कोलकाता: आनंदबाजार पत्रिका में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े कथित हिंसा के मामले की रिपोर्टिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए ‘गेरुआ गुंडागर्दी’ (Saffron Hooliganism) शब्द को लेकर पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। कोर्ट के समक्ष पश्चिम बंगाल सरकार ने आश्वासन दिया कि यदि संबंधित पत्रकार जांच एजेंसी की ओर से जारी नोटिस का पालन करते हैं तो उनके खिलाफ फिलहाल कोई जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एसएन मुखर्जी, अधिवक्ता अरुणाभ देब और आशिका डागा के साथ पत्रकारों की ओर से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ‘गेरुआ गुंडागर्दी’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं। उनका कहना था कि ऐसा आरोप लगाया जा रहा है मानो पत्रकारों ने देश के सभी संन्यासियों का अपमान किया हो।
मुखर्जी ने कहा, “मामला उकसावे के आरोप में शुरू किया गया है, जैसे हमने देश के सभी संन्यासियों को अपमानित कर दिया हो।” उन्होंने यह भी बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके कार्यालय को गेरुआ रंग से रंग दिया गया था।
कोर्ट ने पूछा- ‘गेरुआ बर्बरता’ शब्द से परिचित हैं?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता एसएन मुखर्जी से पूछा कि क्या वह ‘सैफ्रन वैंडलिज्म’ (गेरुआ बर्बरता) शब्द से परिचित हैं। इस पर मुखर्जी ने जवाब दिया कि वह इस अभिव्यक्ति से परिचित हैं। उन्होंने कहा, “हां, वास्तव में मेरे पिता गेरुआ ब्रिगेड का हिस्सा थे।”
कोर्ट ने आनंदबाजार पत्रिका के फ्रंट पेज का भी संदर्भ दिया। इस दौरान मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि मामला राजनीतिक नहीं बल्कि पत्रकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक मामला नहीं है, यह पत्रकारों का मामला है।”
राज्य ने पूछा- क्या पत्रकारों को विशेष संरक्षण मिल सकता है?
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने पत्रकारों को किसी विशेष संरक्षण दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने सवाल किया, “वे पत्रकार हैं, इसलिए वे कुछ भी कर सकते हैं?”
इस पर मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि वह पत्रकारों के लिए किसी विशेष विशेषाधिकार की मांग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक आम नागरिक से ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं।”
इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि मामले पर अगली सुनवाई होने तक पत्रकारों के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई तो नहीं की जाएगी।
नोटिस का पालन करने पर नहीं होगी जबरन कार्रवाई
राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि यदि पत्रकार जांच एजेंसी की ओर से दिए गए नोटिस का पालन करते हैं तो उनके खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “नोटिस का पालन करने दीजिए। जब तक माननीय न्यायालय मामले को सुनवाई के लिए नहीं लेता, तब तक कोई जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
हालांकि, राज्य ने पत्रकारों को व्यापक या blanket protection देने का विरोध किया। AAG ने कहा कि पत्रकारों को जारी नोटिस का पालन करना होगा और किसी भी तरह की कार्रवाई से पूरी तरह छूट नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि पत्रकारों को नोटिस का पालन करना होगा। कोर्ट ने कहा, “नोटिस का पालन करें, कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। अगर कुछ होता है तो मेरे संज्ञान में लाएं।”
वरिष्ठ अधिवक्ता मुखर्जी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अगली सुनवाई से पहले संबंधित पत्रकार नोटिस का पालन करेंगे।
‘गेरुआ गुंडागर्दी’ शब्द के इस्तेमाल पर दर्ज हुई थीं FIR
पत्रकारों के खिलाफ ये FIR आनंदबाजार पत्रिका की उस रिपोर्टिंग के बाद दर्ज की गई थीं, जिसमें जादवपुर विश्वविद्यालय में कथित हिंसा को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। रिपोर्ट में ‘गेरुआ गुंडागर्दी’ (Gerua Gundami) शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी।
इसके बाद संबंधित पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई। पत्रकारों ने इन FIR और आपराधिक कार्यवाही से राहत की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले में कोर्ट की अगली सुनवाई पर अब आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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