बीबीसी के महानिदेशक मैट ब्रिटिन ने संकेत दिया है कि संस्थान की आर्थिक स्थिति और दर्शकों के कंटेंट देखने-सुनने के बदलते तरीकों को देखते हुए कुछ टीवी चैनल और रेडियो स्टेशन बंद किए जा सकते हैं। इन सेवाओं से बचने वाले संसाधनों को ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकता है।
बीबीसी करीब 500 मिलियन पाउंड की बचत करने की योजना पर काम कर रहा है। बीबीसी वन के कार्यक्रम ‘संडे विद लॉरा कुइन्सबर्ग’ में मैट ब्रिटिन ने कहा कि किसी कार्यक्रम या चैनल के हमेशा जारी रहने की गारंटी नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि संस्थान के सामने आर्थिक चुनौतियां काफी गंभीर हैं और इसी वजह से कुछ फैसलों पर अपेक्षा से पहले विचार करना पड़ रहा है।
ब्रिटिन ने कहा कि दर्शकों की आदतें भी तेजी से बदल रही हैं। अगर बड़ी संख्या में लोग कंटेंट को टीवी या रेडियो के पारंपरिक प्रसारण के बजाय ऑन-डिमांड देख और सुन रहे हैं, तो बीबीसी को अपनी अलग-अलग सेवाओं की लागत और उनके इस्तेमाल पर दोबारा विचार करना होगा।
उन्होंने कहा कि बीबीसी का लक्ष्य बचत करते समय दर्शकों पर पड़ने वाले असर को कम करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी कार्यक्रम को जहां टीवी पर करीब एक लाख लोग देख रहे हों, वहीं उसी कार्यक्रम को आईप्लेयर पर पांच लाख लोग देख रहे हों तो ऐसे में यह सवाल उठता है कि उस सेवा को पूरी तरह ऑन-डिमांड करने का सही समय क्या है।
ब्रिटिन ने कहा कि लाइसेंस फीस देने वाले लोगों के पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, दर्शक कंटेंट तक पहुंचने के तरीके में काफी आगे बढ़ चुके हैं, जबकि बीबीसी अभी भी काफी हद तक पुराने प्रसारण मॉडल से जुड़ा हुआ है।
बीबीसी पिछले कुछ महीनों में कई कार्यक्रमों और नौकरियों में कटौती की घोषणा कर चुका है। ‘ब्लैंकेटी ब्लैंक’, ‘सेलिब्रिटी मास्टरमाइंड’, ‘लाइव एट द अपोलो’ और ‘फुटबॉल फोकस’ जैसे कार्यक्रम भी बंद किए जाने वाले कार्यक्रमों में शामिल हैं। आने वाले समय में संस्थान में और कटौती की संभावना जताई जा रही है।
मैट ब्रिटिन ने मई में बीबीसी के महानिदेशक का पद संभाला था। इससे पहले वह करीब एक दशक तक गूगल के यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अध्यक्ष रहे थे।
ब्रिटिन ने बीबीसी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को लेकर भी बात की। यह पूछे जाने पर कि क्या वह AI से किसी कार्यक्रम को तैयार और प्रस्तुत करने की अनुमति देंगे, उन्होंने कहा कि तय नियमों और सीमाओं के तहत ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीबीसी AI के साथ प्रयोग कर यह समझना चाहता है कि यह तकनीक क्या कर सकती है और इसकी सीमाएं क्या हैं।
हालांकि, ब्रिटिन ने कहा कि बीबीसी के काम को पूरी तरह AI से बदला नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, AI लाइसेंस फीस से मिलने वाले पैसे के बेहतर इस्तेमाल, फैसले लेने और रचनात्मक काम में मदद कर सकता है, लेकिन इसे इंसानों के विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।




