कानपुर। अमृतविचार के कानपुर कार्यालय को लेकर लगातार सामने आ रहे कथित विवादों ने अब संस्थान के कामकाज और आंतरिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों के बीच मारपीट और प्रबंधन की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों ने कार्यालय के माहौल को सवालों के घेरे में ला दिया है।
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार 27 अगस्त 2026 की रात करीब 8:30 बजे अमृत विचार कानपुर कार्यालय के संपादकीय विभाग में कर्मचारियों की मौजूदगी में क्राइम रिपोर्टर लालजी मिश्रा और पार्थो कुनार के माध्यम से भर्ती किए गए रिपोर्टर रिषभ तिवारी के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद के दौरान लालजी मिश्रा ने रिषभ तिवारी के साथ मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं और खून निकलने लगा।
रिषभ तिवारी की ओर से कथित तौर पर पुलिस में शिकायत करने की बात कहे जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि इसके बाद कार्यकारी संपादक दिग्विजय सिंह ने लालजी मिश्रा को दो दिन का अवकाश देकर विवाद को शांत करने और मामले को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।
बताया जाता है कि अमृत विचार में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। बल्कि इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सूत्रों की माने तो पार्थो के द्वारा कानपुर मीटिंग के दौरान DGM नीलाम्बुज पांडेय के द्वारा सीनियर मैनेजर निशान्त पाठक के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की, मार पीट की गई, उनका कॉलर पकड़ा और गला दबाकर मारपीट की। दावा किया जा रहा है कि यह घटना पार्थो कुनार की मौजूदगी में हुई थी।
प्रबंधन और कार्य संस्कृति पर सवाल
लगातार सामने आ रहे इन आरोपों ने अमृतविचार के कानपुर कार्यालय की कार्य संस्कृति पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। कर्मचारियों के बीच विवाद, कथित मारपीट और प्रबंधन द्वारा मामलों को आंतरिक स्तर पर निपटाने के प्रयासों को लेकर कर्मचारियों में असंतोष होने की बात कही जा रही है।
क्या अमृतविचार प्रबंधन देगा जवाब?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कार्यालय के भीतर कर्मचारियों के साथ मारपीट के आरोप सही हैं तो प्रबंधन ने उन पर क्या कार्रवाई की? क्या घटना की आंतरिक जांच कराई गई? क्या कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के बयान लिए गए? और क्या संबंधित कर्मचारी की शिकायत पुलिस तक पहुंची?
कानपुर कार्यालय से जुड़े इन आरोपों पर अमृतविचार प्रबंधन, लालजी मिश्रा, रिषभ तिवारी, दिग्विजय सिंह, नीलाम्बुज पांडेय, निशान्त पाठक और पार्थो कुनार का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
यदि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होती है, तो यह केवल दो कर्मचारियों के बीच विवाद का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह संस्थान की कार्य संस्कृति, कर्मचारियों की सुरक्षा और प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाएगा।
इस पूरे मामले में रिषभ तिवारी ने भड़ास को बताया कि एक ही बीट पर दो लोगों के पहुंचने से पूरा मामला शुरू हुआ था। धक्का मुक्की और मारपीट भी हुई। रिषभ ने संपादक दिग्विजय सिंह इस बात की शिकायत की। दिग्विजय की तरफ से कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। जिसका रिषभ तिवारी को इंतजार है।


