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सियासत

The Reservation Jumla

कहीं आर्थिक आरक्षण भी चुनावी जुमलेबाजी तो नहीं? लोकसभा चुनाव के सौ-पचास दिन पहले अचानक संविधान संशोधन द्वारा आर्थिक आरक्षण के कदम को मोदीजी का मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है.!दूसरी तरफ इसे तीन राज्यों के नतीजे और 80 सीटों वाले यूपी में सपा-बसपा गठबंधन से उपजी घबराहट में लिया गया फैसला बताने वालों की भी कमी नहीं है.

इस आरक्षण को सवर्णों याने अगड़ी जातियों के लिए कोरी जुमलेबाजी भी कहा जा रहा है जिससे सामान्य तबके के गरीबों को कुछ भी हासिल नहीं होगा.बुधवार को राज्यसभा में हुई बहस में बोलते हुए मोदीजी के वजीर रविशंकर प्रसाद ने इसे चुनाव के पहले का पहला छक्का बता कर मान लिया की यह वोटरों को रिझाने वाला कदम है.

उन्होंने यह भी सूचित किया की यह अकेला छक्का नहीं है बल्कि अभी और छक्के लगेंगे! दूसरी तरफ इसके सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है. तब सुप्रीमकोर्ट से कुपित चल रहे मोदीजी को उस पर ठीकरा फोड़ने का बहाना मिल जाएगा? बहरहाल इस आरक्षण की ऊँच नीच जानने के लिए विचारक और विश्लेषक योगेन्द्र यादव और स्तंभकार प्रतापभानु मेहता के लेख और कुछ संपादकीय पढ़ कर बहुत कुछ समझा जा सकता है.

लेखक श्रीप्रकाश दीक्षित भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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