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मनोज बाजपेयी बोले- मुझे तो विनोद अग्निहोत्री ने ही पीना सिखाया था!

Three men sit on a beige sofa in a modern living room with a cityscape view outside the window, arms crossed and smiling at the camera.

संजय शर्मा-

मुंबई में कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं, जो जिंदगी भर याद रह जाती हैं. ऐसी ही एक बेहद खूबसूरत और मजेदार मुलाकात रही वरिष्ठ पत्रकार, अमर उजाला के समूह सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री जी से.

विनोद जी अपने प्यारे बेटे अनुभव के साथ मेरे घर आए थे. घंटों बैठकी जमी. पत्रकारिता से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक, राजनीति से लेकर रंगमंच तक, शाकाहारी से लेकर मांसाहारी खाने तक, न जाने कितने विषयों पर बातें होती रहीं.

इसी बातचीत में एक ऐसा खुलासा हुआ, जिसने मुझे हैरान कर दिया. मुझे पता ही नहीं था कि विनोद अग्निहोत्री जी कभी रंगमंच के शानदार कलाकार भी रहे हैं. उन्होंने खुद नाटक किए हैं. मैंने कहा, अरे वाह विनोद जी! आप तो छिपे रुस्तम निकले. इतने वर्षों से आपको एक बेहतरीन पत्रकार के रूप में जानता रहा, लेकिन आपके भीतर एक कलाकार भी छिपा बैठा है, यह पहली बार पता चला.

लेकिन असली फिल्म तो अगले दिन शुरू होनी थी!

अगले दिन मेरा मनोज बाजपेयी जी के साथ ‘4 PM तहज़ीब’ का कार्यक्रम था. मैंने विनोद जी को भी आमंत्रित कर लिया. मुझे तब तक यह भी नहीं मालूम था कि मनोज बाजपेयी और विनोद अग्निहोत्री जी की दोस्ती कितनी पुरानी है. दोनों ने साथ-साथ रंगमंच किया है. पुराने दिनों की शरारतों और किस्सों का पूरा खजाना दोनों के पास है.

अब कार्यक्रम शुरू हुआ. मनोज जी मंच पर आए. बातचीत चल रही थी कि अचानक मनोज जी ने अपने पुराने दोस्त विनोद अग्निहोत्री जी की पोल खोलनी शुरू कर दी.

मनोज जी बोले कि मुझे तो विनोद अग्निहोत्री ने ही पीना सिखाया था. हम साथ बैठकर पीते थे!

अब आप जरा मेरी हालत समझिए!

एक दिन पहले ही विनोद जी मेरे घर पर बड़े आत्मविश्वास से बता चुके थे कि उन्होंने जिंदगी में कभी शराब को हाथ नहीं लगाया.

और अगले ही दिन मनोज बाजपेयी भरे सभागार में उनकी सारी तपस्या भंग करने पर तुले थे!

विनोद जी बेचारे सकपका गए. इधर मैं अपनी हंसी रोक नहीं पा रहा था. उधर मनोज जी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.

और सबसे बड़ा संकट यह था कि विनोद जी के साथ उनकी होने वाली पुत्रवधू भी कार्यक्रम में मौजूद थीं!

अब सोचिए, जिस ससुर की छवि घर में एक बेहद गंभीर, अनुशासित और सीधे-सादे इंसान की बनी होगी, उसकी जवानी के किस्से देश का इतना बड़ा अभिनेता भरे सभागार में सुनाए जा रहा हो, तो बेचारे ससुर साहब पर क्या गुजर रही होगी!

लेकिन मनोज जी को अपने पुराने दोस्त पर बिल्कुल रहम नहीं आया.

इसके बाद तो शरारतों का पिटारा खुल गया. किसने किसको गाली देना सिखाया, किसने किसको कौन सी शरारत सिखाई, जवानी में कौन कितना शरीफ था और कौन कितना बड़ा शैतान!

मनोज जी एक के बाद एक किस्से सुनाते जा रहे थे और विनोद जी की हालत देखने लायक थी.

इसी बीच मेरी नजर सामने बैठे शानदार अभिनेता फैसल मलिक जी पर पड़ी. वही फैसल मलिक, जिन्होंने ‘पंचायत’ में अपनी अदाकारी से लोगों के दिल जीत लिए.

मुझे अचानक ‘पंचायत’ का वह मशहूर डायलॉग याद आ गया—

‘देख रहा है न विनोद!’

मैंने बीच में मनोज जी को रोका और फैसल मलिक जी से कहा—

‘फैसल भाई, आज तो आपका डायलॉग यहां सच साबित हो रहा है. देख रहा है न विनोद! मनोज बाजपेयी जी आज विनोद अग्निहोत्री जी की एक-एक करके सारी पोल-पट्टी खोल रहे हैं!’

बस फिर क्या था! हंसी का एक और दौर शुरू हो गया.

विनोद जी की हालत ऐसी थी कि न मनोज जी को रोक सकते थे, न अपनी सफाई दे सकते थे और न ही वहां से भाग सकते थे. ऊपर से होने वाली बहू भी सामने बैठी थी!

मैं मन ही मन सोच रहा था कि विनोद जी, कल तक तो आप मेरे घर पत्रकारिता और रंगमंच पर ज्ञान बांट रहे थे, आज मनोज बाजपेयी जी ने आपकी पूरी जीवनी का वह अध्याय खोल दिया है, जो शायद आपने घरवालों से भी छिपाकर रखा होगा!

खैर, हंसी-मजाक अपनी जगह है.

विनोद अग्निहोत्री जी उन चंद पत्रकारों में हैं, जिनके पास अनुभव का विशाल खजाना है. पत्रकारिता की गहरी समझ, राजनीति की बारीक जानकारी, साहित्य और रंगमंच से आत्मीय रिश्ता और सबसे बड़ी बात, बेहद सरल और शानदार इंसान.

इतने बड़े पत्रकार होने के बावजूद उनके व्यवहार में न कोई दिखावा है, न कोई अहंकार. मेरे लिए वह हमेशा बड़े भाई की तरह रहे हैं. उनका स्नेह और अपनापन मेरे लिए बहुत मायने रखता है.

इस मुलाकात ने मुझे एक और बात समझाई. हम जिन लोगों को वर्षों से एक खास पहचान के साथ जानते हैं, उनके भीतर कितनी अनसुनी कहानियां, कितने कलाकार और कितने खूबसूरत इंसान छिपे होते हैं.

विनोद जी की मुंबई यात्रा मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी. पहले मेरे घर की लंबी, आत्मीय बैठकी और फिर अगले दिन मनोज बाजपेयी जी के साथ पुराने दोस्तों की शरारतों का वह शानदार सिलसिला!

बस विनोद जी से एक छोटी सी गुजारिश है—

अगली बार मुंबई आइएगा तो जरूर घर आइएगा, लेकिन मनोज बाजपेयी जी के सामने बैठने से पहले अपनी पुरानी फाइलें अच्छी तरह जांच लीजिएगा. पता नहीं कौन सा पन्ना कब सार्वजनिक हो जाए!

और हां, अनुभव बेटा, अपने पापा से एक बार जरूर पूछना कि आखिर सच क्या है!

बाकी मनोज जी से भी कहना पड़ेगा कि दोस्ती निभाने का यह कौन सा तरीका है भाई!

बहुत सारा प्यार, सम्मान और स्नेह विनोद अग्निहोत्री जी. आप जैसे बड़े भाई का साथ और अपनापन हमेशा बना रहे.

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