बीते 17 सालों से हिंदुस्तान की बरेली यूनिट में कार्यरत सब एडिटर अखिलेश अवस्थी ने संस्थान से नाता तोड़कर अमर उजाला का हाथ थाम लिया है। उनके इस कदम के पीछे की वजह लोकल यूनिट के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मानसिक और शारीरिक शोषण बताया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि यह पहला मामला है कि कोई कर्मचारी संस्थान छोड़कर गया हो इससे पहले भी आठ कर्मचारी संस्थान छोड़कर जा चुके हैं। इन सब के पीछे एक ही आदमी का हाथ है। यह चमचा ही लोगों के वेतन वृद्धि तय करता है। साथ में यह तय करता है कि लोगों को साप्ताहिक अवकाश मिलेगा या नहीं। साप्ताहिक अवकाश लेने पर साथियों को हड़काता है। साथियों से अभद्र व्यवहार करता है। हैरत की बात है कि संस्थान में बैठा मठाधीश इस व्यवहार की अनदेखी करता है। चमचे और मठाधीश के खिलाफ वहां के कर्मचारियों में काफी रोष है।
बताया तो यहां तक जा रहा है कि सीनियर एडिटर अखिलेश अवस्थी जुलाई से लेकर अगस्त माह तक बिना साप्ताहिक अवकाश के काम करते रहे इस कारण उनकी सेहत बिगड़ गई और वह संस्थान में बेहोश होकर गिर पड़े हैरत की बात है कि इसके बाद भी संस्थान ने साप्ताहिक अवकाश शुरू नहीं किया वहां के मठाधीश का कहना था कि कर्मचारी चाहे दम तोड़ दे लेकिन जब संस्थान उसे हर हालत में आना पड़ेगा संस्थान के सीनियर अधिकारियों को मठाधीश के इस व्यवहार और कर्मचारियों के इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है।
हिंदुस्तान संस्थान एक नामी ग्रामीण संस्थान है यह कर्मचारी काफी ख्याल रखती है समय-समय पर वर्कशॉप ट्रेनिंग टूर करती रहती है लेकिन पता नहीं ऐसा क्या है कि जब बरेली यूनिट की बात आती है तो अधिकारी अपनी आंखें बंद कर लेते हैं और एक बताधीश पर पूरे संस्थान का निर्णय छोड़ दिया जाता है कोई कर्मचारी जाए तो उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई भी नहीं की जाती है ना ही उससे कोई रिपोर्ट ली जाती है भारत की बात यह है कि वेतन वृद्धि भी यहां असामान्य तरीके से होती है एक चमचा ही तय करता है कि किसकी कितनी सैलरी बढ़ेगी वह जितनी सैलरी तय करता है बता दे उतना ही आश्चर्य बढ़ता है।
रिपोर्टर्स को बनाया रिकवरी एजेंट संस्थान के ओर से हर साल ओलंपियाड कराया जाता है इसकी वसूली के लिए सभी कर्मचारियों को लगा दिया था सभी रिपोर्ट को आदेश दिया जाता है कि अधिक से अधिक फॉर्म की बिक्री करें अधिक से अधिक पैसा संस्थान को लाकर दिन विचारक से रिपोर्टर इस चक्कर में रिपोर्टिंग छोड़कर रिकवरी एजेंट का काम करने लगते हैं।


