राजेश साहू-
यूपी में विधायक विकास की सिर्फ बात करते हैं। हकीकत यह है कि विकास के नाम पर मोटा कमीशन लेते हैं। इसमें किसी भी पार्टी का विधायक पीछे नहीं है। कोई 40 तो कोई 50% कमीशन ले रहा है। सपा विधायक पूजा सरोज ने तो साफ कह दिया कि 50% कमीशन लाओ तभी काम होगा। बीजेपी विधायक जय मंगल कन्नौजिया 35% कमीशन पर मान गए।
दैनिक भास्कर की इंवेस्टिगेशन टीम ने दोनों ही विधायकों को काम करवाने के लिए पैसे दिए। दोनों ने ही रख लिया और काम के लिए साइन कर दिया। विधायक लोग जनता के सर्वांगीण विकास का बाद में सोचते हैं, काम से पहले अपना हिस्सा लेना नहीं भूलते।
अगर विधायक ही 40-50% कमीशन खाकर बैठ जाएगा, तब विकास की क्या गुणवत्ता होगी? यही कारण है कि कहीं सड़क धंस रही तो कहीं स्कूल की बिल्डिंग चटक रही।
इन विधायकों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्होंने जो कमीशन बटोरा है उससे इन्होंने अपना आलीशान महल तैयार कर लिया है।
इस देश में पैसे की कोई कमी नहीं है, जरूरत है कि सही तरीके से उससे विकास के काम हों। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। कहने को तो प्रदेश में मजबूत सरकार है लेकिन हकीकत देखिए, 50 लाख के काम में 25 लाख विधायक खुद अपने पास रख रहा।
यूपी में विकास कराने के लिए रिश्वत ले रहे विधायक, भाजपा-सपा विधायक ऑनकैमरा हुए बेनकाब, विकास के नाम पर जनता की ख़ून-पसीने की कमाई का 35% से 40% लेते हैं कमीशन!
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी में विधायक खुद विकास के नाम पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए ये अनुशंसा-पत्र तभी लिखते हैं, जब इन्हें 35% से 40% कमीशन मिलता है। अनुशंसा-पत्र विधायक का वह लेटर है, जिसके आधार पर CDO (चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर) विधायक निधि से पैसा जारी करते हैं। 35 से 40% पैसा विधायक की जेब में जाने के बाद काम की क्वालिटी क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
रिश्वत लेने वाले 2 विधायकों को ऑन कैमरा बेनकाब हुए। रिपोर्टर ने NGO मैनेजर बनकर विधायकों से फंड जारी करने की डील की। विधायकों का एक ही सवाल पर फोकस था कि हमें कितना कमीशन मिलेगा? विधायकों ने हिडन कैमरे पर कमीशन लिया और विधायक निधि जारी करने के लिए अनुशंसा-पत्र दे दिया। इन 2 विधायकों में 1 भाजपा और 1 सपा का है।
रिपोर्टर ने सबसे पहले हमने भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया का स्टिंग किया। कन्नौजिया पर रिश्वतखोरी के आरोप लग चुके हैं। सबसे पहले रिपोर्टर ने एक NGO रजिस्टर कराया। फिर सोलर लाइट से जुड़ी ट्रेनिंग ली, क्योंकि रिपोर्टर विधायक से सोलर लाइट लगाने के लिए ही राशि लेनी थी।
विधायक से परिचय बढ़ाने के लिए रिपोटर उनके साथ 30 दिन तक गांव-गांव घूमे। सोलर लाइट के फंड के लिए विधायक से कुल 8 राउंड में डील हुई। चौथे राउंड में विधायक कन्नौजिया 35% कमीशन के बदले 10.50 लाख रुपए का काम देने को तैयार हो गए। इसके बाद हुई मीटिंग्स में उन्होंने रिश्वत ली और अनुशंसा-पत्र पर साइन करके रिपोर्टर को दे दिया।
आजमगढ़ जिले में मेंहनगर से सपा विधायक पूजा सरोज पर भी रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। रिपोटर ने विधायक के रिश्तेदार और विधायक प्रतिनिधि विकास सरोज से पहचान बढ़ाई। NGO मैनेजर बनकर विधायक को सोलर लाइट और वाटर कूलर लगाने का प्रपोजल दिया। विधायक ने सैंपल मांगा तो एक सोलर लाइट खरीदकर इंस्टॉल करके बताई।
15 दिन तक उनके लोगों के साथ गांव-गांव जाकर वे स्थान चयनित किए, जहां सोलर लाइट लगानी थी। विधायक से टोटल 15 मीटिंग हुई। 12वीं मीटिंग में विधायक ने कमीशन की बात की।
कुछ दिन बाद विधायक पूजा सरोज के प्रतिनिधि विकास का कॉल आया। उसने कहा- आप आए नहीं। रिपोर्टर कहा- विधायक जी, 50% एडवांस पर अड़ी हैं। हम 25% दे सकते हैं। आप विधायक जी से साइन कराकर लेटर वाट्सएप पर भेज देंगे तो हम 5 लाख रुपए लेकर आ जाएंगे।
विकास ने 7 दिन बाद 4 अनुशंसा पत्र भेजे। विकास ने कहा- 35% कमीशन का आधा यानी 14 लाख 17 हजार 500 रुपए लेकर आ जाओ और लेटर की हार्ड कॉपी ले जाओ। चूंकि हम विधायक को एक्सपोज कर चुके थे, इसलिए हार्ड कॉपी लेने नहीं गए।
विधायक के प्रतिनिधि विकास को रिपोर्टर ने तीन बार में 10 हजार, फिर 10 हजार और फिर 5 हजार रुपए लिए। यानी विधायक निधि का 1-2% ये लोग खा रहे हैं। इसी तरह महराजगंज सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया के करीबी संजीव शुक्ला ने हमसे चार बार 5-5 हजार रुपए, इस तरह 20 हजार रुपए लिए।
ज्ञात हो यूपी में प्रत्येक विधायक को हर साल 5 करोड़ रुपए विधायक निधि मिलती है। यानी 5 साल में 25 करोड़ रुपए। सड़क, नाली, खड़ंजा, सामुदायिक भवन, पेयजल, लाइट सहित कई तरह के काम करा सकते हैं।


