Connect with us

Hi, what are you looking for?

सुख-दुख

दैनिक भास्कर बिहार से 11 साल बाद SIT हेड मनीष मिश्रा की यूपी वापसी!

Bearded man in a red plaid shirt stands at a marble reception desk with a sun logo in Hindi signage behind him.

मनीष मिश्रा-

बिहार से विदाई…बिहार से जा रहा हूं… लेकिन बिहार को छोड़कर नहीं..!

ठीक 11 साल पहले, 2015 में जब यूपी से बिहार आया था, तब मन में एक अजनबी शहर, अनजान लोग और एक अलग दुनिया थी।

आज 11 साल बाद जब बिहार से वापस अपने होम स्टेट यूपी जा रहा हूं, तो वही दर्द है… लेकिन इस बार दर्द कहीं ज्यादा गहरा है।

क्योंकि इन 11 सालों में बिहार सिर्फ मेरा वर्कप्लेस नहीं रहा… मेरा घर बन गया।

सच कहूं तो जिस बिहार का नाम और यहां की क्राइम की कहानियां सुनकर खौफ महसूस होता था, उसी बिहार में आकर मैंने क्रिमिनलों के साथ आंख में आंख डालकर खेलना सीखा।

मेरे अंदर क्रिमिनलों से लड़ने की हिम्मत, सच के पीछे खड़े रहने का साहस और जोखिम उठाने की ताकत इस मिट्टी ने दी है। इन 11 सालों में मैंने बिहार को बहुत करीब से देखा है।

यहां अच्छाई भी है, बुराई भी है। हर जगह की तरह यहां भी सब कुछ है, लेकिन मैंने हमेशा अच्छे लोगों के लिए बुरे लोगों से लड़ना चुना। और इस सफर में बिहार के लोगों ने मुझे जो प्यार दिया, शायद वह प्यार मेरे अपने भी मुझे न दे पाते।

यहां मुझे सिर्फ पहचान नहीं मिली…पूरा एक परिवार मिला। ऐसे रिश्ते मिले, जिन्हें खून के रिश्तों की जरूरत नहीं थी। ऐसे लोग मिले, जिन्होंने मेरे लिए बिना किसी मतलब के खड़े होना सीखा और मुझे अपना माना।

बिहार की मिट्टी ने मुझे मेरी कल्पना से कहीं ज्यादा दिया है। नाम दिया, सम्मान दिया, संघर्ष दिया, पहचान दी और सबसे बढ़कर लोगों का प्यार दिया।

आज वर्कप्लेस बदल रहा है, लेकिन रिश्ता नहीं। ट्रांसफर होकर मैं बिहार से जा रहा हूं, लेकिन बिहार मेरे भीतर हमेशा हमेशा रहेगा। यहां की मिट्टी मेरे माथे के चंदन की तरह हमेशा मेरे साथ मेरे मस्तक पर रहेगी।

बिहार की इस पवन मिट्टी का मुझ पर बहुत कर्ज है…और शायद यह कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता। हां, अब मेरा ठिकाना यूपी होगा, लेकिन बिहार आने के लिए मुझे किसी बुलावे की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मैं उसी अधिकार से बिहार आऊंगा, जिस अधिकार से पिछले 11 साल यहां रहा हूं। क्योंकि कुछ जगहें सिर्फ नक्शे पर नहीं होतीं…वे इंसान के दिल में बस जाती हैं।

मेरे लिए बिहार अब एक जगह नहीं है। बिहार मेरी जिंदगी का एक ऐसा अध्याय है, जिसे मैं कभी खत्म नहीं करना चाहता।

बस जगह बदल रही है…दिल में बिहार की जगह नहीं। क्योंकि बिहार ने जो रिश्ता दिया वह 11 सालों में कमाई मेरी लाइफ की सबसे बड़ी पूंजी है।

बिहार… तुम्हारा कर्जदार हूं। हमेशा रहूंगा। जिंदगी के साथ और जिंदगी के बाद भी..! जय बिहार..।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन