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बढ़त में डिजिटल मीडिया, टीवी विज्ञापन को भारी नुकसान, जानिए वजह!

टेलीविजन विज्ञापन बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। 1 जुलाई से 28 सितंबर 2026 के दौरान टीवी विज्ञापन गतिविधियों में सालाना आधार पर 8.6% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि डिजिटल विज्ञापन गतिविधियां 24.5% बढ़ीं। प्रिंट विज्ञापन गतिविधियां भी पिछले साल के मुकाबले नीचे रहीं, जबकि रेडियो में मामूली बढ़त दर्ज की गई। TAM AdEx के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में डिजिटल विज्ञापन ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया की टीवी रेटिंग पर रोक के बीच टेलीविजन विज्ञापन बाजार में दर्शकों की संख्या और विज्ञापन की कीमत तय करने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

TAM AdEx ने पिछले साल की समान अवधि को 100 का आधार मानकर विज्ञापन गतिविधियों का सूचकांक जारी किया है। इसके मुताबिक, टीवी विज्ञापन गतिविधियों का सूचकांक घटकर 91.4 रह गया। प्रिंट का सूचकांक 94.7 रहा, जबकि रेडियो का सूचकांक बढ़कर 101.1 और डिजिटल का 124.5 पर पहुंच गया। ये आंकड़े विज्ञापन गतिविधियों में बदलाव दर्शाते हैं। इन्हें विज्ञापन दरों या मीडिया कंपनियों की वास्तविक कमाई में हुई वृद्धि अथवा गिरावट के बराबर नहीं माना जा सकता।

टेलीविजन विज्ञापन में गिरावट ऐसे समय दर्ज की गई है, जब BARC की नियमित टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं है। टीवी रेटिंग नीति 2026 के तहत रेटिंग एजेंसियों को रेटिंग तैयार करने या जारी करने से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में पंजीकरण कराना जरूरी है। मंत्रालय ने 2 जुलाई से समाचार और गैर-समाचार, दोनों तरह के टीवी कार्यक्रमों की रेटिंग रोकने का निर्देश दिया था।

ताजा रेटिंग उपलब्ध नहीं होने से टीवी चैनलों के लिए विज्ञापनदाताओं के सामने अपनी मौजूदा दर्शक संख्या और पहुंच साबित करना मुश्किल हो गया है। विज्ञापनदाता आम तौर पर दर्शकों की संख्या, कार्यक्रमों की लोकप्रियता और विज्ञापन अभियान के प्रदर्शन के आधार पर स्लॉट की कीमत तय करते हैं। ऐसे में पुराने आंकड़ों पर निर्भरता बढ़ने से चैनलों के लिए विज्ञापन दरों को सही ठहराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विज्ञापन उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, टीवी अब भी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन विज्ञापनदाता यह जानना चाहते हैं कि उनके खर्च से कितने लोगों तक पहुंच बन रही है। ताजा रेटिंग नहीं होने की स्थिति में विज्ञापन की कीमत तय करने के लिए पुराने दर्शक आंकड़ों, कार्यक्रमों की लोकप्रियता और पिछले अभियानों के नतीजों का सहारा लिया जा रहा है। इससे विज्ञापनदाताओं और चैनलों के बीच दरों को लेकर बातचीत प्रभावित हो सकती है।

TAM AdEx के आंकड़ों के मुताबिक, टीवी विज्ञापन गतिविधियों में खाद्य और पेय पदार्थों की हिस्सेदारी बढ़ी है। पिछले साल इस श्रेणी की हिस्सेदारी 20% थी, जो इस बार बढ़कर 22.7% हो गई। सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी भी 15% से बढ़कर 16.7% पहुंच गई। इसके उलट व्यक्तिगत देखभाल और स्वच्छता से जुड़े उत्पादों की हिस्सेदारी 15.5% से घटकर 14.3% रह गई। घरेलू उत्पादों की हिस्सेदारी भी 11.8% से गिरकर 10.2% पर आ गई।

