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टीवी कंटेंट चोरी पर शिकंजा: दिल्ली पुलिस ने ‘माया आईपीटीवी’ के ज़रिए पायरेसी करने वाले को दबोचा, ऐप हुआ बंद

जियोस्टार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने बहादुरगढ़ और राजौरी गार्डन में मारे छापे, करीब दो साल से कमीशन पर बेच रहा था सब्सक्रिप्शन; 4,450 से ज़्यादा चैनल दिखाने वाला ऐप अब बंद

जियोस्टार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने बहादुरगढ़ और राजौरी गार्डन में मारे छापे, करीब दो साल से कमीशन पर बेच रहा था सब्सक्रिप्शन; 4,450 से ज़्यादा चैनल दिखाने वाला ऐप अब बंद

टीवी चैनलों और ओटीटी कंटेंट की चोरी करने वाले नेटवर्क पर दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गैरकानूनी आईपीटीवी सेवा ‘माया आईपीटीवी’ से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह सेवा जियोस्टार समेत कई कंपनियों के कॉपीराइट वाले टीवी चैनल और वीडियो-ऑन-डिमांड कंटेंट बिना इजाज़त लोगों तक पहुंचा रही थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद माया आईपीटीवी ऐप ने काम करना बंद कर दिया है।

छह महीने पहले दर्ज हुई थी एफआईआर

यह मामला जियोस्टार की शिकायत से शुरू हुआ। कंपनी की ओर से सौंपे गए सबूतों के आधार पर 29 मई 2026 को दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज की गई। केस भारतीय न्याय संहिता 2023, कॉपीराइट एक्ट 1957 और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट 2000 की धाराओं में दर्ज है। एफआईआर के मुताबिक माया टीवी ऐप एपीके फाइल के रूप में बांटा जाता था और इसके ज़रिए कॉपीराइट वाला कंटेंट व्यावसायिक तौर पर स्ट्रीम किया जा रहा था।

हरियाणा और दिल्ली में एक साथ छापेमारी

जांच में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने 4 नवंबर 2026 को दो जगहों पर छापे मारे, एक हरियाणा के बहादुरगढ़ में और दूसरा दिल्ली के राजौरी गार्डन में। इसी दौरान आरोपी को पकड़ा गया। पुलिस ने वह मोबाइल फोन भी ज़ब्त किया है, जिससे यह आईपीटीवी सेवा चलाई जा रही थी। गिरफ्तारी की जानकारी 6 नवंबर को सार्वजनिक की गई।

रीसेलर बनकर बेच रहा था सब्सक्रिप्शन

जांच के मुताबिक आरोपी रीसेलर के तौर पर काम करता था और आम ग्राहकों को माया आईपीटीवी का सब्सक्रिप्शन बेचता था। वह करीब दो साल से यह धंधा चला रहा था। माया आईपीटीवी के अलावा वह दो और ऐसे ही ऐप्स के सब्सक्रिप्शन भी कमीशन पर बेचता था। बताया गया है कि इस ऐप पर 4,450 से ज़्यादा चैनल उपलब्ध थे।

पूरे नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस अब इस पायरेसी नेटवर्क की बड़ी कड़ियों तक पहुंचने में जुटी है और यह पता लगा रही है कि ऐप के वितरण में और कौन-कौन शामिल था। जियोस्टार पिछले कुछ समय से अपने कंटेंट की चोरी के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई कर रहा है। ब्रॉडकास्टर्स के लिए ऐसे गैरकानूनी आईपीटीवी ऐप बड़ी चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि ये सस्ते सब्सक्रिप्शन के लालच में दर्शकों को वैध प्लेटफॉर्म से दूर ले जाते हैं।

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