मदर ऑफ डेमोक्रेसी में दिल्ली पुलिस ने अपने आका से सवाल पूछने के आरोप में मुस्लिम महिला पत्रकारों को पीट दिया। यह मेरे 10 अखबारों में पहले पन्ने की खबर नहीं बनी, फोटो नहीं है। दलबदल के मामले में लोकसभा अध्यक्ष फैसला नहीं दे रहे हैं। फिर तारीख बढ़ा दी। यह भी बड़ी खबर है लेकिन ढूंढ़नी पड़ी।
संजय कुमार सिंह
जीडीपी के आंकड़ों पर सरकार पूरी तरह घिर चुकी है। द हिन्दू की खबर के अनुसार, कांग्रेस ने सरकार से कहा है कि गणना की विधि को स्पष्ट करे। फिर भी नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, “हमारी ग्रोथ दुनिया के लिए अवसर : पीएम”। लीड के साथ एक शीर्षक है, भारत बेल्जियम 5 साल में व्यापार दोगुना करेंगे। यह दि एशियन एज की लीड है। जाहिर है, जब करेंगे तब करेंगे आज अमर उजाला में खबर है, नागपुर की एक कंपनी ने 769 करोड़ रुपए लेकर भी यूक्रेन को ऑर्डर के गोला बारूद नहीं दिए। इस डील के चलते एस्टोनिया के राष्ट्रपति को इस्तीफा देना पड़ा है। भारत का जो डंका बजा वह खबर नहीं है। स्कूल बिल्डिंग छोड़कर टोल रोड बनाए गए हैं और टोल वसूली में घपले की खबर पहले तो थी ही, आज भी है। ऐसा लगता है जैसे ईडी को जब विपक्षी नेताओं को धमकाने पटाने में लगाया गया था तब टोल वसूली वाले घपला कर रहे थे। आज के अखबारों में मुद्दा उत्तराखंड में छुआछूत भी है। तृणमूल के 20 दलबदलुओं के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को फैसला लेना है पर वे तारीख पर तारीख दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार के पक्ष और प्रचार में भी आज कुछ शीर्षक हैं।
दैनिक भास्कर
1. चीन सीमा तक सेना का नया रास्ता, ताकि हथिया और रसद पहुंच सके। 298 किलोमीटर के तीसरे रास्ते से हिमाचल की ओर से लद्दाख पहुंचने की राह खुल जाएगी।
2. अमेरिका ने चेताया… भारत-ईरान ने ट्रेड डील की तो प्रतिबंध के लिए तैयार रहें। इसके साथ तथ्य है कि 2018 तक रोज ईरान से 4.6 लाख बैरल क्रूड की सप्लाई हुई है और इसका भुगतान रुपए में हुआ है।
अमर उजाला
3. अमेरिका से द्विपीक्षीय व्यापार समझौते के लिए अन्य से बेहतर टैरिफ पर अड़ा भारत
द हिन्दू
4. एयर क्वालिटी पैनल ने पंजाब और हरियाणा में खेतों में आग लगने की घटनाओं पर नज़र रखने के काम को बेहतर बनाने के लिए इसरो की मदद लेगा
इंडियन एक्सप्रेस
5. रूसी तेल नहीं खरीदने से युद्ध नहीं रुकेगा : जयशंकर
हिन्दुस्तान टाइम्स
6. बेल्जियम, भारत ने संबंध मजबूत किए; रक्षा निर्माण पर करार
आप जानते हैं कि राहुल गांधी ने दिल्ली में (से) जो कहा-किया उसके लिए उत्तराखंड में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। कल गिरफ्तारी की चर्चा थी, आज खबर नहीं है लेकिन देशबन्धु की लीड के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में भाजपा के नेता जयप्रकाश नड्डा को पत्र लिखा है। पूछा है कि, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। 25 दिन बीतने के बाद भी इस मामले में एफआईआऱ नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। खरगे ने नड्डा को राज्यसभा में उनके बयान की याद दिलाते हुए मांग की है कि, हल्द्वानी की घटना सीधे-सीधे छुआछूत का मामला है। उन्होंने यह भी पूछा है कि उनके साथ ऐसा हो सकता है तो देश में आम दलितों के साथ क्या होता होगा। दिल्ली पुलिस ने मुस्लिम महिला पत्रकार की धुनाई कर दी। यह खबर आज मेरे किसी अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन सवाल तो है ही कि, दिल्ली में अगर अपना काम करने वाली मुस्लिम महिला पत्रकार की पुलिस पिटाई हो सकती है तो देश में महिलाओं और मुस्लिमों के साथ क्या होता होगा।
ऐसी सरकार और ऐसे शासन के समर्थन में पुलिस और प्रशासन सरकार के विरोधियों को परेशान कर रहे हैं। नोएडा के मजदूर आंदोलन में छात्रा को गढ़ी हुई कहानी से फंसाने का मामला सार्वजनिक होने के बाद यह भी सार्वजनिक है कि ऐसा करने वाली मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी है। ऐसे में आज टाइम्स ऑफ इंडिया ने आकृति चौधरी के पिता अरुण चौधरी से बात की है। यह खबर आज पहले पन्ने पर है। मैं कह सकता हूं कि यह बहुत समय बाद, समय पर किया गया एक जरूरी फॉलोअप है। लंबे समय से ऐसा कुछ नहीं हो रहा था। जयदीप देवगढ़िया की यह खबर पहले पन्ने पर तो है ही। विस्तार अंदर के पन्ने पर है। इसका शीर्षक है, आकृति मानसिक रूप से कुछ और समय जेल में रहने के लिए तैयार है।
