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दिल्ली

4पीएम की महिला पत्रकारों के साथ कल दिल्ली में जो हुआ, वो खबर नहीं, लोकतंत्र के माथे पर काला धब्बा है!

Collage: injured person with bruised knee in a hospital setting and a reporter covering a scene nearby; arrows highlight the wounds in zoomed-in insets.

शेख ताहिर-

एक महिला पत्रकार की चीख… और लोकतंत्र का दम घुटता हुआ चेहरा!

कल दिल्ली में जो हुआ, वो खबर नहीं, लोकतंत्र के माथे पर काला धब्बा है। 4PM की पत्रकार शाहीन खान एक बेटी, एक बहन, एक पत्रकार… हाथ में माइक, दिल में सच का जुनून लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से एक सवाल पूछने गई थी। बस एक सवाल!

इनाम में क्या मिला? वर्दी का कहर!

आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उसे बालों से घसीटा, जमीन पर पटका, लातों-घूंसों से पीटा और घसीटते हुए थाने ले गई। उसकी चीखें सुनने वाला कोई नहीं था। और फिर वो घिनौना पल आया…जब पुलिस ने पूछा – नाम क्या है तेरा? जैसे ही जुबान से निकला -शाहीन खान पत्रकार की सहयोगी नफीसा खान!

तो इंसानियत मर गई… पुलिस का जुल्म और भी बेरहम हो गया। क्या इस देश में खान मुसलमान होना अब गुनाह है?

क्या कलम वाली बेटी पर हाथ उठाना ही नया कानून है?

  • अनुच्छेद 19(1)(a) कहता है – बोलने की आजादी हमारा हक है।
  • अनुच्छेद 21 कहता है – इज्जत के साथ जीना हमारा हक है।
  • अनुच्छेद 15 कहता है – धर्म-नाम के आधार पर भेदभाव नहीं होगा।

आज दिल्ली में तीनों अनुच्छेदों को वर्दी के बूटों तले रौंद दिया गया।

ये थप्पड़ सिर्फ शाहीन के गाल पर नहीं लगा, ये थप्पड़ भारत के संविधान पर लगा है। ये चोट सिर्फ एक महिला पत्रकार को नहीं लगी, ये चोट हर माँ-बेटी को लगी है जो सच के लिए आवाज उठाती है।

हम खामोश नहीं रहेंगे!

  1. सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच हो और CCTV फुटेज तुरंत सुरक्षित हो।
  2. मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास और महिला उत्पीड़न और सांप्रदायिक नफरत की FIR हो।
  3. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता माफी मांगें और शाहीन को इंसाफ दें।

आज अगर शाहीन के लिए नहीं बोले, तो कल तुम्हारी बारी होगी।


नाजिया खान-

नफ़ीसा ख़ान और शाहीन ख़ान नाम की दो पत्रकारों (4PM News Network) ने आरोप लगाया है कि उनको साकेत मैक्स हॉस्पिटल में रेखा गुप्ता और अमित शाह के कार्यक्रम को कवर करते समय मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश पर दिल्ली पुलिस ने साकेत थाने ले जाकर पीटा, जिसमें नाम “ख़ान” सुनकर मारपीट और गालियों की बौछार हो गई।

दोनों ने मीडिया को चोटों के निशान दिखाए और AIIMS में ट्रीटमेंट लिया।

Woman in a black shirt lying on a light tile floor, eyes closed, arms spread, holding a pink object in her right hand.

एज़ एक्सपेक्टेड, पुलिस ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उन्होंने स्कूटर से VVIP रूट रोका था इसलिए थाने ले जाया गया।

लेकिन कहीं की भी घटना हो, ऐसा हुआ होगा, इसमें शायद ही किसी को डाउट होगा। जो ऊपरी तौर पर नकार रहे हैं, उनको भी मन ही मन पता होगा, यह सब होता है। वे तो जर्नलिस्ट हैं, इसलिये मुखर हैं। नहीं तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया में एक पक्ष अपनी आइडेंटिटी की वजह से हमेशा हाशिये पर रहेगा, ज़िम्मेदारों को भी पता होगा कि इनके साथ ग़लत करने पर भी कोई एक्शन नहीं, बल्कि रिवार्ड ही मिलेगा, यह धारणा पुख़्ता हुई है, क्योंकि उसके तमाम कारण हैं।

एक लड़का अभी बहुत वायरल हो रहा है, जो एआई कंटेंट से मुस्लिम लड़कियों की फोटो बना बनाकर ऑब्जेक्टिफाय करता है, बेहूदा पोस्ट्स करता है और उसकी रीच लाखों में है, वॉशिंग मशीन पार्टी के कई नेताओं के साथ उसकी फोटो है। जिस पार्टी की विशेषता ही यही है कि ऐसे लोगों को फटाफट प्रमोशन मिल जाता है। इसके अलावा और कोई योग्यता तो होती नहीं जिनमें। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण हैं।।


अल्ताज खान-

आज देश की राजधानी दिल्ली में जो हुआ उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, शाहीन नाम की मुस्लिम पत्रकार को सरकार से सवाल पूछने के बाद पुलिस ने धार्मिक आधार पर बहुत ही बेरहमी से पीटा, शाहीन की साथी नफीसा को भी बुरी तरह से पीटा गया।

4 PM न्यूज की धाकड़ युवा रिपोर्टर शाहीन ने रिपोर्टिंग के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल किया, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने उनकी पहचान पूछी, जब शाहीन ने अपना नाम बताया तो पुलिस अधिकारी नाम सुनकर उग्र हो गए और शाहीन को पीटने लगे।

शाहीन के साथ उसकी साथी नफीसा भी थी। पुलिस द्वारा की गई इस बर्बर मारपीट में नफीसा के पैर पर बहुत चोट लगी, जिसके बाद वो चल नहीं पा रही है और पैर में सूजन आ गयी है, शाहीन के हाथ पर भी चोट लगने की वजह से चोटिल जगह नीली पड़ गयी है।

आज ज़ब पूरा पत्रकार जगत इस लड़की के सपोर्ट में खड़ा है तो गोदी मीडिया के पत्रकार इस मुद्दे पर ख़ामोश हैं, अंजना ओम कश्यप, रुबिका लियाक़त, चित्रा त्रिपाठी जैसी देश की बड़ी महिला पत्रकारों के मुँह से शाहीन और उसकी साथी की पिटाई पर एक शब्द नहीं निकला।

महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली ये महिला पत्रकार आज महिला पत्रकार के अपमान पर अपने मुँह में दही जमाये बैठी है, इन पत्रकारों का काम सिर्फ सरकार के पक्ष में रिपोर्टिंग करना और करोड़ों रुपये छापना है।

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