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आज के अखबार : सरकार संरक्षित गुंडे की गिरफ्तारी बताती है, कौन कितना स्वतंत्र और कैसा पक्षपाती

Residents move through a flooded street in Varanasi by boat, with several people aboard and others on the waterlogged bank.

पीटीआई की यह फोटो द हिन्दू में पहले पन्ने पर छपी है। कैप्शन है – वाराणसी के बाढ़ प्रभावित आवासीय क्षेत्र में शुक्रवार को पानी से भरी सड़क पर चलने के लिए लोग नाव का उपयोग कर रहे हैं।

संजय कुमार सिंह

आज जो खबरें छपी हैं लेकिन जिनकी चर्चा मैंने नहीं की है उन्हें पहले बता देता हूं। 1) दिल्ली में टर्मिनल 2-3 पर पानी भर गया। दो घंटे में दिल्ली एयरपोर्ट पानी-पानी 2) आतंकवाद खत्म करने के दावे के बावजूद बडगाम में मुठभेड़। एक आतंकी ढेर, 5 की तलाश 3) दिल्ली में ऐतिहासिक जल भराव और जमाव के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, ड्रेनेज, वाटर सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव दिखेगा। 4) मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर चेतावनी दी। विपक्ष की आलोचना की। आततायियों ने कोशिश की पर सतनात आस्था मिटा नहीं पाए 5) नेपाल की बाढ़ में 275 भारतीय अभी भी लापता, 166 बचाए गए। भारत ने राहत सामग्री भेजी। इस खबर में बताया गया है, अभी तक 54 भारतीय कार्मिक भेजे गए हैं, इनमें बचाव, फोरेनसिक और मेडिकल टीम शामिल है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दी है। 6) एक शीर्षक है, हरे कृष्ण का जाप कर सुरंग में नौ दिन सुरक्षित रहे संजय। 7) उत्तर प्रदेश में बाढ़ के बीच से 17,000 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए 8) हिन्दुस्तान टाइम्स का एक शीर्षक है, ब्रिक्स (सम्मेलन) के लिए तैयार? आठ दिन पहले हवाई अड्डा पानी-पानी होने पर यह सवाल लाजमी है। 9) टाइम्स ऑफ इंडिया ने हवाई अड्डे की फोटो के साथ बताया है कि 11 उड़ान डायवर्ट की गईं। 10) इसका कारण और सूचना यह है कि, चार महीने बाकी हैं, शहर सामान्य बरसात की वार्षिक सीमा पार कर चुका है।

Heavy rain caused waterlogging at IGI Airport; travelers wade through water in the terminal as flights are diverted
TOI

सरकार का हरसंभव बचाव करने की प्रवृत्ति (या मजबूरी) वाली आजकल की पत्रकारिता में खबरों में स्वतंत्र भारद्वाज को गुंडा लिखना जरूरी नहीं था। मेरे 10 अखबारों में किसी ने लिखा भी नहीं है। सिर्फ नाम से काम चल सकता था लेकिन अखबारों ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, हिन्दुत्व इंफ्लुएंसर और दक्षिण पंथी कंटेंट क्रिएटर आदि लिखा है। खबर यह है कि प्रधानमंत्री को बड़ा भाई कहने वाला, सीजेपी आंदोलन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता का सिर फोड़ने का आरोपी है। उसे गिरफ्तार भी नहीं किया गया था। सोशल मीडिया में उसने यह सब खुद दावा किया और तब थाने पर प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किया गया।

उस स्वतंत्र भारद्वाज को अमर उजाला ने सिर फोड़ने वाला और सिर फोड़ने का आरोपी लिखा है। दैनिक भास्कर ने हिन्दुत्व इंफ्लुएंसर भी लिखा है। देशबन्धु ने लिखा है, … वह निशु के पिता का सिर फोड़ने के अपराध को स्वीकार करते हुए बड़े-बड़े नेताओं व मंत्रियों से अपने करीबी संबंध होने की डींगें हांक रहा था। नवोदय टाइम्स ने लिखा है, दिल्ली पुलिस ने ‘इंफ्लूएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया। अखबार ने उसके रंग बदलने को एक अलग खबर के रूप में छापा है। इसका शीर्षक है, भारद्वाज ने हमले को बताया आत्मरक्षा।

