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उत्तर प्रदेश

कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल पर महिला जज ने फोन पर सीधे-सीधे धमकाने का आरोप लगाया!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर IAS ऑफिसर के व्यवहार को क्रिमिनल कंटेम्प्ट के लिए भेजा, देखें पूरा आदेश

Smiling woman with curly black hair, wearing a pink and beige sari with a bindi, against a white background.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव का मामला सामने आया है। देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल पर गोंडा की सीनियर सिविल जज शबीना खान ने एक लंबित मुकदमे को लेकर फोन पर कथित तौर पर अनुचित दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

जिला जज को भेजी गई शिकायत में जज ने आरोप लगाया कि कमिश्नर ने अपने पद का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए उन्हें एक मामले में प्रभावित करने की कोशिश की। शिकायत के मुताबिक, फोन पर हाईकोर्ट में शिकायत करने की बात कही गई और जज के संस्कारों पर भी सवाल उठाए गए। जज ने इस बातचीत से आहत होने की बात कही है।

शिकायत में जज ने कमिश्नर की ओर से आई कॉल का पूरा विवरण भी दिया है। साथ ही अनुरोध किया कि जिस मुकदमे को लेकर कथित दबाव बनाया गया, उसे किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए, ताकि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हो सके।

जज के अनुरोध के बाद संबंधित मुकदमा गोंडा सीनियर डिवीजन के सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) नवीन की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया है। इस मामले में आज सुनवाई होनी है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में न्यायपालिका और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कथित हस्तक्षेप और दबाव को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। इससे पहले नोएडा के सीजेएम की ओर से भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसी तरह की शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी।

हालांकि, कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो वह भी मामले की तस्वीर साफ करने में महत्वपूर्ण होगी।

Scanned official document in Hindi/Bengali with a large circular stamp on the right, highlighted sections in yellow, and several signatures at the bottom.
जज शबीना खान का पत्र

नरेंद्र प्रताप-

गोंडा की मंडल कमिश्नर दुर्गाशक्ति नागपाल ने भूमि विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही सिविल जज (जूडि) को फोन कर दिया. आरोप है कि मंडलायुक्त ने जज को प्रभावित करने की कोशिश की.

हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने इस मामले को न्यायपालिका की स्वतन्त्रता पर सीधा प्रहार मानते हुए कमिश्नर के खिलाफ आपराधिक अवमानना पर विचार शुरू किया है.

ज्योति विद्या मंदिर स्कूल की ओर से नगर पालिका के खिलाफ करीब 3 दशक पुराना एक केस लंबित है. मंडलायुक्त की ओर से दलील दी गयी कि यह भूमि सरकार कार्यालयों के भवनों के लिए आरक्षित थी जिस पर स्कूल भवन बना दिया गया.

स्कूल का आरोप है कि स्टे ऑर्डर के बाबजूद राज्य के अधिकारी पद का दुरूपयोग करके अदालत पर अनुचित दबाब बना रहे है इसलिए इस केस को मंडल से बाहर ट्रांसफर किया जाये.

स्कूल ने हाईकोर्ट में सिविल जज के द्वारा जिला जज को लिखी गयी चिठ्ठी भी पेश की जिसमें 15 जुलाई को दुर्गाशक्ति नागपाल के फोन आने का जिक्र है.

UP- देवरिया की जज शबीना खान को कमिश्नर दु्र्गाशक्ति नागपाल ने सीधे-सीधे धमकाया. उनकी पर्सनल जानकारियां जाननी चाही और उनके संस्कारों पर सवाल उठाये. उन्हें एकाध नही, कई बार कॉल किया गया. पीड़ित जज ने जिला जज को जो चिठ्ठी लिखी उसमें कई गंभीर बातों का जिक्र है.

जज शबीना खान लिखती है-

“कमिश्नर ने कहा- अच्छा हुआ कि आपने बात कर ली, वरना मैं आपकी शिकायत हाईकोर्ट करने वाली थी. आपको तमीज नहीं कि सीनियर आईएएस ऑफिसर से कैसे बात करते हैं? मैंने 27 साल की सर्विस में ऐसा ऑफिसर नहीं देखा. आपके व्यवहार से लगता है कि आप ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं भी या नहीं. आप मेरा फोन रिसीव नहीं कर रही हैं. मुझे तो यह लग रहा है कि कैसे संस्कार हैं आपके?

जज शबीना खान से कमिश्नर ने कहा कि वह केस हाईकोर्ट में ट्रांसफर करवा सकती है.

Portrait of Durga Shakti Nagpal seated, with a Hindi news caption about her case and court orders on the right side.

दैनिक भास्कर को दिये गये बयान में दु्र्गाशक्ति नागपाल ने कहा है कि मैंने पूरा पक्ष कोर्ट के सामने रखा है. हाईकोर्ट ने मामले में आदेश भी जारी किया है. संभव है सोमवार तक आदेश अपलोड हो जायेगा.


इस प्रकरण पर महिला जज और दुर्गा शक्ति का बयान और पूरे अदालती दस्तावेज देखिए…

Cover page of a civil transfer application from the High Court Allahabad (Lucknow), Case No. 165 of 2026, listing applicants, opponents, and counsel details.
Page 2 of a legal document (TACL No. 165 of 2026) discussing the petition, permanent injunction, counsel, and a translated letter excerpt dated 04.08.2026.
Page 3 of a Hindi legal document (TACL No. 165 of 2026) containing dense Devanagari paragraphs and a few quoted English lines about a mobile phone.
Page 4 of a bilingual legal document (Hindi and English) with a header 'TACL No. 165 of 2026' and body text.
Page 5 of TACL No. 165 of 2026, listing court proceedings and procedural notes about counsel, judges, and case updates.
Page from a court document with sections 6 and 8–11, discussing transfers and legal proceedings in a civil matter.
Page 7 of a Hindi legal document (TACL No. 165 of 2026) with a dense block of case details and judgments.
Page 8 of a Hindi legal document (TACL No. 165 of 2026) describing case proceedings and judgments.
Page 9 of TACL No. 165 of 2026 showing a legal order in Hindi and English, with paragraphs, headings, and signatures.
Page from a court document 'TACL No. 165 of 2026', sections 14–17 about transferring a case to the learned District Judge, Gonda, with a Hindi quotation at the bottom.
Page 12 of a document in Hindi with dense paragraphs; the left margin shows the heading 'Further,' and the text discusses topics like fake calls, identity misuse, and related court/official proceedings.
Page 13 of TACL No. 165 of 2026; bilingual court document page with Hindi text and English paragraphs about telephonic calls and a Supreme Court case.
Page 14 of a court decision (TACL No. 165 of 2026) with dense paragraphs discussing contempt and judicial independence; includes the judge's signature (Syed Qamar Hasan Rizvi, J.) and the date August 21, 2026.
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