सरकार के व्यवहार और विरोधियों को परेशान करने की खबरों के बीच आज दि इंडियन एक्सप्रेस की खबर है, पुलिस के कैमरे ने हत्या, बलात्कार के जिन आरोपियों को जंतर मंतर प्रदर्शन में ‘देखा’ था उनमें कम से कम 25 जेल में थे और यह रिकार्ड से पता चलता है। जाहिर है सॉफ्टवेयर घटिया है या तकनीक का गलत इस्तेमाल किया गया है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान भी घटिया सॉफ्टवेयर या तकनीक के दुरुपयोग के जरिए लॉजिकल डिसक्रिपेंसी का नया मामला निकाला गया और लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया। भाजपा जीत गई। आप समझ सकते हैं कि हम कैसे समय में जी रहे हैं, भले इसे अच्छे दिन कहा जाता हो।
जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद सरकार वादे से मुकर गई और एफआईआर वापस नहीं लिए। उल्टे यह प्रचार किया गया कि उसमें अपराधी भी आए थे। पुलिस ने 2873 अपराधियों को देखने / पहचानने का दावा किया और सरकार समर्थक इसका ढोल पीटते रहे। अब पता चल रहा है कि ऐसे लोगों में कम से कम 25 जेल में थे और जाहिर है सरकार सबको परेशान करती। भले वे बाद में बरी हो जाते। बरी होने से याद आया कि आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन तीसरी बार या तीसरे मामले में फंसाकर जेल भेजे गए थे पर उन्हें जमानत मिलने की खबर आज कई अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार इस कथित निविदा घोटाले में एफआईआर और गिरफ्तारी में 27 महीने का अंतर है और अदालत ने इसपर सवाल किया था।
भाजपा सरकार की मनमानी और चुप्पी का विरोध बढ़ रहा है। इसका पता टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू की लीड से भी चलता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, बार कौंसिल ऑफ इंडिया का अधिकार क्षेत्र केवल वकीलों पर है, विधि छात्रों पर नहीं : सुप्रीम कोर्ट। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, विधि छात्रों को सज़ा देने का अधिकार बार काउंसिल के पास नहीं है:सुप्रीम कोर्ट। उपशीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ़ वे यूनिवर्सिटी कर सकती हैं जिनमें छात्र नामांकित हैं; कोर्ट ने बीसीआई की उस कोशिश की आलोचना की है जिसमें उसने नलसार के उन छात्रों को डराने-धमकाने की कोशिश की थी जिन्होंने अपने दीक्षांत समारोह में सीजेआई कांत को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने का विरोध किया था।
द हिन्दू ने खबर का एक अंश हाईलाइट किया है, इस मामले पर गहराई से विचार करने के बाद, हमारी राय है कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया और स्टेट बार काउंसिल्स को लॉ स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ कोई भी अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं देता है – चाहे वह अधिकार साफ़ तौर पर दिया गया हो या परोक्ष रूप से। द टेलीग्राफ फ्लैग का शीर्षक है, नियामक विधि छात्रों को अनुशासित नहीं कर सकते हैं : सर्वोच्च अदालत। कहने की जरूरत नहीं है कि ये टिप्पणियां भारत के उसी सर्वोच्च अदालत की हैं जिसके मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि समाज में कुछ लोग “पैरासाइट” (परजीवी) की तरह हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं।
उन्होंने मौखिक टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार युवा “कॉकरोच की तरह” हैं, जो काम न मिलने पर मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर संस्थाओं पर हमला करने लगते हैं। जेआई ने अगले दिन स्पष्टीकरण दिया था कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया था और उनका निशाना फर्जी/बोगस डिग्री के सहारे कानूनी पेशे, मीडिया या अन्य क्षेत्रों में घुस आए लोग थे, न कि देश के युवा। लेकिन स्थिति इतनी खराब थी कि एक युवा अधिवक्ता ने अपने मामले से संबंधित दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में हवा में उड़ा दिए थे। सीजेआई को गाली दी थी।
हालांकि, दि एशियन एज अभी भी सरकरी प्रचार में लगा है। वैसे, पहले पन्ने पर एक खबर है, अभिषेक के दफ्तर में तोड़-फोड़, 6 गिरफ्तार; टीएमसी ने भाजपा पर आरोप लगाए। हालांकि यह खबर कानून के शासन की बात करती है और इस चेतावनी के साथ छपी है कि ममता बनर्जी ने दिल्ली में धरना देने की चेतावनी दी। नवोदय टाइम्स की लीड का उपशीर्षक है – (प्रधानमंत्री ने) 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज किए जाने का उल्लेख किया। जीडीपी के आंकड़े पर भी विवाद है और प्रधानमंत्री के कहने के बावजूद है। आप जानते हैं कि अभी तक प्रधानमंत्री के कहे को लोग मान लेते थे और सवाल आम तौर पर नहीं उठाए गए हैं। शायद इसीलिए मोदी है तो मुमकिन है के अंदाज में नवोदय टाइम्स ने पहले ही पन्ने पर दूसरा पक्ष भी छापा है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