मुझे लगता है कि यह सरकारी संरक्षण वाले एक अपराधी को जरूरत से ज्यादा महत्व देना है। वैसे तो यह खबर आज कई अखबारों में पहले पन्ने पर है। लीड भी है। इस तरह स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को महत्व मिल ही गया है लेकिन उसके पक्ष को भी महत्व देना गैर जरूरी लगता है। उसका (आत्म) प्रचार तो है ही। द टेलीग्राफ ने भी इसे पहले पन्ने पर फोटो के साथ दो कॉलम में छापा है। शीर्षक है, जंतर-मंतर पर नफ़रत फैलाने वाले हमलावर को हिरासत में लिया गया। दि एशियन एज में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है।

हिन्दी के मेरे चार अखबारों में से दो में यह लीड है। हालांकि, इसके लिए शीर्षक भी वैसा ही लगाया गया है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, विपक्ष के दबाव के बाद पकड़ा गया स्वतंत्र भारद्वाज। इसके साथ निशु का आरोप है, प्रशासन भारद्वाज से मिला हुआ है। नवोदय टाइम्स में लीड का शीर्षक है, हिरासत में स्वतंत्र। इसके साथ सीजेपी का धरना भी प्रमुखता से लिखा है। मुख्य खबर के साथ एक और खबर है, (निशु को) न्याय दिलाने की जिम्मेदारी मेरी : चिराग। दि इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का शीर्षक है, सीजेपी धरना के बाद प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने वाला हिरासत में लिया गया।

खबर में स्वतंत्र भारद्वाज को स्वघोषित इंफ्लुएंसर कहा गया है। खबर इस प्रकार है, स्वतंत्र भारद्वाज, जो खुद को “इन्फ्लुएंसर” बताता है और जिसने कथित तौर पर जुलाई में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने वाली एक युवा प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने की बात स्वीकार की थी को शुक्रवार शाम पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्रशेखर व राजेश रंजन द्वारा नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन करने के लगभग छह घंटे बाद की गई।

आप जानते हैं कि इससे पहले पेलेट गन से घायल युवक की एफआईआर करवाने में राहुल गांधी को छह घंटे से ज्यादा लगे थे। इस मामले में भी दो सांसदों के साथ सीजेपी को भी थाने पर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। यही शीर्षक है। लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद मंच शुद्ध करने की कार्रवाई मामले में अभी तक एफआईआर नहीं हुई है। राहुल गांधी ने मांगी की और कुछ करते इससे पहले उन्हीं के खिलाफ एफआईआर हो गई है। कल सोशल मीडिया पर खबर थी कि कर्नाटक में इस मामले में एफआईआर हुई है। इस मामले में भी आप खबर सुनेंगे या कह सकते हैं कि खबर पक रही है। मैं उस खबर के पहले पन्ने पर आने का इंतजार कर रहा हूं।

आज स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की खबर के मामले में मेरा मानना है कि अपराधी की गिरफ्तारी, चाहे वह कितना भी बड़ा अपराधी हो या कितनी ही बड़ी हस्ती का करीबी हो, खबर नहीं है। यह प्रचार की ही श्रेणी में आएगा क्योंकि हर कोई इस सूचना का प्रचार करना चाहेगा ताकि उसपर अपराध या अपराधी को संरक्षण देने का आरोप साबित न हो या पुलिस पर दबाव में होने का आरोप न लगे। दूसरी ओर, गिरफ्तारी या हिरासत में लिया जाना तो औपचारिकता है। कार्रवाई नहीं। कार्रवाई तो अदालत में होगी या पुलिसिया कार्रवाई करती है तो खबर नहीं बनती है। तथ्य यह है कि दिल्ली के साकेत थाने में दो महिला और मुस्लिम पत्रकारों की पिटाई हुई। वह इतनी बड़ी खबर नहीं बनी। भारी विरोध और मांग के बावजूद एफआईआऱ नहीं हुई है।

