सुप्रीम कोर्ट के जज, जस्टिस संदीप मेहता राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को हटाने के लिए CJI सूर्यकांत को लगातार चिट्ठी लिख रहे हैं। एक ही महीने में उन्होंने जस्टिस सूर्यकांत को तीन बार चिट्ठी लिखी लेकिन जस्टिस सूर्यकांत उन्हें नहीं हटा रहे थे। मीलॉर्ड पर घनघोर भ्रष्टाचार में आकंठ डूबने और अपने पद के दुरुपयोग के आरोपों के चलते राजस्थान हाईकोर्ट ने वकील भी महीनों से प्रदर्शन कर रहे थे।
हमने इस पर रिपोर्ट बनाई, लेकिन सरकार के ईकोसिस्टम को ये पसंद नहीं आया और वीडियो हटवा दिया। बीते कुछ दिनों में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सरकार ऐसी पोस्ट, वीडियो, रील पर आरी चला रही है, जिनमें उस पर सवाल उठाए गए हैं।
डर सबको लगता है..गला सबका सूखता है।
-प्रशांत शुक्ला

मनदीप पुनिया-
साल 2020, 21, 22 और 23 मेरे पागल होने के साल थे! अब ये साल आप लोगों के पागल होने का है.
पिछले कई दिनों से मैं सीनियर कंसल्टेंट की भूमिका में आ गया हूँ. मैं उन लोगों को सलाहें दे रहा हूँ जिनके कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाया जा रहा है.
सबसे अधिक इंस्टाग्राम वाले परेशान हैं. कई किलो/हज़ार के भाव में पोस्ट्स को डिलीट किया गया है. शायद लाख से ऊपर गिनती चली गई होगी.
लोगों के अकाउंट्स इंडिया में विजिबल नहीं हो रहे. शैडो बैन जैसा भी कई लोगों के साथ हुआ है.
तक़रीबन 5 साल पहले किसान आंदोलन के दौरान से यह मेरे साथ घटना शुरू हुआ था. कभी पोस्ट उड़ा दी तो कभी चैनल बंद. आज मेरे अपने एक रिकॉर्ड को खंगाला तो पाया कि 127 कंटेंट अलग अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटाए गए और 5 बार अलग अलग समय पर चैनलों को बंद किया गया.
दो तीन बार तो शुरुआत में मैंने इसको लेकर थोड़ा रौला काटा. सीनियर पत्रकारों ने भी मेरा साथ दिया. न्यूज़लाउंड्री जैसी कई जगहों पर स्टोरीज भी हुईं, लेकिन एक समय के बाद मैंने बोलना ही बंद कर दिया. लगा कि अब लोग कितनी बार सहानुभूति दें. इसलिए तंग होने की बजाय स्वाद/आनंद लेना शुरू कर दिया.
नुक़सान ये हुआ कि कभी लगातारता नहीं बन पाई. ट्विटर चूँकि सिर्फ़ 3 बार ही बंद हुआ, इसलिए उसने तो ग्रो किया, लेकिन न यूट्यूब और न कोई प्लेटफार्म आगे बढ़ पाया. असफल पत्रकार या फ्लॉप पत्रकार का तगमा स्वीकार कर लिया. हालांकि मैं घर चलाने के लिए एक जगह लगातार प्रिंट मीडिया में काम करता हूँ.
अब आप लोग परेशान हैं. सीनियर कंसल्टेंट के तौर पर इतना ही कहूँगा कि अपने आनंद में रहें. मजे करें. “देखी जाएगी” की नीति के साथ अपने मूल में बदलाव न करें.
हम पहले भी और आज भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नौकर (हालाँकि प्लेटफार्म सहयोगी या पार्टनर शब्द इस्तेमाल करते हैं) हैं. जब प्लेटफॉर्म्स का काम हमारे बग़ैर चलने लगेगा तो वे हमारे बिना काम चला ही लेंगे.
बस आख़िर में इतना कहूँगा, “बिग टेक कंपनीज़ फ्री स्पीच के लिए स्टैंड लेंगी. इस मुग़ालते में आप न रहें तो बेहतर.”
जब मेरे चैनल्स बंद रहते थे तो मैं परेशान होता था लेकिन उससे आपकी मेंटल हेल्थ ख़राब होने के अलावा कुछ नहीं होगा.
अघोषित लोकचंद्र में फ्री स्पीच की चिंता ना करें!


