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उत्तराखंड की अंकिता को 4 साल बाद भी इंसाफ नहीं! उल्टा हिरासत में मां-बाप, राज्यपाल बना रेप का आरोपी, थोड़ी तो शर्म करो सरकार!

नई दिल्ली/उत्तराखंड: अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बावजूद कथित VIP की भूमिका का सवाल अब भी अनसुलझा है। दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद अंकिता के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उनसे मुलाकात कर समर्थन जताया। 15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। परिवार ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की है।

उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। सितंबर 2022 में ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को मई 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लेकिन अंकिता के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या के पीछे जिस कथित VIP का नाम सामने आता रहा है, उसकी भूमिका की सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है।

इसी सवाल को लेकर अंकिता के माता-पिता ने 14 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना शुरू किया। उनकी मांग है कि दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर रोक लगाई जाए और कथित VIP के मामले में चल रही सीबीआई जांच पूरी होने का इंतजार किया जाए।

बेटी के लिए इंसाफ मांगती मां, इंडिया गेट पर छलके आंसू

इंडिया गेट पर धरने के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी अपनी बेटी को याद कर फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनका दर्द इस सवाल के साथ सामने आया कि आखिर उनकी बेटी को पूरा इंसाफ कब मिलेगा? जिस बेटी को खोने का दुख वह चार साल से झेल रही हैं, उसके मामले में एक कथित VIP की भूमिका को लेकर आज भी जवाब का इंतजार है।

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी की मांग है कि कथित VIP के नाम और भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। उनका कहना है कि जब तक सीबीआई की जांच पूरी नहीं होती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए।

14 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी अंकिता के माता-पिता से मिलने इंडिया गेट पहुंचे। उन्होंने परिवार की मांगों का समर्थन किया। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की कि सीबीआई जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति पर आगे कार्रवाई न की जाए।

15 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने हिरासत में लिया

इंडिया गेट पर रातभर धरने के बाद 15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और उनके साथ मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने तड़के करीब चार बजे कार्रवाई की। बाद में अंकिता के माता-पिता को छोड़ दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया। राहुल गांधी ने माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए और कहा कि वे अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रहे थे।

अंकिता के पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति रद्द करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग नहीं माने जाने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। अंकिता की मां ने भी इंसाफ के लिए भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है।

क्या है दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का विवाद?

विवाद की ताजा वजह भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया जाना है। अंकिता के माता-पिता ने गौतम का नाम उस कथित VIP के संदर्भ में लिया है, जिसकी भूमिका की जांच की मांग लंबे समय से उठती रही है।

दिसंबर 2025 में अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर से कथित बातचीत के ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आया। इन रिकॉर्डिंग के आधार पर अंकिता हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका को लेकर नए आरोप लगाए गए। कुछ रिकॉर्डिंग में गौतम और भाजपा के एक अन्य पदाधिकारी का नाम भी कथित VIP के रूप में लिया गया।

हालांकि, इन आरोपों को अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। गौतम ने आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई भी शुरू की है। इसलिए इस मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

18 सितंबर 2022: अंकिता लापता हुईं

पौड़ी गढ़वाल जिले के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी अचानक लापता हो गईं। वह यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित रिजॉर्ट में काम करती थीं। उनके लापता होने के बाद परिवार ने उनकी तलाश शुरू की।

19 से 22 सितंबर 2022: परिवार ने शिकायत की, कार्रवाई में देरी के आरोप लगे

अंकिता के परिवार ने स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया। मामले में शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज करने और पुलिस कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठे। बाद में मामला नियमित पुलिस को सौंपा गया। इस दौरान अंकिता के लापता होने की खबर फैलने के साथ ही लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा।

23 सितंबर 2022: रिजॉर्ट मालिक समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक मैनेजर अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया। पुलकित आर्य भाजपा के तत्कालीन नेता विनोद आर्य का बेटा है।

24 सितंबर 2022: चिल्ला नहर से मिला अंकिता का शव

तलाश अभियान के दौरान अंकिता का शव ऋषिकेश के पास चिल्ला नहर से बरामद हुआ। इसके बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोपियों को कड़ी सजा देने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

सितंबर-अक्टूबर 2022: उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

अंकिता की हत्या के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए। लोगों ने आरोपियों को सख्त सजा देने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित VIP की भूमिका सामने लाने की मांग की। मामले ने महिला सुरक्षा और प्रभावशाली लोगों को बचाए जाने के आरोपों को लेकर भी बहस छेड़ दी।

24 सितंबर 2022: एसआईटी का गठन

राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया। पुलिस की जांच में रिजॉर्ट मालिक और उसके दो कर्मचारियों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।

दिसंबर 2022: आरोपपत्र दाखिल

एसआईटी ने कोटद्वार की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और आरोपियों की भूमिका के आधार पर मुकदमा आगे बढ़ा। कथित VIP की भूमिका को लेकर परिवार और सामाजिक संगठनों के सवाल हालांकि बने रहे।

18 मार्च 2023: तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय

कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ आरोप तय किए। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।

30 मई 2025: तीनों आरोपियों को उम्रकैद

कोटद्वार की अदालत ने अंकिता की हत्या के मामले में पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 47 गवाहों के बयान पेश किए।

इस फैसले से अंकिता की हत्या के मामले में तीनों आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी तय हुई, लेकिन परिवार की मांग थी कि कथित VIP की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

