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सियासत

अमेरिका की धमकी खाने वाले पहले भारतीय PM नहीं हैं मोदी!

क्रोनोलॉजी और दिलचस्प हुई- 3 मार्च: भारत ने डबल्यूएचओ के बार बार चेताने के बाद आख़िरकार कोविद 19 के इलाज के लिए ज़रूरी दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया।

5 अप्रैल: ट्रम्प ने तुरंत हाइड्राक़्सक्लोरोक्विन न भेजने पर ‘बदले’ की धमकी दी।

6 अप्रैल: मोदी सरकार ने निर्यात से प्रतिबंध हटाया! अमेरिका की धमकी खाने वाले पहले प्रधानमंत्री नहीं थे मोदी,

सबसे बड़ी इंदिरा गाँधी जी ने खाई थी- पाकिस्तान से 1971 युद्ध को लेकर।

जवाब में दो टुकड़े कर बांग्लादेश बना दिया।

मनमोहन सिंह को भी गीदड़भभकी मिली थी। ईरान से तेल आयात बंद करने को। करारा जवाब दिया बुश जूनियर को। भारत में दिल्ली चिड़ियाघर में बुला कर तारीफ़ करवाई मनमोहन सिंह ने।

7 अप्रैल: मोदी धमकी खा कर वही करने वाले जो अमरीका चाहता है पहले प्रधानमंत्री बने।

अब विदेश मंत्रालय लीप रहा है- कि भारत जो देश मुश्किल में हैं उन्हें दवायें भेजेगा।

माने तो 3 मार्च को प्रतिबंध काहे लगाया था?

लगाया ही था तो ट्रम्प की कैमरे पर धमकी के पहले क्यों ना हटा लिया?

हाउडी? केमछो?

मोदी तो बोले थे तू तड़ाक वो करते हैं!

बाक़ी भारतीय पत्रकारिता को सलाम- अंदर ‘ट्रम्प की धमकी है, यूआरएल में भी। हेडिंग धीरे से बदल गई- ‘रिक्वेस्ट हो गई’!


Vijay Shankar Singh : ट्रंप की धमकी उनकी बदतमीजी है. भारत ने 3 मार्च को कोविद 19 के इलाज के लिए ज़रूरी दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिम 5 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ज़रूरी दवा, हाइड्राक़्सक्लोरोक्विन न भेजने पर भारत को धमकी थी। ट्रम्प ने कहा था वह बदला लेंगे।

किस बात का बदला ? सरकार ने इस ज़रूरी दवा का निर्यात इसलिए प्रतिबंधित किया था कि देश मे कोरोना आपदा के संबंध में इस महत्वपूर्ण दवा की किल्लत न हो जाय।

अगर इस दवा की इतनी उपलब्धता है कि हमारी कमी को पूरा करने के बाद भी बच जाय, तब तो उसके निर्यात में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन अगर केवल ट्रंप के हड़क पानी मे आ कर उनके ट्वीट के तुरंत बाद ही निर्यात का खोल देना एक स्वाभिमानी राष्ट्र के लिये उचित नहीं है।

ट्रंप एक विक्षिप्त मनोवृत्ति के प्राणी है। वे भी कोरोना आपदा की पहले तो खिल्ली उड़ाते रहै और अब जब अमेरिका इस आपदा में फंस गया तो ऐसे प्रलाप कर रहे हैं।


Girish Malviya : कल रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने साफ साफ संकेत दे दिये है कि अगर भारत ने कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर से प्रतिबंध नहीं हटाया तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं ……….विदेश व्यापार महानिदेशालय DGFT ने 25 मार्च को इस दवा के निर्यात पर रोक लगा दी थी।……..

ट्रंप ने कहा कि ‘पीएम मोदी के साथ हालिया फोन कॉल के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह इस दवा को अमेरिका को देने पर विचार करेंगे’।………..ट्रंप ने आगे धमकी देते हुए कहा, ‘मुझे इस बात पर आश्‍चर्य नहीं होगा कि यह फैसला उन्‍हें मुझे बताना होगा जो हमने रविवार सुबह हमने बातचीत की थी। मैंने उनसे कहा था कि हम आपके दवा को देने के फैसले की सराहना करेंगे। यदि वह दवा को अमेर‍िका को देने की अनुमति नहीं देते हैं तो ठीक है लेकिन निश्चित रूप से जवाबी कार्रवाई हो सकती है और क्‍यों ऐसा नहीं होना चाहिए?’

वैसे कल 6 अप्रैल को DGFT ने 12 जरूरी दवाओं और 12 एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (API) के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है. लेकिन क्लोरोक्वीन के मुद्दे पर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

भारतीय दवा कंपनियों का जेनेरिक दवाइयों के मामले में दुनिया भर में दबदबा रहा है भारतीय दवा कंपनियां बड़े स्तर पर हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का उत्पादन करती हैं। मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन बेहद कारगर दवा है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं, दरअसल यह दवा उन स्वास्थ्य कर्मियों के भी बहुत काम आती है जो मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में काम करते हैं, इसलिए भारतीय दवा कंपनियां बड़े स्तर पर इसका उत्पादन करती हैं। माना जा रहा है कि इस दवा का खास असर सार्स-सीओवी-2 पर पड़ता है। यह वही वायरस है जो कोविड-2 का कारण बनता है।

पिछले हफ्ते भारत सरकार ने इसकी खुली बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है। अब कोई भी केमिस्ट इस दवा को केवल पंजीकृत डाक्टर की पर्ची पर बेच सकेगा। साथ ही उसे उस पर्ची की एक प्रति ड्रग विभाग को जमा करानी होगी। मलेरिया की दवा की बिक्री पर प्रतिबंध पहली बार लगा है। एक हफ्ते पहले तक इस दवा को बिना डाक्टर की पर्ची के भी कोई भी खऱीद सकता था।

इस बात से यह भी समझ मे आता है कि कि देश मे भी इसकी शॉर्टेज की स्थिति बन रही थी इसलिए डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन को अनिवार्य किया गया था ……..

कुल मिलाकर भारत के सामने इधर कुआँ उधर खाई वाली स्थिति बन गयी है जब प्रतिबंध लगाए गए थे तब डीजीएफटी ने कहा था कि मानवता के आधार पर मामले-दर-मामले में इसके कुछ निर्यात की अनुमति दी जा सकती है। देखते है प्रधानमंत्री मोदी इस पर क्या निर्णय लेते हैं?……..

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