संजय कुमार सिंह
नरेन्द्र मोदी सरकार की मनमानी, नालायकी और कमजोरी अभी भी अखबारों में नहीं छप रही है। एलन मस्क की शिकायत के बाद भारत में विदेशी निवेश के लिए अनुमति आदि का मुद्दा उठना चाहिए था पर उसे ‘स्वदेशी पर विदेशी हमले’ के रूप में मैनेज कर लिया गया। हालांकि, सरकार का विरोध जारी है और द हिन्दू में खबर पहले पन्ने पर है। यह एसआईआर के खिलाफ लगातार पांच दिन से चल रहे युवाओं के विरोध प्रदर्शन में कइयों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। देशबन्धु की लीड से पता चलता है कि राहुल गांधी पुलिसिया बर्बरता के शिकार युवाओं का साथ दे रहे हैं। उनसे कहा है, सबूत सुरक्षित रखो। सबको सजा दिलाएंगे।
सरकार का विरोध कर रहे युवाओं के लिए यह बड़ा भरोसा है और जाहिर है, इससे उनका डर कम होगा। देशबन्धु की सेकेंड लीड है, सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन के लिए जेल भेजे जाने के बाद अभिजीत दिपके ने शुक्रवार (कल) शाम को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की अपील की है। अभिजीत ने पूछा है कि क्या अब देश में तिरंगा लहराना भी अपराध हो गया है। उन्होंने कहा है कि सरकार में दम है तो इमरजेंसी घोषित करे। यह सब तब हो रहा है जब पुलिसिया बर्बरता के शिकार छात्रों के शरीर पर चोट के निशान राहुल गांधी प्रेस कांफ्रेंस करके दिखा रहे हैं। एक खबर के अनुसार, ऋतु बराला ने कहा है कि पुलिस का व्यवहार बेहद अमानवीय था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड के अनुसार, जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की हिरासत में भेज दिया गया है। यह उस देश में ऐसे समय में हुआ है जब स्वतंत्र भारद्वाज को अपना अपराध कैमरे पर कबूल करने के बावजूद बहुत जल्दी जमानत मिल गई। द टेलीग्राफ की लीड एसआईआर के खामियाजे पर है। खबर के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक व्यक्ति ने पुलिस कांस्टेबल के रूप में नियुक्ति के लिए सारी बाधाएं पार कर ली हैं। पर संभव है कि आखिरकार उसे कामयाबी न मिले क्योंकि संशोधित मतदाता सूची में उसका नाम अब नहीं है। 37 साल का यह व्यक्ति 2013 से मुर्शिदाबाद में सिविक वालंटीयर के रूप में काम कर रहा है।
एसआईआर से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की एक खबर आज द हिन्दू में सेकेंड लीड है। इसके अनुसार दिल्ली के जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उनका ख्याल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया है। इसके साथ याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रशांत भूषण की यह मांग हाईलाइट की गई है कि मतदाता सूची से बाहर किए गए जो मतदाता वापस शामिल होना चाहते (होने योग्य) हैं उन्हें चुनाव आयोग फॉर्म 8 भरने दे या फिर एक नया फॉर्म बनाया जाए जो एसआईआर में हटाए गए मतदाताओं के लिए हो। दि इंडियन एक्सप्रेस में दिल्ली के एसआईआर से संबंधित खबर है। इसका शीर्षक है, फॉर्म 6 से संबंधित अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक आदेश जारी करने का विचार कर रहा हूं।
इन खबरों से स्पष्ट है कि एसआईआर का मकसद अगर कथित घुसपैठियों का पता लगाना और उन्हें मतदाता सूची से बाहर करना था तो उनकी खबर नहीं है और ऐसे लोगों की खबर है जो घुसपैठियां नहीं हैं और जिन्हें मतदाता सूची से बाहर किया ही नहीं जाना था। इसलिए भी एसआईआर का विरोध जरूरी है। लेकिन सिस्टम के कान पर तो जूं भी नहीं ही रेंग रहा है अखबारों में खबरों को भी पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है। इन सबके बावजूद और साथ सत्ता में बैठी सरकार से एलन मस्क को भी शिकायत है और उनकी भी सुनवाई कायदे से नहीं हुई है।
