सोशल मीडिया पर खबरें चलाने वाले छोटे-बड़े डिजिटल संस्थानों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से एक अहम फैसला आया है। अदालत ने हरियाणा पुलिस की सूचना पर ब्लॉक किए गए एक न्यूज़ कंपनी के फेसबुक पेज को बहाल करने का आदेश दिया है और साफ़ कहा है कि किसी का कंटेंट रुकवाने की सूचना जब प्लेटफ़ॉर्म को भेजी जाए, तो उसकी कॉपी उस यूज़र को भी दी जाए।
लीगल न्यूज़ वेबसाइट बार एंड बेंच ने 19 अक्टूबर को इस फैसले की जानकारी दी। फैसला जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने 5 अक्टूबर को सुनाया था। याचिका हरियाणा 24 न्यूज़ नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की थी, जिसका फेसबुक पेज यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक (SP) के ज़रिए भेजी गई सूचना के बाद बंद कर दिया गया था।
पुलिस का कहना था कि कंपनी का एक निदेशक जबरन वसूली के एक मामले में आरोपी है और इस पेज का इस्तेमाल पीड़ित को डराने के लिए किया गया। लेकिन अदालत के सामने असल सवाल यह था कि पेज बंद कराने का तरीका कानून के मुताबिक था या नहीं।
हाईकोर्ट ने माना कि आईटी नियम, 2021 के नियम 3(2) में प्रभावित यूज़र को सूचित करने की बात साफ़ शब्दों में नहीं लिखी है। मगर प्राकृतिक न्याय का तकाज़ा है कि जिसकी सामग्री पर कार्रवाई हो रही है, उसे इसकी ख़बर हो। इसलिए अदालत ने यह शर्त नियम में पढ़ ली कि इंटरमीडियरी को सूचना भेजते समय उसकी प्रति यूज़र को भी सौंपी जाए।
दूसरा अहम बिंदु अफ़सर के पद का है। अदालत ने कहा कि ऐसी सूचना भेजने वाला अधिकारी डीआईजी से नीचे का नहीं हो सकता। SP के पास यह अधिकार नहीं था और राज्य सरकार ऐसा कोई प्रावधान नहीं दिखा सकी जिससे यह अधिकार SP को सौंपा गया हो।
चूंकि याचिकाकर्ता को सूचना की कॉपी ही नहीं मिली थी, इसलिए अदालत ने मामले को फेसबुक की शिकायत निवारण व्यवस्था के पास भेजने से भी इनकार कर दिया और उसे बेमानी बताया। फैसले के मुताबिक आगे अगर अधिकारियों को पेज पर कोई गैरकानूनी सामग्री दिखती है और वे सूचना भेजते हैं, तो प्लेटफ़ॉर्म को भेजने के तुरंत बाद उसकी कॉपी याचिकाकर्ता को देनी होगी।
पिछले महीनों में कई डिजिटल पत्रकारों और पोर्टलों के पेज बिना सूचना बंद होने की शिकायतें आती रही हैं। ऐसे मामलों में यह फैसला एक कानूनी हवाला बन सकता है।

