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सुख-दुख

प्रभात खबर के पत्रकार प्रशांत चतुर्वेदी का निधन!

ओमप्रकाश अश्क-

साल 2000 की बात है। कोलकाता से मेरे नेतृत्व में प्रभात खबर का प्रकाशन शुरू हो रहा था। पेशे से शिक्षक और मेरे आत्मीय आदरणीय ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने अपने बड़े बेटे को अखबार में नौकरी के लिए कहा। उन दिनों नये बच्चों को मौका देने का चलन था।

चार-पांच बच्चे रखे गए। उनमें उनका बेटा प्रशांत Prashant Chaturvedi भी था। अपनी मेहनत, लगन और पारिवारिक संस्कार की बदौलत वह मेरा चहेता बन गया।

Close-up of a man with short dark hair wearing a gray shirt and plaid vest, looking at the camera in an indoor setting.
प्रशांत चतुर्वेदी

मेरे प्रभात खबर छोड़ने के बाद किसी बात को लेकर उसने भी नौकरी छोड़ दी। मुझे बताया तो अपने मित्र संपादक भारतीय बसंत कुमार से कह कर मैंने दैनिक जागरण के धनबाद संस्करण में नौकरी दिला दी। वहां भी अपने काम और व्यवहार से वह संपादक का चहेता बन गया।

हालांकि उसकी क्षमता और योग्यता को देखते हुए प्रभात खबर के कोलकाता संस्करण में वापसी का मौका मिल गया। तब से वह प्रभात खबर के साथ ही था।

कल प्रभात खबर के संपादक कौशल किशोर त्रिवेदी का वाट्सऐप मैसेज मिला- प्रशांत नहीं रहा। निधन की वजह भी उन्होंने बताई। सन्न रह गया। कुछ सूझ नहीं रहा था। उसके पिता Omprakash Chaturvedi जी से बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। सोचा, अंतिम संस्कार के बाद फोन करूंगा।

आज वह पंचतत्व में विलीन हो जाएगा। आंखों से उसकी सौम्य तस्वीर उतर नहीं रही। फेसबुक पर जिन मित्रों ने तस्वीर लगा कर उसे याद किया, सब आंखों से गुजरा। पर, हर दिन हजार -डेढ़ हजार शब्द लिखने की आदत के बावजूद रिएक्ट करने के लिए शब्दों का टोटा पड़ गया।

ईश्वर इस दुख को सहन करने की परिवार को शक्ति प्रदान करें। बहुत याद आओगे प्रशांत! अश्रु पूरित श्रद्धांजलि।

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