मीडिया जगत से दो दुखद खबरें एक साथ आई हैं। आकाशवाणी रायपुर के प्रमुख विकल्प शुक्ला और प्रभात खबर में लंबे समय तक एचआर की कमान संभालने वाले अंजय शर्मा का असामयिक निधन हो गया है। दोनों के जाने से उनके साथियों और परिचितों में शोक की लहर है।
विकल्प शुक्ला: 30 साल पुराना रिश्ता टूटा
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे ने फेसबुक पर विकल्प शुक्ला को याद करते हुए लिखा कि उनकी पत्रकारिता की शुरुआत से ही विकल्प भाई से संबंध था और 30 सालों में उन्होंने बहुत स्नेह और प्रेम दिया। प्रवीण दुबे के मुताबिक आखिरी मुलाकात IBC ज्वाइन करने के बाद हुई थी, जब वे रायपुर में मीटिंग से लौट रहे थे और एयरपोर्ट पर दोनों मिले थे।
भावुक प्रवीण दुबे ने लिखा, “आकाशवाणी रायपुर के हेड विकल्प शुक्ला के असमय चले जाने से सदमे में हूं… एक कार्यक्रम में हूं… बार बार स्क्रीन के सामने आना पड़ रहा है… रो भी नहीं सकता भाई… जाओ, प्रभु अपने श्री चरणों में स्थान दें…”
अंजय शर्मा: “सबसे बेहतरीन एचआर हेड”
उधर प्रभात खबर के पूर्व प्रधान संपादक हरिवंश ने अपने पुराने सहकर्मी अंजय शर्मा के निधन पर शोक जताया। उन्होंने लिखा कि अंजय शर्मा व्यवहार कुशल, कर्मठ और एचआर के काम में दक्ष थे, और उनका असमय जाना मन को गहरे दुख से भर गया। हरिवंश ने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
हरिवंश की पोस्ट पर प्रभात खबर में काम कर चुके पत्रकारों ने भी श्रद्धांजलि दी। पंकज नाम के एक यूजर ने लिखा कि उन्होंने अपने प्रभात खबर के कार्यकाल में अंजय शर्मा को सबसे बेहतरीन एचआर हेड के रूप में देखा और उन्हें हमेशा खुश ही देखा।
भड़ास4मीडिया परिवार की ओर से दोनों दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि।
अलविदा विकल्प शुक्ला… इतनी जल्दी क्या थी विदाई लेने की!
संजीव शर्मा-
कुछ लोग सिर्फ अपने पद और काम से नहीं, बल्कि अपने सहज व्यवहार, मिलनसार स्वभाव और आत्मीयता से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। मेरे मित्र,सहयोगी,सीनियर और सलाहकार विकल्प जी ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे। अभी पखवाड़े भर पहले ही हमने रेडियो पर कुछ नए प्रोजेक्ट को लेकर घंटे भर चर्चा की थी और आप,मैं, मानस और Yogesh Pandya भाई के साथ एक्सक्लुसिव ग्रुप भी बनाया था..अब वह कोना सूना रहेगा।
विकल्प शुक्ला
आकाशवाणी रायपुर में उपनिदेशक और भारतीय सूचना सेवा के 1993 बैच के अधिकारी विकल्प शुक्ला के असमय निधन की खबर मन को गहरे तक उदास कर गई। अभी तो बहुत कुछ कहना-सुनना बाकी था, बहुत सी मुलाकातें बाकी थीं। लेकिन जिंदगी कभी-कभी बिना कोई मौका दिए ऐसा विराम लगा देती है, जिसे स्वीकार करना बेहद कठिन होता है।
दिल का दौरा कितना निर्मम होता है! पीठ में दर्द की शिकायत से शुरू हुई परेशानी ने देखते ही देखते एक हंसते-मुस्कुराते, ऊर्जावान इंसान को हमसे छीन लिया। यह विश्वास करना मुश्किल है कि जो व्यक्ति कल तक अपने काम और अपनी सहज उपस्थिति से आसपास के माहौल को जीवंत बनाए हुए था, वह आज हमारे बीच नहीं है।
दिल्ली से भोपाल और फिर रायपुर तक फैली उनकी सेवायात्रा में अनेक साथी जुड़े। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की विभिन्न मीडिया इकाइयों मसलन पीआईबी, दूरदर्शन और आकाशवाणी में काम करते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। छत्तीसगढ़ के मीडिया जगत में उनका परिचय केवल एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे सहयोगी के रूप में था, जिनसे सहजता से बात की जा सकती थी और जिन पर भरोसा किया जा सकता था।
लेकिन आज सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की है कि उनके जाने से एक परिवार की दुनिया उजड़ गई। भाभी और दो बेटियों के लिए यह क्षति शब्दों से परे है। जिस पिता और जीवनसाथी का साथ जीवन के हर मोड़ पर संबल बनता है, उसका अचानक छूट जाना कितना असहनीय होता है, इसे महसूस भर किया जा सकता है।
विकल्प जी, आपका यूं चले जाना बहुत अखरता है। सरकारी सेवा में पद और जिम्मेदारियां पीछे छूट जाती हैं, लेकिन इंसान का व्यवहार, उसकी आत्मीयता और लोगों के जीवन में छोड़ी गई यादें हमेशा जीवित रहती हैं।
विकल्प जी, कुछ विदाइयां ऐसी होती हैं, जिन्हें शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता और कुछ रिक्तताएं ऐसी होती हैं, जिन्हें समय भी नहीं भर पाता। आपका यूं अचानक चले जाना एक ऐसी ही अपूरणीय क्षति है।
आपकी स्मृतियां, आपका सहज व्यवहार और आपकी आत्मीयता उन सभी के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी, जिन्हें आपके साथ काम करने और आपको जानने का अवसर मिला।
ईश्वर आपकी पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और आपके परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
आपकी स्मृतियां हमारे बीच रहेंगी।
भावभीनी श्रद्धांजलि! वरिष्ठ पत्रकार विकल्प रंजन शुक्ला जी के निधन की खबर ने स्तब्ध कर दिया है। उनका यूँ अचानक चले जाना छत्तीसगढ़ के मीडिया जगत के लिए बड़ी अपूरणीय क्षति है।
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आखिरी मुलाकात में उन्हें गाना गाते हुए कैमरे में कैद किया था। तब कहाँ पता था कि यह उनकी आवाज़ को सहेजने वाली आखिरी याद बन जाएगी।
आपकी मुस्कुराहट और आपकी आवाज़ हमेशा याद आएगी भईया।