शनिवार को दिल्ली में खबर जुटाना ही जोखिम का काम बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान दिल्ली पुलिस की धरपकड़ में कई पत्रकार भी उठा लिए गए, कुछ तो प्रदर्शन स्थल से किलोमीटरों दूर।
क्विंट के रिपोर्टर सार्थक जायसवाल को चाणक्यपुरी थाने ले जाया गया। स्क्रॉल के आयुष तिवारी को ITO के पास हिरासत में लिया गया, जबकि संस्थान का कहना है कि वे प्रदर्शन स्थल पर थे ही नहीं और प्रेस कार्ड दिखा रहे थे। स्क्रॉल के राजनीतिक संपादक शोएब दानियाल को सीआर पार्क के पास रोका गया।
नवभारत टाइम्स के ऋतिक जोशी और राहुल चारस, रिपोर्टर टीवी की रोशनी राजन और फ़रसा, और स्वतंत्र पत्रकार सृष्टि खन्ना व प्रशांत पुंडर के भी हिरासत में लिए जाने की बात रिपोर्ट में है। कंटेंट क्रिएटर काव्या कर्नाटक को दफ़्तर से निकलने के कुछ ही मिनट बाद बस में बैठा लिया गया।
न्यूज़लॉन्ड्री के तीन रिपोर्टरों को करीब 30 लोगों के साथ एक बस में भरा गया और उनके दफ़्तरी फ़ोन ज़ब्त किए गए। रिपोर्ट के अनुसार उनसे पुलिस ने कहा कि “कोई मीडिया नहीं है”। आयुष तिवारी के मुताबिक एक पुलिसकर्मी ने उनका प्रेस आईडी यह कहकर खारिज कर दिया कि हर कोई ख़ुद को मीडिया बताता है।
न्यूज़लॉन्ड्री और नवभारत टाइम्स के पत्रकार बाद में छोड़ दिए गए और आयुष तिवारी ने भी हिरासत से बाहर होने की जानकारी दी।
पत्रकारों की सुरक्षा पर काम करने वाली संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने दिल्ली पुलिस से सभी हिरासत में लिए गए पत्रकारों को छोड़ने, उनके उपकरण लौटाने, मारपीट की शिकायतों की जांच कराने और कवरेज में दखल न देने की मांग की है।
यह सब तब हुआ जब मध्य दिल्ली में शुक्रवार रात 10 बजे से 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया था और पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति पहले ही ठुकरा दी थी। सवाल वही पुराना है, प्रेस कार्ड गले में लटकाकर भी अगर रिपोर्टर बस में ठूंसा जाए, तो कवरेज करेगा कौन?


