नई दिल्ली। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जाने-पहचाने नामों में शुमार दिनेश श्रीनेत ने नई पारी शुरू की है। टाइम्स इंटरनेट से जुड़े रहे दिनेश श्रीनेत अब रेख़्ता फाउंडेशन में ग्रुप एडिटर-लैंग्वेजेज की जिम्मेदारी संभालेंगे।
पत्रकारिता में करीब तीन दशक का अनुभव रखने वाले श्रीनेत प्रिंट से लेकर डिजिटल मीडिया तक सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अमर उजाला, दैनिक जागरण, वनइंडिया और टाइम्स इंटरनेट जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। डिजिटल पत्रकारिता के विस्तार के दौर में उन्होंने हिंदी समेत भारतीय भाषाओं के लिए कई महत्वपूर्ण संपादकीय परियोजनाओं पर काम किया।
टाइम्स इंटरनेट में रहते हुए दिनेश श्रीनेत ने द इकोनॉमिक टाइम्स हिंदी की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 2017 में शुरू हुए इस हिंदी डिजिटल संस्करण के बाद भारतीय भाषाओं में विस्तार की प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका रही। वर्ष 2022 में टाइम्स इंटरनेट के छह अन्य भारतीय भाषा संस्करणों की शुरुआत से भी वे जुड़े रहे।
अब रेख़्ता फाउंडेशन में उनकी नई भूमिका का दायरा और व्यापक है। फाउंडेशन के प्रमुख भाषा और साहित्य आधारित डिजिटल मंचों में रेख़्ता, हिंदवी, अंजस और रेख़्ता गुजराती शामिल हैं। ग्रुप एडिटर-लैंग्वेजेज के रूप में श्रीनेत इन भाषाओं और उनसे जुड़े संपादकीय उपक्रमों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएंगे।
पत्रकारिता के साथ-साथ श्रीनेत साहित्य और सिनेमा पर भी लगातार लिखते रहे हैं। उनकी पहली प्रकाशित कहानी ‘विज्ञापन वाली लड़की’ वर्ष 2006 में साहित्यिक पत्रिका ‘वागर्थ’ में प्रकाशित हुई थी। उनकी कहानियों और लेखन का दायरा हिंदी से आगे उर्दू और अंग्रेजी तक भी पहुंचा है।
उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘पश्चिम और सिनेमा’, ‘शेल्फ में फरिश्ते’, ‘नींद कम ख्वाब ज्यादा’ और ‘विज्ञापन वाली लड़की’ शामिल हैं। उनके सिनेमा और पत्रकारिता संबंधी लेखन का इस्तेमाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और इग्नू के पाठ्यक्रमों में भी किया गया है।
नई जिम्मेदारी के साथ श्रीनेत का फोकस भारतीय भाषाओं की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर रहेगा। रेख़्ता फाउंडेशन पहले ही उर्दू साहित्य और संस्कृति को डिजिटल दुनिया में बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उसके विस्तार के लिहाज से श्रीनेत की नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
श्रीनेत के मुताबिक, रेख़्ता ने उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति को दुनिया भर के पाठकों तक पहुंचाने का जो काम किया है, वह अपने आप में एक मिसाल है। उनकी कोशिश फाउंडेशन के दूसरे भारतीय भाषा संबंधी काम को भी इसी तरह व्यापक बनाने और नई पीढ़ी को भारतीय भाषाओं की समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जोड़ने की होगी।
पत्रकारिता से साहित्य तक का सफर
दिनेश श्रीनेत की नई भूमिका महज एक मीडिया संस्थान से दूसरे संस्थान में बदलाव नहीं है। यह उनके पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, साहित्य और सिनेमा से जुड़े लंबे अनुभव को भारतीय भाषाओं के एक बड़े साहित्यिक डिजिटल मंच के साथ जोड़ने की कवायद भी है। देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में रेख़्ता फाउंडेशन के बहुभाषी विस्तार में श्रीनेत का अनुभव किस तरह रंग लाता है।


