यशवंत सिंह-
बीस बाईस साल पहले जब भड़ास ब्लॉग शुरू किया था तो इस कम्युनिटी ब्लॉग के हज़ार से ज़्यादा मेम्बर हुआ करते थे और सबको डायरेक्ट पोस्टिंग का अधिकार था। हिंदी ब्लॉगिंग में जब वर्चस्व की लड़ाई शुरू हुई तो दे गाली ले गाली का क्रम सालों साल चला। हम भड़ासी शांति काल में आपस में लड़ते थे और युद्ध काल में मिलकर “दुश्मन” की मतरिया बहिनिया करते थे।
हम भड़ासियों का ख़ौफ़ इस क़दर था कि शरीफ लोग न पंगा लेते थे न दोस्त बनते थे। न इनसे दुश्मनी अच्छी न इनकी दोस्ती टाइप। इतने बदनाम थे हम लोग। हम टिपिकल गाँव के देसज़ लोगों के लिए एक्सप्रेशन का अपनी भाषा में जो मंच मिला था तो लगता था क्या क्या न कह लिख दें! मोहल्ला ब्लॉग वाले Avinash Das भाई तो आज भी हमें अपना दुश्मन मानते हैं जबकि मेरे मन में उनके प्रति कोई दुर्भावना कोई मैल नहीं है।
तो हिंदी ब्लॉगिंग के उस शुरुआती दौर वाले युद्ध से हम लोगों की ट्रेनिंग हुई। दारू पीकर गाली लिखते थे और सुबह होश में आने पर डिलीट करते थे। न्यूज़ चैनलों की नाईट शिफ्ट के लोग इंतज़ार करते थे कि यशवंत आज पीकर किसे गाली लिखेगा और किस अंदाज़ में लिखेगा और कब लिखेगा।
खैर, उस दौर की लड़ाइयों से हमने सीखा कि युद्ध गाली ट्रोलिंग से ख़ुद का व्यक्तित्व नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। अपना सब काम छोड़कर हम दूसरे की कमी ढूँढते तलाशते लिखते हैं और बदले में क्या मिलता है? दूसरों को नीचा दिखाने का सुख। इसे ही पर पीड़ा का सुख कहा जाता है और एक शब्द में परपीड़क।
आज जब थोड़ा आध्यात्मिक दृष्टि मिली है तो लगता है परपीड़क/सैडिस्ट होने से घटिया कोई काम हो ही नहीं सकता। सबका इलाज प्रकृति ने बांधा हुआ है। प्रकृति के न्याय का इंतज़ार करिए। सबको एक दिन उसके पहियों तले आकर जीवन की ट्रेनिंग लेनी है और क्षुद्र सोच की जगह दिव्य दृष्टि हासिल करनी है। गुस्सा मुझे अब भी आता है और खूब आता है लेकिन एक दिन गुस्सा भी झर जाएगा। हम जब मान अपमान से भरे होते हैं, नियंत्रण की चाह रखते हैं तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं है, अगर ये मान लें और इसे व्यवहार में उतार लें तो गुस्सा न आयेगा। देह पात्र में सिर्फ करुणा लबालब भर जाएगा।
मुझे कुछ लोग किसी एक लड़के द्वारा मेरे खिलाफ लिखे जा रहे पोस्ट का स्क्रीनशॉट भेज रहे हैं और कह रहे हैं देखिए आपके खिलाफ ये क्या लिख रहा है। इतने बड़े संसार में सिर्फ एक आदमी मेरे खिलाफ लिख रहा है, ये बड़े दुख की बात है। मोदी योगी अखिलेश मायावती राहुल के खिलाफ तो न जाने कितने लोग कितनी तरह से दिन भर लिखते रहते हैं। हमारे चाचा Jagdish Singh जी को देख लीजिए। राहुल को तो रोज ऐसे गरियाते हैं कि राहुल अगर दिल लगाकर पढ़ लें तो कानों आँखों से खून निकल जाए। नेता काफ़ी कुछ संत टाइप हो जाते हैं। वे सम्पूर्ण इम्युनिटी हासिल कर चुके होते हैं। कुछ भी कहो लिखो, कोई फ़रक नहीं पड़ता।
हाँ सत्ता वाले नेता बीच बीच में पुलिस से अपने प्रचंड आलोचकों का इलाज कराते रहते हैं लेकिन ये सुख विपक्षियों को हासिल नहीं है और वे दुश्मन की लिस्ट बनाकर ख़ुद के सत्ता में आने का इंतज़ार करते हैं। जो पूर्ण आध्यात्मिक व्यक्ति होता है वह मान अपमान गाली विरोध घृणा मिलने पर विचलित नहीं होता। सहज भाव से आगे बढ़ जाता है। वह न स्वीकारता है न ठुकराता है। वह देने वाले के पास ही छोड़ देता है। गांधी जी जैसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ संघी आजतक ज़हर उगलते रहते हैं। बुद्ध को भिक्षा में कभी गाली कभी पत्थर कंकड़ मिलते थे। पैगंबर मोहम्मद साहब को भी उनके समय के कुछ लोग बुरी तरह परेशान करते थे अपमानित करते थे पत्थर फेंकते थे।
बुद्ध, गाँधी, और पैगंबर की कथाओं में एक कॉमन थ्रेड यह है कि बाहरी अपमान उनके भीतर की शांति को हिला नहीं पाता था। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपने उद्देश्य और करुणा में स्थिर हो जाता है, तो शब्द और पत्थर सिर्फ़ बाहरी शोर रह जाते हैं।
उनकी प्रतिक्रिया में अहंकार नहीं, बल्कि करुणा और धैर्य बोलता था। तो अगर कोई मेरे ख़िलाफ़ लिख रहा है, वो भी सिर्फ़ एक आदमी लिख रहा है तो इससे आप लोग इतने परेशान क्यों हैं। मैंने उस बन्दे को ब्लॉक कर चित्त से उतार दिया। वो लगा रहे अपने काम में। मुझे तो अपने काम से फुर्सत नहीं है। दूसरे मेरे बारे में क्या सोचते हैं क्या लिख रहे हैं, इसकी परवाह कतई नहीं करना चाहिए क्योंकि इज्जत बेइज्जत भी संसार समाज के द्वारा दिए गए शब्द हैं। हम लोग ख़ुद को इस संसार इस समाज का आदमी माने कब हैं।
अपुन लोग दूसरे गोला के हैं और एक दिन वहीं चले जाएँगे। नैहरवा हमका न भावे। ये संसार नैहर है। जाना तो सबको एक दिन ससुराल है। मस्त रहिए। स्वस्थ रहिए। क्या कह लिख रहे हैं लोग, ये है सबसे बड़ा रोग। कई लोगों को चुल्ल मची होगी कि आखिर यशवंत के बारे में कौन क्या लिख रहा है तो उनकी आत्मा की शांति के लिए स्क्रीनशॉट नीचे दे रहा हूँ। उस बंदे को फॉलो करिए और मेरे बारे में जो जो ख़राब चीज जानते हों, उसे बता दीजिए क्योंकि उस भाई को इस काम में लगाए रखना है।
उसे अपना कोई काम नहीं करने देना है। वो “ब्रांड यशवंत” की रीच बढ़ाने के काम में लगा हुआ है।
जै जै