दूसरी ओर, आज छपी खबरों के अनुसार, उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड के एक संदिग्ध दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बना दिया गया है। उन्हें बचाने की कोशिशें जारी हैं। इसके खिलाफ अंकिता के परिजनों ने कल रात दिल्ली में धरना शुरू किया। राहुल और प्रियंका गांधी उनके साथ धरने पर बैठे। सुबह की खबर थी कि उन्हें धरने से जबरन हटा दिया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर छपी लीड के मुताबिक भारत ने स्टार लिंक से कहा है कि (भारतीय) बाजार में प्रवेश से पहले नियमों का अनुपालन किया जाए। आप जानते हैं कि नियमों का अनुपालन ही लालफीताशाही है और इसी में रिश्वतखोरी होती है। विदेशी निवेश नहीं आने या वापस जाने के कारणों में देश की व्यावसायिक स्थितियों के अलावा, सरकारी नियम, उनका अनुपालन और मंजूरी मिलने में आसानी या मुश्किल जैसे अन्य कारण भी होते हैं। भारत में जो स्थितियां हैं उनमें निवेश से लेकर सकल घरेलू उत्पाद तक का बुरा हाल हाल है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में ही अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन का करने का ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया था और तब कहा भी गया था कि जीडीपी वृद्धि दर के अनुसार एक समय यह अपने आप हो जाएगा। लेकिन प्रचारक प्रधानमंत्री कहां मानने वाले थे। तथ्य यह है कि अर्थव्यवस्था आज भी पांच ट्रिलियन की नहीं है और अब उसकी चर्चा नहीं है। उस समय के इसके प्रचारकों में एक, संबित पात्रा के जरिए पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के प्रचार की पोल खोलने वाले प्रो. गौरव बल्लभ अब भाजपा में हैं और सरकार के प्रमुख प्रचारकों में हैं।
लोकतंत्र को हाईजैक कर लिए जाने से संबंधित चुनाव चोरी, वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानी या सत्ता सेवा से संबंधित तमाम आरोपों के बावजूद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली या राजनीति में कोई बदलाव नहीं आया है। अमित शाह अभी भी दावा कर रहे हैं 2029 का चुनाव भाजपा ही जीतेगी और नरेन्द्र मोदी अभी भी लोकप्रिय हैं। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के शासन काल को अघोषित इमरजेंसी कहा जाता रहा है और हर तरह के विरोध को शुरू से ही कुचल दिया जाता रहा है।
किसान आंदोलन फिर लंबा चला था, सरकार को काले कानून वापस लेने पड़े लेकिन किसानों की भलाई के लिए कुछ खास नहीं हुआ। कानून क्यों-कैसे आया था – भी पता नहीं चला। भाजपा चुनाव दर चुनाव जीतती रही। विरोध ना पूर्व तड़ीपार को गृहमंत्री बनाने का हुआ ना 2024 चुनाव से पहले एक साथ पांच भारत लुटाने का हो पाया। राहुल गांधी के डरो मत, प्रियंका गांधी के, लड़की हूं लड़ सकती हूं और दूसरी सक्रियताओं के कारण विरोध शुरू हुआ। सरकार ने आंदोलन को कुचलने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी। राहुल गांधी ने पेलेट गन और घायलों का मुद्दा उठाया तो सरकार कमजोर पड़ी और विपक्ष की चढ़ाई लगातार जारी है।
इसमें इमरजेंसी घोषित करने की आहट भी सुनाई पड़ रही है। दूसरी ओर सरकार और नरेन्द्र मोदी के मित्र भी उनके खिलाफ नजर आ रहे हैं। एलन मस्क के हमले असाधारण हैं और मुख्य रूप से उन्होंने यही कहा है कि तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें भारत में काम करने की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने यह सब तभी किया होगा जब वे पूरी तरह निराश हो गए होंगे लेकिन भारतीय मीडिया ने पूरे मामले को स्वदेशी सरकार पर विदेशी हमले के रूप में रंग दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानी की खबर दि इंडियन एक्सप्रेस में छपने से सरकार को जरूर झटका लगा लेकिन सरकार की तरफ से इंडियन एक्सप्रेस और उसकी महिला रिपोर्टर पर भी हल्ला बोल दिया गया।
