंच के आधार पर तय की गई थी। कुछ इन्फ्लुएंसर्स को अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से मुद्दों पर कंटेंट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।
मुर्शिदाबाद में सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर और कोलकाता में आरजी कर मामले पर ध्यान देने को कहा गया था। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार इस तरह के राजनीतिक कंटेंट में भुगतान किए जाने का स्पष्ट खुलासा किए जाने को लेकर नियमों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
सामाजिक और अधिकार कार्यकर्ताओं ने ऐसे कंटेंट में भुगतान की जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी इन्फ्लुएंसर को राजनीतिक प्रचार के लिए भुगतान किया गया है तो दर्शकों को इसकी जानकारी होनी चाहिए। एक संचार विशेषज्ञ के मुताबिक, किसी राजनीतिक दल के पक्ष में प्रभाव डालने के लिए सीधे वोट मांगना जरूरी नहीं है; विपक्षी दल पर हमले के जरिए भी राजनीतिक संदेश दिया जा सकता है।
वहीं, सूची में शामिल कोलकाता के एक इन्फ्लुएंसर ने भुगतान के बावजूद इसे जनता की राय सामने रखने का काम बताया। उनका कहना था कि ‘बटन’ वीडियो में भाजपा के पक्ष में सीधे वोट देने की अपील नहीं की गई थी।
भाजपा के बंगाल मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान किए जाने की पुष्टि करते हुए इसका बचाव किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपने फंड से भुगतान किया और हर खर्च का हिसाब दर्ज है। उनका कहना था कि प्रचार के उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल नियमों और जरूरी औपचारिकताओं का पालन करते हुए किया गया।
चुनाव आयोग को सौंपे गए खर्च के मुताबिक भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें 217.16 करोड़ रुपये सामान्य चुनाव प्रचार और 69.83 करोड़ रुपये उम्मीदवारों से संबंधित खर्च में गए। पांच चुनावों—पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—में भाजपा का कुल खर्च 529.38 करोड़ रुपये रहा, जिसमें पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी करीब 54 प्रतिशत थी।
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का इस्तेमाल चुनावी प्रचार में नया नहीं है। फरवरी 2026 में The Telegraph Online ने रिपोर्ट किया था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले कई सोशल मीडिया क्रिएटर्स को राजनीतिक अभियानों के लिए भुगतान की पेशकश की जा रही थी। उस समय कुछ क्रिएटर्स ने प्रति रील 20 हजार से लेकर 80 हजार रुपये तक के प्रस्ताव मिलने की बात कही थी, हालांकि भाजपा ने किसी बाहरी एजेंसी के जरिए इन्फ्लुएंसर तलाशने से इनकार किया था।

Take a closer look at the List –
- Shamik Adhikary – 13 Lakhs (15 March – 06 May)
- Suddhashil Ghosh – 51 Lakhs
- The News Bangla – 22 Lakhs
-अयंतिका चटोपध्याय




