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आज के अखबार : आतंकवाद पर भारत के अपने लचर रवैये के बावजूद ऑपरेशन सिन्दूर का ‘प्रचार’ जारी 

ऑपरेशन सिन्दूर नाम ही राजनीतिक है और सरकार साफ तौर पर इसे भुना रही है। पहले भी ऐसा करती रही है। फिर भी देखिये कि आज के अखबार सरकार की प्रशंसा में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

संजय कुमार सिंह

आतंकवाद से निपटने के लिए शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ राजनीतिक और चुनावी है। यह  स्पष्ट होने के बावजूद प्रधानमंत्री का अभियान जारी है। आज भी पहले पन्ने की खबरों में कई ऐसी हैं। दूसरी ओर, जो खबरें प्रमुखता से होनी चाहिये थी वो नहीं हैं। हालांकि, द टेलीग्राफ की आज की लीड यही है। आज की लीड कहती है, युद्ध बंद होने की घोषणा के एक पखवाड़े के बाद भी ऑपरेशन सिन्दूर की राजनीतिक मार्केटिंग जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अपने गृहराज्य गुजरात की दो दिन के दौरे की शुरुआत की। इसके तहत वडोदरा, दाहोद, भुज और अहमदाबाद में रोड शो और रैलियां हुईं ताकि सैनिक कार्रवाई के लिए सशस्त्र सेना के प्रति आभार जताया जा सके। प्रधानमंत्री के भाषण में जहां तहां उनका अपना ही संदर्भ था। उन्होंने कहा, आतंक फैलाने वालों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि मोदी से मुकाबला करना कितना मुश्किल होता है। इससे पहले, दाबोद में उन्होंने जो किया वह एक एसयूवी पर हर तरह से उनकी विजय यात्रा थी। भुज में हुई दूसरी रैली में नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को एक चेतावनी जारी कर दी। ऐसा लगा जैसे इसे उन्होंने बॉलीवुड के किसी स्क्रिप्ट लेखक के मैनुअल से सीधे उठा लिया हो। उन्होंने कहा, सुख चैन की जिन्दगी जियो, रोटी खाओ…. वरना मेरी गोली तो है ही। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, यह तो शुरुआत है।

ऑपरेशन सिन्दूर के थीम पर मोदी जी देश भर में ऐसे और भी रोड शो और रैलियां करेंगे। प्रधानमंत्री इस हफ्ते आगे चलकर उत्तर प्रदेश और चुनावी राज्य बिहार की यात्रा पर भी निकलने वाले हैं। इस खबर के साथ छपी दूसरी खबर में बताया गया है कि वडोदरा की रैली की खासियत कर्नल सोफिया का परिवार था। खबर के अनुसार प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान चार लोगों के इस परिवार ने पूरा आकर्षण चुरा लिया। ये थे – कर्नल सोफिया कुरैशी के माता-पिता, उसके भाई और कर्नल कुरैशी की जुड़वां बहन। आप जानते हैं कि सेना की कार्रवाई का विवरण देने के लिए जिन दो लोगों को चुना गया था उनमें एक कर्नल कुरैशी थीं। उसपर भाजपा मार्का राजनीति हो चुकी हैं। मध्य प्रदेश के एक मुख्यमंत्री अपने बिगड़े बोल के लिए फंसे हुए हैं और भाजपा सरकार ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई तो नहीं ही की है भाजपा वालों ने उसकी आलोचना भी नहीं की है। यह अलग बात है कि वे खुद अपने किये पर माफी मांग चुके हैं जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है। इन सबके साथ ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता मनाई जा रही है और सड़क किनारे खड़े लोगों की भीड़ में कर्नल सोफिया का परिवार भी था जो प्रधानमंत्री के गाड़ियों के काफिले पर गुलाब की पंखुड़ियां फेंक रहा था। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, मोदी और उनकी पार्टी पर पूर्व में सेना की सफलता के राजनीतिक उपयोग का आरोप लगा है और वह ऑपरेशन सिन्दूर के लाभ उठाती रही है। पार्टी के नेताओं ने अभियान की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री को दिया है जिन्होंने दावा किया है कि उनकी रगों में खून नहीं, गर्म सिन्दूर बहता है।

यह तो हुई घटना और उसकी रिपोर्टिंग और अब देखिये इसका प्रचार जो नवोदय टाइम्स में छपा है। इसका शीर्षक है, “बहनों का सिन्दूर मिटाने वालों का मिटना तय : पीएम मोदी”। इस खबर का इंट्रो है, बोले पाकिस्तान का एकमात्र लक्ष्य है भारत से नफरत करना। खबर के अनुसार मोदी ने कहा, हमारे देश ने गरीबी खत्म करने और आर्थिक विकास का लक्ष्य रखा है। और अखबारों के साथ कल नवोदय टाइम्स में भी खबर थी कि आकार में हमारी अर्थव्यवस्था जापान से आगे निकल गई है। कल मैंने लिखा था कि कैसे इसका बहुत मतलब नहीं है और यह सिर्फ प्रचार है। बाद में मैंने कहीं पढ़ा कि यह सब जापानी येन और रुपये के मुकाबले डॉलर का भाव बदला के कारण हुआ है। आर्थिक विकास के लिए भारत क्या कर रहा है यह ऑपरेशन सिन्दूर के प्रचार की तरह क्यों नहीं बताया जा रहा है, समझना मुश्किल नहीं है। फिर भी तथ्य है कि आतंकी हमला जिसमें नाम पूछकर मारना नया और अनूठा था। दूसरी ओर, वे अभी तक नहीं पकड़ गये हैं और पहलगाम तो छोड़िये पुलवामा के हमलावरों का भी पता नहीं है और 2020 में दो आतंकियों के साथ पकड़े गये जम्मू कश्मीर के पुलिस अफसर ने कहा था, खेल खराब मत कीजिये उस खेल का पता नहीं है और पुलिस अफसर का भी। ऐसे में ऑपरेशन सिन्दूर का निर्णय़ प्रधानमंत्री का था जो नाम से ही चुनावी लगता है और अब तो उसका उपयोग चीख-चीख कर कह रहा है फिर भी ऑपरेशन सिन्दूर का आज पूरा प्रचार है। जो प्रधानमंत्री की वोट बटोरू राजनीति का भाग लगता है।

