दबंग दुनिया इंदौर से आकांक्षा और विवान गए, मोहम्मद शेख और संदीप आए

दबंग दुनिया, इंदौर से खबर है कि फीचर एडिटर आकांक्षा दुबे और क्राइम रिपोटर विवान सिंह राजपूत ने इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक दोनों ही स्थानीय संपादक ललित उपमन्यु के तुगलगी फरमान से परेशान थे। दोनों ने सीईओ प्रवीण खारीवाल को मेल किया है, जिसमें लिखा है कि वे ललित उपमन्यु के नेतृत्व में काम नहीं करना चाहते। उधर, दैनिक भास्कर से इस्तीफा देने वाले रफी मोहम्मद शेख और न्यूज टुडे से मुक्त हुए संदीप चावरे ने दबंग दुनिया के साथ नई पारी की शुरुआत की है.

 

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Comments on “दबंग दुनिया इंदौर से आकांक्षा और विवान गए, मोहम्मद शेख और संदीप आए

  • प्रकाश पुरोहित की कथनी और करनी…

    इंदौर के जाने माने खेल पत्रकार लोकेंद्र बायस की सड़क किनारे मौत अभी भी रहस्य बनी हुई है। सांध्य दैनिक प्रभात किरण के लिए लिखने वाले बायस की लगभग दो महीने पहले लीवर फट जाने के कारण मौत हो गई थी। बायस की मौत पर प्रभात किरण के संपादक प्रकाश पुरोहित ने रियो डी जेनेरियो से लेख लिखा था, जो पहले पेज पर एंकर बना था। पुरोहित ने बायस की तुलना माइकल जैक्सन से की थी। उन्हें भारत का सबसे बड़ा खेल लेखक बताया था। दरअसल, पुरोहित ने ये घडि़याली आंसू बहाए थे। यदि बायस देश का बड़ा खेल लेखक था, तो क्यों पुरोहित ने उन्हें पाकिस्तान, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, श्रीलंका, विम्ब्लडन, दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर खुद के बजाए नहीं भेजा। विदेश जाकर पुरोहित खेल के बजाए यही लिख पाए कि फलां जगह ये खाना बनता है, फलां जगह टैक्सी बहुत महंगी है। फीफा वल्ड कप मैच में वे किसी टीम के पूरे चार खिलाडि़यों के नाम तक नहीं लिख सके। दरअसल, प्रभात किरण के संस्थापक ओमप्रकाश सोजतिया ने अपने जीते जी पुरोहित को अपने संस्था के खरचे पर भोपाल तक नहीं भेजा। जैसे ही उनका निधन हुआ, तो पुरोहित ने ओमप्रकाश के आज्ञाकारी बेटे प्रभात सोजतिया की भलमानसाहत का फायदा उठाकर रिपोटिंग के बहाने आधी दुनिया की सैर कर ली। और तो और कैमरामेन बनाकर अपनी बहू और बेटे को भी विदेश घुमा लाए। पुरोहित अपने लेखों में बड़ी बड़ी नीतिगत बातें लिखते हैं। …लेकिन एक खेल पत्रकार से उसका हक छीनते हुए आधी दुनिया का सैर सपाटा कर लिया। ब्राजील से वापसी पर पुरोहित ने बायस की पत्नी, दो जुड़वां बेटियों और बेटे को सांत्वना देना तक उचित नहीं समझा। बायस की तनख्वाह पर आपको हंसी आएगी। बस पांच हजार रुपए थी। बेचारा किराए के मकान से लेकर जिंदगी की बाकी तकलीफों को दूर करने के लिए खेल संगठकों और खिलाड़ियों से भीख मांगते मांगते मर गया। जब दैनिक भास्कर ने प्रभात किरण से कोलाबरेशन किया, तो भास्कर के सुधीर अग्ऱवाल ने कहा कि प्रभात किरए के सभी पत्रकारों का न्यूुनतम वेतन २० हजार रुपए कर दिया जाए। तब पुरोहित ने कहा, यह अधिकार हमारे पास रहने दिया जाए। जानना चाहेंगे कि वहां पत्रकार को पूरे छह हजार रुपए भी नहीं मिलते। पुरोहित की तनख्वाह लाखों में है और संस्थान ने दो कार और सालभर का कपड़ा खाना भी मुफ्त कर रखा है। संस्था के पत्रकार पीत पत्रकारिता के लिए विवश हैं। इतनी कम तनख्वाह होते हुए भी आधे से ज्यादा पत्रकारों के पास अपनी नई कार और खुद के मकान हैं।

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  • pradeep jain says:

    prakash purohit ki kathni aur karni main antar raha hai. we dhongi patrakar hain.
    lokendra baies ko jo jankariyan thhi utni hindi patti ke bahut kam patrakaron ko hoti hai. pp is phony journalist.

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