दि इंडियन एक्सप्रेस की लीड आज अप्रत्याशित एफडीआई की खबर है। असल में यह आईडीबीआई के बैंक शेयर बेचने को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के कारण है लेकिन खबर की प्रस्तुति का हर अखबार का अपना अंदाज होता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड यही खबर है। इसके शीर्षक से बताया गया है कि आईडीबीआई (बैंक) में 53 हजार करोड़ का हिस्सा बेच कर सरकार (सब कुछ) बेच डालने के अपने लक्ष्य से आगे निकल गई। आप दोनों के संदेशों में जो अंतर है उसे समझ सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की अधपन्ने की लीड के साथ भारती समूह के चेयरपर्सन सुनील मित्तल का एक बयान हाईलाइट किया गया है, मुझे लगता है कि मैं इस कतार में मस्क से काफी आगे हूँ। मैंने पाँच साल पहले आवेदन किया था। पिछले तीन सालों से मेरे ग्राउंड नेटवर्क तैयार हैं। पिछले पाँच सालों से मेरे उपग्रह भारत के ऊपर चक्कर लगा रहे हैं…। अगर हमें उनसे कम से कम कुछ दिन पहले यह मिल जाए, तो हमें बहुत खुशी होगी।
कहने की जरूरत नहीं है कि एलन मस्क का धैर्य जवाब दे गया होगा तो उन्होंने अपनी शिकायत सार्वजनिक की होगी। सरकार को उसपर अपना पक्ष रखना चाहिए था, मीडिया को उसकी रिपोर्ट करनी चाहिए थी। इसमें एलन मस्क का पक्ष शामिल है। वह सब कितना हुआ, कैसे हुआ आप जानते हैं। अब सुनील मित्तल कह रहे हैं कि वे भी पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। भारत में अमूमन पांच साल के लिए ही सरकार चुनी जाती रही है और पांच साल अगर अनुमति मिलने में लग जाए तो उद्योग व्यवसाय कितने सफल होंगे समझना मुश्किल नहीं है। पर सब चल रहा है। सरकार समर्थक हर विरोध को विदेशी पैसे से चलने वाला कहकर काम चलाते रहे हैं।
इसमें कोई दम नहीं है। इसका कोई मतलब नहीं है और 2014 के सरकार विरोधी आंदोलन में विदेशी पैसा या सहायता मुद्दा नहीं था। इस सरकार ने विदेशी चंदा, दान और आय रोकने के लिए जो सब किया है उसकी अलग लंबी कहानी है। मोटे तौर पर लाखों शेल कंपनियां बंद कराई गई हैं, विदेशी चंदा लेना मुश्किल हुआ है, इस कारण कई गैर सरकारी संगठन बंद हो गए हैं और इनके लिए काम करने वाले बेरोजगार हैं। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ ही रहा होगा लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है।
मीडिया इस संबंध में गायिका के आरोप को भी पहले पन्ने पर जगह दे रहा है यह नहीं बता रहा है कि इतनी सख्ती के बाद विदेशी मदद मिल कैसे रही है, अगर गलत है तो सरकार रोक क्यों नहीं रही है और अगर गलत नहीं है तो रोने का क्या मतलब? दैनिक भास्कर के पहले पन्ने पर अंकिता के माता-पिता के धरने की खबर है। तीसरे पहले पन्ने की सेकेंड लीड का शीर्षक है, सौरव-आशुतोष को तिहाड़ जेल भेजा; गायिका का दावा : सीजेपी को अमेरिका से मिल रहा फंड।
हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड इन खबरों से अलग, जंतर मंतर को फिर से विरोध स्थल बनाने की सीजेपी, कांग्रेस की कोशिशें हैं। अखबार ने फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान के अपहरण का अलर्ट और उसे डायवर्ट कर जयपुर में उतारे जाने की खबर को सेकेंड लीड बनाया है। खबर के अनुसार ऐसा कुछ था नहीं और संभावना है कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ होगा।
अमर उजाला, नवोदय टाइम्स और दि एशियन एज में सरकारी और प्रचार की खबरों को ज्यादा प्रमुखता दी गई है। ऊपर बताई गई खबरें हैं भी तो अंदाज दमदार नहीं है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने कहा है और दि एशियन एज ने लीड बनाया है, भारत की सांस्कृतिक विरासत विश्व के लिए सेतु है। नवोदय टाइम्स ने दिल्ली सरकार के प्रचार की एक खबर को लीड बनाया है। शीर्षक है, 1000 करोड़ की उद्यमश्री योजना। इसके तहत प्राथमिकता वाले 10 क्षेत्रों को छूट और आर्थिक सहायता मिलने की भी खबर है। हालांकि, अखबार में अमेरिका के डलास डेटलाइन से एक महत्वपूर्ण खबर है। इसका शीर्षक है, 60 दिन में नौकरी न ढूंढ़ पाने पर घर और कारें छोड़कर जा रहे एच-1बी वीजा वाले। खबर के अनुसार इनकी इस पीड़ा के गवाह सोशल मीडिया के वायरल पोस्ट हैं। सरकार की ओर से इसपर सिर्फ चुप्पी और सन्नाटा है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