इसीलिये नवोदय टाइम्स की आज की लीड का शीर्षक है, “हमले के बाद दी गई थी पाकिस्तान को सूचना : जयशंकर”। मुझे तो यह अजीब लगता है कि पहले नौ स्थानों पर हमला, 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है और अब कहा जा रहा है कि हमले की सूचना बाद में दी गई थी। सवाल उठता है कि किसलिये? चिढ़ाने के लिए? कहने की जरूरत नहीं है कि इतनी कमजोर लगने वाली सूचना को लीड बनाने का कोई कारण नहीं है। वह भी तब जब देश में कोरोना के 1010 मरीज मिलने की खबर उसी के नीचे है। जो भी हो, मुझे लग रहा है कि ऑपरेशन सिन्दूर और अब उसकी खबर जान-बूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है। कारण चुनाव न होकर प्रधानमंत्री की इच्छा भी हो सकती है। पर यह जनहित नहीं है और जनहित के मामले कहीं छूट और भूल गये हैं। अमर उजाला में भी वही खबर लीड है जो नवोदय टाइम्स में है। विदेश मंत्री जयशंकर के पास ऐसा दावा करने के अपने कारण हैं पर अखबारों के लिए कोई जरूरी नहीं था कि वे उनके दावे को इतनी प्रमुखता दें। वैसे भी, भारत सरकार के दावे का विरोध नहीं किया जायेगा और ऐसी अपील की जायेगी का मतलब यह नहीं है कि ऐसे दावे किये जायें तो सरसरी नजर में यकीन करने लायक न हों। बहुत सारे सवालों का जवाब नहीं है लेकिन एक शीर्षक है, दुष्प्रचार में न आएं…. विदेश नीति पर एकता दिखाएं। दूसरी ओर, आज ही खबर है, पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाला सीआरपीएफ कर्मी गिरफ्तार। इससे पहले एक महिला यू टयूबर और दूसरे लोग भी गिरफ्तार किये गये हैं। इनसे संबंधित सवालों के जवाब नहीं हैं और ये गिरफ्तारियां बताती हैं कि हम युद्ध करने लायक स्थिति में नहीं थे फिर भी युद्ध शुरू हो गया। अगर युद्ध चलता तो हम फंस सकते थे और ट्रम्प ने अचानक युद्ध विराम की घोषणा नहीं की होती तो गड़बड़ हो सकती थी।

आज विदेश मंत्री जयशंकर के हवाले से अखबारों (दि एशियन एज) में यह खबर भी है। अमर उजाला की लीड का उपशीर्षक है,  पाकिस्तान के अनुरोध पर हुआ संघर्ष विराम। प्रश्न उठता है कि पाकिस्तान के अनुरोध पर हुआ संघर्ष (युद्ध नहीं) विराम तो शुरू करने की जरूरत ही क्या थी? अगर पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्ध विराम हो ही गया तो अब प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के युवाओं से यह अपील क्यों की है कि, अपने देश को आतंकवाद के रोग से मुक्त करने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिये। इससे तो यही लगता है कि (भारत में) आतंकवाद खत्म करने के लिए भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया, युद्ध हुआ, पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्ध विराम हुआ और अब प्रधानमंत्री वहां के युवाओं से अपील कर रहे हैं। यह अपील वैसे ही है कि पाकिस्तान से कोई यहां के युवाओं से अपील करे कि वे हिन्दुत्व या धार्मिक कट्टरता खत्म करने के लिए आगे आएं। भारत के युवाओं से किसी भारतीय नेता की यह अपील भी भाजपा को पसंद नहीं आयेगी जबकि वे खुद पाकिस्तान के युवाओं से अपील कर रहे हैं और बताया जा रहा है कि यह अपील पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्ध विराम के बाद की जा रही है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड में तो यह अपील पाकिस्तान के नागरिकों से की गई बताई गई है। शीर्षक हिन्दी में इस तरह होगा, “पाकिस्तान ने वहां के नागरिकों से अपील की कि आतंक के खिलाफ संघर्ष से जुड़ें”। किसी खास परिश्रम और संदर्भ के बिना दावे असत्य लग रहे हैं। आज वही सब खबर है। उदाहरण  के लिए अमेरिका या ट्रम्प के कहने पर नहीं, पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्ध खत्म करने की बात जो आज छपी है, मानी जा सकती है लेकिन ऐसा है तो प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से क्यों कहा है, रोटी खाओ, वरना मेरी गोली तो है। यह खबर आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है। इंडियन एक्सप्रेस ने भी प्रधानमंत्री के इस संदेश को लीड के उपशीर्षक के रूप में छापा है।

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