टीवी विज्ञापन में प्रमुख विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी में भी बदलाव दर्ज किया गया। Reckitt Benckiser (India) 13.6% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहा, हालांकि पिछले साल उसकी हिस्सेदारी 14.7% थी। हिंदुस्तान यूनिलीवर की हिस्सेदारी भी 13.4% से घटकर 11.9% रह गई। दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी पिछले साल के 28.1% से घटकर 25.5% हो गई। Cadbury India की हिस्सेदारी 2% से बढ़कर 3.6% पहुंच गई, जबकि Nestle India ने 2% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पांच विज्ञापनदाताओं में जगह बनाई।

प्रिंट विज्ञापन गतिविधियों का सूचकांक 94.7 रहा। इस माध्यम में विज्ञापन देने वाली प्रमुख श्रेणियों की स्थिति में बदलाव आया है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र, जो पिछले साल 16.7% हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर था, इस बार 13.2% हिस्सेदारी के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया। इसके उलट बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़ी श्रेणी की हिस्सेदारी 13.8% से बढ़कर 18.4% हो गई और यह पहले स्थान पर आ गई।

प्रिंट विज्ञापन में Maruti Suzuki 2.8% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष विज्ञापनदाता बना रहा। पिछले साल उसकी हिस्सेदारी 3.3% थी। Hero MotoCorp की हिस्सेदारी भी 2.9% से घटकर 1.6% रह गई।

रेडियो विज्ञापन गतिविधियों का सूचकांक 101.1 रहा, जो पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़त दर्शाता है। रेडियो में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 31.7% से बढ़कर 32.8% हो गई। Maruti Suzuki 4.5% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष विज्ञापनदाता रहा, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी 1.5% से बढ़कर 4% पहुंच गई। इसके साथ LIC इस माध्यम में दूसरे स्थान पर आ गया।

डिजिटल विज्ञापन गतिविधियों का सूचकांक 124.5 रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 24.5% की वृद्धि दर्शाता है। इस माध्यम में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 42.4% से बढ़कर 44% हो गई। विज्ञापनदाताओं की सूची में Adobe Software India ने शीर्ष स्थान हासिल किया। उसकी हिस्सेदारी 2% से बढ़कर 4.9% हो गई।

Flipkart 2.4% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। Amazon Online India की हिस्सेदारी 2.7% से घटकर 1.7% रह गई और वह पहले स्थान से खिसककर चौथे स्थान पर पहुंच गया। OpenAI ने 1.5% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पांच डिजिटल विज्ञापनदाताओं में जगह बनाई और इस सूची में Google की जगह ली।

डिजिटल विज्ञापन में बढ़त के बीच यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विज्ञापनदाताओं ने टीवी से अपना बजट निकालकर सीधे डिजिटल माध्यम में लगा दिया है। TAM AdEx के आंकड़े अलग-अलग माध्यमों में विज्ञापन गतिविधियों का तुलनात्मक रुझान बताते हैं, लेकिन बजट के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में स्थानांतरित होने की पुष्टि नहीं करते।

इसी तरह, टीवी विज्ञापन गतिविधियों में 8.6% की गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि चैनलों की कमाई भी उतने ही प्रतिशत घट गई है। विज्ञापन गतिविधियों का सूचकांक विज्ञापनों की संख्या और अन्य संबंधित गतिविधियों में बदलाव दिखाता है, जबकि वास्तविक कमाई विज्ञापन दरों, छूट, अतिरिक्त विज्ञापन स्लॉट और अनुबंधों जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

फिलहाल टीवी विज्ञापन बाजार के सामने दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, विज्ञापन गतिविधियों में आई गिरावट और दूसरी, ताजा दर्शक आंकड़ों की अनुपलब्धता। BARC की रेटिंग बहाल होने से विज्ञापनदाताओं और चैनलों को दर्शकों की पहुंच का आकलन करने तथा विज्ञापन स्लॉट की कीमत तय करने के लिए नया आधार मिल सकता है। हालांकि, रेटिंग दोबारा शुरू होने और उसका बाजार पर पड़ने वाला असर स्पष्ट होने तक टीवी विज्ञापन उद्योग में अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।

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