इलाहाबाद की टाउन एरिया लालगोपालगंज में पथराव और आगजनी, एसडीएम घायल

इलाहाबाद। जिले की प्रमुख टाउन एरिया लालगोपालगंज में मामूली विवाद ने चौबीस घंटे बाद गंभीर रूख अख्तियार कर लिया। स्थानीय प्रशासन के घंटों हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने का ही नतीजा रहा कि चार जनवरी को लालगोपालगंज में कई घंटे बवाल चला। दिनभर दहशत हावी रही। जमकर पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी होती रही। कई दुकानें फूंक दी गई। कई मकान क्षतिग्रस्त हुए। राह चलते लोग पीटे गए। यहां तक कि लोगों के घरों में घुसकर भी तोड़फोड़ की गई।

सोरांव के एसडीएम आलोक वर्मा का सिर फूटा। प्राइवेट बस पलटी गई। जो जहां दिखा पीट दिया गया। महिला-बच्चों और बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा गया। पूरा एरिया अराजकतत्वों के हवाले रहा। कई घंटे अराजकता का नंग नाच चला। इनके सबके बीच स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। दोपहर बाद सूचना पाकर रैपिड एक्शन फोर्स, पीएसी, कई थाने की पुलिस के साथ डीएम, डीआईजी, एसएसपी मौके पर पहुंचे तब अराजकता पर काबू पाया जा सका। बहरहाल, देर शाम तक हालात में काबू पा लिया गया है। इन सबके बावजूद लालगोपालगंज में दहशत और असुरक्षा का माहौल है। मौके पर पीएसी के साथ भारी पुलिसबल तैनात की गई है। देर शाम तक कई अफसर मौके पर डटे रहे।

बता दें कि तीन जनवरी को लालगोपालगंज टाउन एरिया में दनियालपुर मोहल्ला में जमीन के एक प्लाट को लेकर दो पक्षों में पथराव और कई राउंड फायरिंग हुई थी। संयोग से दोनों पक्ष के लोग अलग-अलग संप्रदाय के थे। इसे सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश शुरू हो गई थी। खास बात यह है कि टाउन एरिया में गुस्सा और परस्पर तनाव बढ़ने लगा था पर प्रशासन इन सबसे आंख मूंदे रहा।

लालगोपालगंज टाउन एरिया हिंदू-मुस्लिम की मिली जुली आबादी वाला एरिया है। करीब बीस हजार की आबादी वाली इस टाउन एरिया में ज्यादातर मध्यम वर्ग के दुकानदार, किसान और नौकरीपेशा के लोग रहते हैं। तीन जनवरी को जमीन पर कब्जा को लेकर यहां बवाल की शुरूआत हुई पर प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अलग-अलग संप्रदाय के दो पक्षों के मामूली विवाद ने जब गंभीर रूप ले लिया, यहां तक कि कई राउंड फायरिंग, पथराव और सैकड़ों लोगों के जमावड़े को भी स्थानीय प्रशासन ने नजरअंदाज किया। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि प्रशासन ने तीन जनवरी की घटना पर सख्त कार्रवाई कर दी होती तो शायद चार जनवरी को गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश देने वाली टाउन एरिया में गंगा-जमुनी इस कदर लहूलुहान न होती।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट



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