Connect with us

Hi, what are you looking for?

वेब-सिनेमा

सुप्रीम कोर्ट को जनता के पत्रकार बनने से समस्या है!

Newspaper headline: 'If every citizen becomes a journalist, it will create problems for everyone: SC'.

दिल्ली में 10-11 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हर नागरिक पत्रकार बन जाएगा, तो इससे समस्या पैदा होगी। अदालत में यह मामला उन याचिकाओं के साथ सुना जा रहा है, जिनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने, वकीलों और पत्रकारों पर हमले तथा प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों का पालन नहीं किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम फैसले का अब विरोध भी हो रहा है, नीचे पढ़ें…


अमिताभ श्रीवास्तव-

वाह! क्या बात है! क्या तर्क है देश की सबसे बडी अदालत का और माननीय चीफ़ जस्टिस का!

बस अब सुप्रीम कोर्ट के लिये यही कहना बचा है कि अगर देश का हर नागरिक पढ़ा-लिखा हो गया तो सबके लिये बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी, नईं?

ये कहाँ आ गये हम! सिटिज़न जर्नलिस्ट का कॉंसेप्ट अखबारों में और समाचार चैनलों में नया नहीं है। दैनिक जागरण ने बहुत पहले संवाद सूत्र नाम की एक रिपोर्टर कैटेगरी शुरू की थी जहाँ किसी शहर के मोहल्ले के आम लोग, छोटे कारोबारी, दुकानदार वगैरह भी अपने इलाक़े की घटनाओं के बारे में रिपोर्ट कर देते थे।

टीवी चैनलों ने भी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व से पहले के दौर में अंशकालिक संवाददाताओं यानी स्ट्रिंगर्स के अलावा सिटिज़न जर्नलिस्ट की कैटेगरी के तहत आम नागरिकों, प्रोफेशनल्स, आरडब्लूए सदस्यों आदि को रिपोर्टिंग का मौका दिया है। इससे दर्शक और पाठक के साथ मीडिया संस्थान का कनेक्ट बनता था और भरोसा बढ़ता था जिसका असर साख, रेटिंग और रेवेन्यू तीनों पर दिखता था। हमने खुद यह प्रयोग किया है है जो कामयाब और लोकप्रिय रहा था। लेकिन इसका मतलब अपनी मेन रिपोर्टिंग टीम को निकम्मा और आलसी बना देना नहीं था ।

एक ज़माना था जब सुप्रीम कोर्ट एक पोस्टकार्ड पर लिखी शिकायत को भी जनहित याचिका की तरह स्वीकार कर लेता था। और एक आज का दौर है जहाँ जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों की भौंहें तिरछी हो जाती हैं।


मनोज अभिज्ञान-

Typography-heavy news hero: large quote about citizen journalists and a paragraph about October protests; Moneycontrol News. Photo shows a domed red-brick government building framed by trees.

सुप्रीम कोर्ट को जनता के पत्रकार बनने से समस्या है!

हर सिटिजन जर्नलिस्ट बन जाएगा तो प्रॉब्लम होगी! बिल्कुल होगी। जब हर हाथ में स्मार्टफोन, हर जेब में कैमरा और हर अन्याय का लाइव ब्रॉडकास्ट होगा, तो पावरफुल लोगों का नैरेटिव कौन कंट्रोल करेगा? न्यूज़रूम का मोनोपॉली बिजनेस कैसे चलेगा? सत्ता के पीआर और कॉरपोरेट मीडिया का इकोसिस्टम कैसे बचेगा?

फेक न्यूज़ की समस्या वास्तविक है, लेकिन उसका सॉल्यूशन सिटिजन जर्नलिज़्म को शक की नजर से देखना नहीं है। बड़े मीडिया हाउस प्रोपेगैंडा ही तो चलाते हैं!

सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट को जनता के पत्रकार बनने से होने वाली प्रॉब्लम की चिंता है या उस प्रॉब्लम की, जो जनता के सवाल पूछने से सत्ता को होती है?

डेमोक्रेसी में जनता सिर्फ वोटर नहीं, सत्ता की वॉचडॉग भी है। उसे हर पाँच साल में वोट डालने वाला सिटिजन और बाकी समय चुप रहने वाला ऑडियंस मत समझिए!

कैमरा जनता के हाथ में आया है, तो सत्ता की स्क्रिप्ट बिगड़ेगी ही। यही डेमोक्रेसी का असली टेस्ट है!

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन