नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने यहां प्रसारित होने वाली सामग्री को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। सरकार ने कहा है कि ऐसी जानकारी, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, उसके प्रसार को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म उचित कदम उठाएं। इसमें फर्जी, भ्रामक, एडिट की गई और संदर्भ से हटाकर पेश की गई सामग्री शामिल है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि मौजूदा सार्वजनिक घटनाओं और घटनाक्रमों से जुड़ी कुछ सामग्री सोशल मीडिया पर इस तरह प्रसारित की जा रही है, जिससे भ्रम फैल सकता है। मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म्स से ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसके प्रसार पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।
पुरानी तस्वीरों और एडिटेड वीडियो पर नजर रखने की सलाह
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों से पुरानी और संग्रहित तस्वीरों तथा वीडियो को मौजूदा घटनाओं का बताकर साझा किए जाने के मामलों पर ध्यान देने को कहा है। इसके अलावा डिजिटल रूप से बदली गई या कृत्रिम तरीके से तैयार की गई ऑडियो-विजुअल सामग्री, सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाली सामग्री तथा हिंसा या गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली पोस्ट की पहचान करने की सलाह दी गई है।
एडवाइजरी के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत निर्धारित श्रेणियों में आने वाली गैरकानूनी सामग्री की पहचान करने, उसे रोकने और उसके प्रसार को बढ़ावा नहीं देने के लिए उचित उपाय करने चाहिए।
सरकारी एजेंसियों की शिकायतों पर प्राथमिकता से कार्रवाई
मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों से कहा है कि वे सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की आशंका वाली सामग्री के संबंध में अधिकृत सरकारी एजेंसियों से मिलने वाली शिकायतों और रिपोर्टों को प्राथमिकता दें। ऐसी सामग्री पर लागू कानूनों के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार ने यह भी कहा है कि भ्रामक, बदली गई या कृत्रिम रूप से तैयार की गई सामग्री की पहचान कर उस पर उचित लेबल लगाया जाए और जरूरी संदर्भ उपलब्ध कराया जाए। खास तौर पर ऐसी सामग्री पर ध्यान देने को कहा गया है, जिसे किसी मौजूदा घटना का वास्तविक दृश्य बताकर पेश किया जा रहा हो।
सामग्री साझा करने से पहले सत्यता जांचने की सलाह
एडवाइजरी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने के लिए भी कहा गया है। इसके तहत लोगों को किसी तस्वीर, वीडियो या जानकारी को साझा अथवा फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता, स्रोत और तारीख की जांच करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा कंपनियों को कानून के मुताबिक जांच एजेंसियों के साथ समय पर सहयोग करने की सलाह दी गई है। यह सहयोग सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में निर्धारित समयसीमा और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।
शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने को कहा
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी निगरानी, शिकायतों को आगे भेजने और शिकायत निवारण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने तथा उन्हें मजबूत बनाने की सलाह भी दी है। इसका उद्देश्य ऐसी सामग्री पर जल्द कार्रवाई करना है, जिससे बड़े पैमाने पर भ्रम, दहशत, हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो।
मंत्रालय ने कहा है कि इस एडवाइजरी का उद्देश्य जिम्मेदारी के साथ सूचनाओं का प्रसार सुनिश्चित करना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है। साथ ही, इसमें वैध अभिव्यक्ति और जायज सार्वजनिक विमर्श का सम्मान करने की बात भी कही गई है।