आज देशबन्धु का उपशीर्षक है, महिला पत्रकारों की पिटाई मामले में अभी तक दर्ज नहीं हुई एफआईआर। इसके साथ एक और खबर है, बीती रात से लेकर शुक्रवार तक राजधानी के दो थानों का हुआ घेराव। इन खबरों और सूचनाओं को लीड बनाना तो समझ में आता है लेकिन ‘हिरासत में स्वतंत्र’ जैसा शीर्षक लीड जैसी खबर नहीं है। इसी तरह चिराग पासवान ने न्याय दिलाने की जिम्मेदारी ली है, खबर है और इसका प्रचार किया जाए तो उनकी जिम्मेदारी बढ़ेगी और अपेक्षित समय में कार्रवाई न हो तो उनसे पूछकर फिर खबर बनाई जा सकती है। ‘हिरासत में स्वतंत्र’ शीर्षक का साहित्यिक महत्व ही है। खबर तब होती जब उसके बड़बोले दावों के साथ बताया जाता। इसमें खबर यह भी है कि कपिल मिश्रा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसके दावों पर कुछ नहीं कहा है या कहा है तो वह प्रमुखता से नहीं है।

ठीक है कि प्रधानमंत्री से संपर्क करके उनका पक्ष लेना मुश्किल होगा लेकिन कपिल मिश्रा से पूछा जाना चाहिए था और खबर होनी चाहिए थी कि वे चिराग पासवान की तरह दो टूक बात कर रहे हैं कि नहीं। प्रधानमंत्री से करीबी का पता इस बात से भी चलता है कि उसे उसके नाम से शपथग्रहण समारोह में भाग लेने का निमंत्रण था। नरेन्द्र मोदी के शपथग्रहण में आमंत्रितों में (2014) में नवाज शरीफ भी थे। इसलिए स्वतंत्र मिश्रा को भी बुलाए जाने का महत्व है और वह इंफ्लूएंसर से ऊपर की चीज हो सकता है। उसके काम और दावों के लिए उसे हिरासत में लिया गया है तो यह खबर नहीं है। पुलिस की मजबूरी थी कि उसे हिरासत में लेना पड़ा और खबर यही होनी चाहिए थी।

देशबन्धु का शीर्षक यही है और इसलिए यह खबर लीड जैसी है। द हिन्दू की खबर का शीर्षक है, सीजेपी आंदोलन के बाद एफआईआर में दिल्ली पुलिस ने हमलावर पर नए आरोप लगाए। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का शीर्षक है, सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हमले का मामला : ‘सिर फोड़ने’ का दावा करने वाला आदमी हिरासत में लिया गया। बुलंदशहर डेटलाइन से राहुल सिंह की खबर में स्वतंत्र भारद्वाज को एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर कहा गया है। खबर का हाइलाइट किया हुआ हिस्सा है, ताज़ा घटनाक्रम में, भारद्वाज के ख़िलाफ़ प़़ॉस्को एक्ट के तहत एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। सूत्रों के मुताबिक, पहले से दर्ज एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स के तो शीर्षक में ही कहा गया है, सीजेपी के विरोध के बाद दक्षिणपंथी कंटेंट क्रिएटर हमले के आरोप में गिरफ्तार। कहने की जरूरत नहीं है कि आम आदमी पार्टी के नेता और  पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन को पहले भी भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले साबित नहीं हुए, उन्हें रिहा करने पड़ा। फिर भी उन्हें तीसरे मामले में गिरफ्तार किया गया था। सच यह है कि तीसरी बार गिरफ्तार किए जाने पर भी उनकी गिरफ्तारी की खबर को अखबारों ने महत्व नहीं दिया और फिर जमानत मिलने की भी खबर कल सिंगल कॉलम में निपट गई। वह भी तब जब हिन्दुस्तान टाइम्स डॉट कॉम के अनुसार, दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार के एक मामले में ज़मानत दे दी।

यह मामला उनके दिल्ली के जल मंत्री रहने के दौरान का है। अदालत ने कहा कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बिना पर्याप्त सबूत जुटाए “जल्दबाज़ी में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया”। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने अपने आदेश में कहा कि मंत्री रहते हुए जैन के कुछ फैसलों पर “सवाल उठते हैं” और “हो सकता है कि वे बेगुनाह न हों”, लेकिन एसीबी ने अब तक जो सबूत जुटाए हैं, वे “काफ़ी नहीं” हैं। जाहिर है, सत्येन्द्र जैन को बार-बार फंसाया जाना खबर है तो स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार नहीं किया जाना खबर थी। दोनों को कब कितना महत्व मिला बताता है कि मीडिया क्या कर रहा है।  

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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