अख़बार-पत्रिकाओं की घटती स्टॉल बिक्री के दौर में इंडिया टुडे समूह की कंपनी लिविंग मीडिया इंडिया लिमिटेड ने वितरण का जो नया रास्ता निकाला, उसे अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है।
कंपनी की पहल ‘मैगज़ीन इन मिनट्स’ को WAN-IFRA प्रिंट एंड सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड्स 2026 में सप्लाई चेन इनोवेटर अवॉर्ड मिला है।
पुरस्कार नीदरलैंड्स के रॉटरडैम में वर्ल्ड प्रिंटर्स समिट और डिस्ट्रीप्रेस कांग्रेस के दौरान दिया गया, जहां प्रिंट और वितरण से जुड़े 300 से ज़्यादा विशेषज्ञ मौजूद थे। कंपनी की ओर से CEO और पब्लिशर मनोज शर्मा तथा सेल्स एंड डिस्ट्रीब्यूशन के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट दीपक भट्ट ने सम्मान ग्रहण किया।
इस पहल में क्विक-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म ब्लिंकिट के ज़रिये पत्रिकाएं सीधे पाठकों के घर पहुंचाई जाती हैं। कंपनी के मुताबिक शुरुआत में डिलीवरी 10–12 मिनट में होती थी और अब आम तौर पर 10–15 मिनट लगते हैं। सेवा 100 से ज़्यादा शहरों में चल रही है और मासिक सर्कुलेशन का 10 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा अब इसी रास्ते से आ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रयोग कोविड के बाद पाठकों की बदली आदतों और न्यूज़स्टैंड पर घटती भीड़ के जवाब में शुरू हुआ। हर अंक की बिक्री का समय सीमित होता है और क्विक-कॉमर्स स्थानीय डार्क स्टोर के स्टॉक पर टिका रहता है, इसलिए कंपनी को लॉन्च, दोबारा स्टॉक भरने और मांग के अनुमान की पूरी प्रक्रिया बदलनी पड़ी — ऊपर से तय बंटवारे की जगह अब इलाके-वार मांग का आकलन होता है।
मनोज शर्मा ने इस सम्मान को अपनी टीमों की सोच और लगन की पहचान बताया। उनका कहना था कि असली उपलब्धि सिर्फ़ 10 मिनट की डिलीवरी नहीं है।
कंपनी के मुताबिक इस रास्ते से वह युवा पाठकों तक पहुंचना, प्रीमियम और खास विषयों की पत्रिकाएं लाना और पाठकों से सीधी कमाई वाले उत्पाद बनाना चाहती है। पारंपरिक न्यूज़स्टैंड भी वितरण नेटवर्क का हिस्सा बने रहेंगे।
प्रिंट के लिए यह राहत की खबर है, पर एक सवाल भी छोड़ती है: दशकों से हॉकरों और स्टॉल वालों के जिस नेटवर्क पर पत्रिकाएं टिकी रहीं, उसका हिस्सा आगे कितना बचेगा। सर्कुलेशन का दस प्रतिशत से ज़्यादा ऐप के रास्ते आना बताता है कि पाठक किस ओर बढ़ रहा है।


