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ज़ुबैर आज़ाद : हैरत है कि निचली अदालतें भी आँख मूँदकर उन्हें पुलिस या न्यायिक हिरासत में भेजती रहीं!

ज़ुबैर आज़ाद! सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने आल्ट न्यूज़ वाले मो. जुबैर को सभी मामलों में जमानत का आदेश दिया है. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को भी भंग कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करने का भी आदेश दिया है। इस तरह मोहम्मद ज़ुबैर को UP में उनके खिलाफ दर्ज सभी छह मामलों में अंतरिम ज़मानत मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्वीट करने की पाबंदी भी हटा दी है। ज़ुबैर से संबंधित सभी केस दिल्ली ट्रांसफर कर दिए गए हैं।

वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर की ये टिप्पणी पढ़िए-

कुछ अनजाने लोग किस तरह आपसे जुड़ जाते हैं। उनका दुख आपका दुख बन जाता है। उनकी ख़ुशी आपकी ख़ुशी बन जाती है। मुहम्मद ज़ुबैर को जब पहली बार गिरफ़्तार किया था, तब मुझे बहुत ग़ुस्सा आया था। बाद में उनके ख़िलाफ़ नई-नई FIR लगती रहीं। साफ़ दिख रहा था कि नूपुर शर्मा का मामला प्रकाश में लाने के कारण ही उनको परेशान किया जा रहा है।

हैरत यह कि निचली अदालतें भी आँख मूँदकर उन्हें पुलिस या न्यायिक हिरासत में भेजती रहीं जबकि मामला ट्वीट्स का था जहाँ सबूत मिटाने या गवाहों को प्रभावित करने का प्रश्न ही नहीं उठता था। अगर पुलिस को कोई पूछताछ करनी है तो वह बिना गिरफ़्तारी के भी हो सकती थी। जैसा कि नूपुर शर्मा के मामले में दिल्ली पुलिस कर रही थी। उनसे पूछताछ की मगर गिरफ़्तार कभी नहीं किया।

कई बार आधी रात को नींद खुल जाती और मैं देर तक यही सोचकर जगा रह जाता कि ज़ुबैर को क्या कभी इंसाफ़ नहीं मिलेगा। क्या हर ज़मानत के बाद एक नई FIR का सिलसिला यूँही चलता रहेगा और अदालत धृतराष्ट्र बनी रहेगी।

आज सुप्रीम कोर्ट से ज़ुबैर को राहत मिली तो मुझे भी चैन आया।

आज की तारीख़ में इस देश में केवल एक ही संस्था से उम्मीद बची है। माना कि कई बार यह भी नाउम्मीद करती है, लेकिन कहते हैं न, ना मामा से काना मामा भला। अगर यह भी नहीं रही तो वर्तमान शासक देश को पूरी तरह पुलिस स्टेट में बदलने में एक पल भी नहीं लगाएँगे।

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