दिसंबर 2025: कथित ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद फिर उठा VIP का सवाल

अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर से कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया। इन रिकॉर्डिंग के आधार पर अंकिता की हत्या से पहले कथित VIP मेहमानों और उनसे जुड़ी मांगों को लेकर आरोप लगाए गए।

इन दावों के बाद उत्तराखंड में फिर विरोध प्रदर्शन हुए। अंकिता के परिवार और सामाजिक संगठनों ने मांग की कि हत्या के मुकदमे में दोषी ठहराए गए तीन लोगों से आगे बढ़कर कथित VIP की भूमिका की भी जांच की जाए। रिकॉर्डिंग में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष अलग विषय हैं।

7 से 9 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री से मुलाकात और सीबीआई जांच की घोषणा

अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश करने की घोषणा की।

परिवार की मांग केवल जांच एजेंसी बदलने तक सीमित नहीं थी। वह चाहता था कि कथित VIP की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश के माध्यम से कराई जाए। परिवार ने इस बात पर असंतोष जताया कि उनकी निगरानी संबंधी मांग पूरी नहीं हुई।

3 फरवरी 2026: कथित VIP के मामले में सीबीआई ने दर्ज किया केस

सीबीआई ने अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित VIP पहलू की जांच के लिए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया। इससे जांच का दायरा उन आरोपों तक भी पहुंचा, जिनके आधार पर परिवार और सामाजिक संगठनों ने लंबे समय से सवाल उठाए थे।

यहां एक अहम बात समझना जरूरी है: अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि दुष्यंत कुमार गौतम को उस मामले में आरोपी घोषित कर दिया गया। उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों और जांच के आधिकारिक निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

18 सितंबर 2026: चौथी बरसी पर फिर सड़कों पर उतरे लोग

अंकिता की हत्या के चार साल पूरे होने के मौके पर उत्तराखंड में सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और आंदोलनकारियों ने कथित VIP का नाम उजागर करने तथा निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। इस दौरान यह सवाल फिर उठा कि तीन दोषियों को सजा मिलने के बाद भी परिवार को कथित VIP के मामले में स्पष्ट जवाब क्यों नहीं मिला है।

12 से 15 अक्टूबर 2026: दुष्यंत गौतम की नियुक्ति से विवाद फिर तेज

दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद अंकिता के माता-पिता ने इस फैसले का विरोध किया। 14 अक्टूबर को उन्होंने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दिया, जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनसे मिलने पहुंचे। 15 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, लेकिन बाद में छोड़ दिया।

अब परिवार ने नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इस घटनाक्रम ने अंकिता हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका और सीबीआई जांच की प्रगति को फिर राष्ट्रीय बहस में ला दिया है।

तीन दोषियों को सजा, लेकिन परिवार के सवाल अब भी कायम

अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। इसके बावजूद परिवार की लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनकी मांग है कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि क्या हत्या के पीछे उन तीन दोषियों के अलावा किसी और की भूमिका थी और कथित VIP से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।

यही इस मामले का सबसे अहम पहलू है। एक ओर अदालत में हत्या के दोषियों को सजा मिल चुकी है, वहीं दूसरी ओर कथित VIP की भूमिका को लेकर परिवार का संदेह और जवाब की मांग बनी हुई है। सीबीआई ने इस पहलू पर मामला दर्ज किया है, लेकिन जांच के अंतिम नतीजे सामने आने तक किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को साबित हुआ तथ्य नहीं कहा जा सकता।

चार साल से संघर्ष कर रहे परिवार को कब मिलेगा पूरा जवाब?

अंकिता की मां का इंडिया गेट पर रोना केवल एक परिवार के निजी दुख की तस्वीर नहीं है। यह उस सवाल को भी सामने लाता है कि गंभीर अपराधों में पीड़ित परिवार को न्यायिक फैसले के बाद भी यदि कुछ सवाल अनुत्तरित लगते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब कैसे मिलेगा।

उत्तराखंड में अंकिता के लिए लगातार आवाज उठाने वाले लोगों की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रही है। विरोध प्रदर्शनों और जनदबाव के बीच ही कथित VIP के पहलू पर जांच की मांग दोबारा तेज हुई और सीबीआई ने इस संबंध में मामला दर्ज किया।

लेकिन अब सवाल है कि जांच कब पूरी होगी, कथित VIP के आरोपों की सच्चाई क्या निकलेगी और परिवार को अपने सवालों के जवाब कब मिलेंगे? अंकिता के माता-पिता की मांग स्पष्ट है—जांच पूरी हो, कथित VIP की भूमिका का सच सामने आए और उनकी बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई अधूरी न रहे।


चार साल हो गए। इंसाफ देना ही नहीं था। राज्य में लगातार विरोध प्रदर्शन होता रहता है। अगर जी- प्रिंटर से नतीजों के प्रिंट निकाल लाने का गुमान नहीं होता तो कोई भी राजनीतिक दल राज्यपाल का पद नहीं देता। पहले इंसाफ करता। इसका क्या बचाव हो सकता है कि चार साल से राज्य की जनता अंकिता के इंसाफ को लेकर संघर्ष कर रही है। उत्तराखंड की जनता के उस हिस्से की दाद देनी होगी जो आए दिन इसे लेकर सड़क पर उतरती है। बड़ी बात है।
-रवीश कुमार

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