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नेपाल के राष्ट्रपति के आमंत्रण पर काठमाण्डू गए मधेपुरा वरिष्ठ पत्रकार देवाशीष बोस

मधेपुरा के वरिष्ठ पत्रकार और बिहार जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश महासचिव देवाशीष बोस नेपाल के राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव के निजी आमंत्रण पर आज काठमाण्डू के लिए रवाना हो गये। डॉ. बोस नेपाल में पांच दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस अवसर पर वे नेपाली राष्ट्रपति से भारत-नेपाल मैत्री और सांस्कृतिक एकता के अलावा दोनों देशों के संयुक्त आपदा प्रबंधन पर वार्ता करेगें तथा उन्हें बिहार यात्रा के लिए आमंत्रण देंगे।

मधेपुरा के वरिष्ठ पत्रकार और बिहार जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश महासचिव देवाशीष बोस नेपाल के राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव के निजी आमंत्रण पर आज काठमाण्डू के लिए रवाना हो गये। डॉ. बोस नेपाल में पांच दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस अवसर पर वे नेपाली राष्ट्रपति से भारत-नेपाल मैत्री और सांस्कृतिक एकता के अलावा दोनों देशों के संयुक्त आपदा प्रबंधन पर वार्ता करेगें तथा उन्हें बिहार यात्रा के लिए आमंत्रण देंगे।

रवाना होने से पूर्व डॉ. बोस ने बताया कि विश्व शान्ति के लिए भारत-नेपाल मैत्री आवश्यक है तथा इसके लिए नेपाल के राष्ट्रपति डॉ. रामबरन यादव का अप्रतिम योगदान है। जिसे याद करते हुए इसके समर्थन में कार्य करने का समय है। इस अटूट मैत्री की बदौलत न केवल एशिया बल्कि सम्पूर्ण विष्व में भारत और नेपाल की प्रतिष्ठा में इजाफा हुआ है। यह मैत्री विश्व राजनीतिक इतिहास में युगान्तकारी घटना के रूप में स्वर्णिम अध्याय का सृजन करेगी। उन्होंने कहा कि नेपाल के साथ भारत का सांस्कृतिक एकता के अलावा रोटी-बेटी का भी संबंध है।  

लोक स्वातंत्र्य संगठन बिहार तथा भारतीय युवा आवास संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय डॉ. बोस ने बताया कि नेपाल के महामहिम राष्ट्रपति डॉ. रामबरन यादव की पुत्रवधु डॉ. रष्मि यादव उनकी धर्म बहन हैं तथा उनके प्रयास से ही ये सौम्य भेंट संधारित हुयी है। दिनांक 11 अक्टूबर को जनकपुर, नेपाल से घरेलू बिमान से वे काठमाण्डू के त्रिभूवन अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के लिए रवाना होंगे। जहां राष्ट्रपति के पुत्र तथा नेपाली कांग्रेस के सांसद डॉ. चन्द्र मोहन यादव उनकी आगवानी करेंगे। दूसरे दिन 12 अक्टूबर को राष्ट्रपतिजी के साथ रात्रि भोज में डॉ. बोस की भेंट होगी।

डॉ. बोस का कहना है कि वे मधेपुरा जिला के निवासी हैं, जिला के सिंहेश्वर धाम के शिव मंदिर में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के जन्म के निमित्त महर्षि श्रृंगी के द्वारा सम्पादित पुत्रेष्ठि यज्ञ सम्पन्न हुआ था। जबकि माता सीता डॉ. रामबरन यादव की जन्म भूमि जनकपुर में अवतरित हुई थी और उनका कार्यस्थल काठमाण्डू पशुपतिनाथ का दरबार है। इन तीनों स्थान को जोड़ने से शांति की अवधारणायें व्याप्त होती है। जो विश्व शांति के लिए आवश्यक हैं। लिहाज़ा उनकी नेपाल यात्रा जनतंत्र की मजबूती, पर्यटन और मानवाधिकार की रक्षा में सहायक होगी।

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