अमिताभ, शहारुख और आमिर तो सलमान के पासंग भी नहीं

सोशल साइट्स पर सलमान को हिंदू बतौर मुसलमान और तमाम मुसलमान, दारू पीने की वजह से सलमान को मुसलमान ही नहीं मान रहे हैं। लेकिन दोनों को शायद यह नहीं पता कि सलमान इन दोनों रुतबों से कहीं ऊपर है।

निजी तौर पर मेरा अपना अनुभव है कि सलमान खान बेहद नेक इँसान है। अमिताभ बच्चन, शाहरुख और आमिर खान मानवीय मूल्यों पर सलमान के सामने पासंग नहीं है। हाल ही पैरा मिलेट्री के एक फोर्स का जब स्वर्ण जयंती मनाई जा रही थी तो मेरे अधिकारी मित्र पहले कश्मीर पहुंचे। शाहरुख से मिलने, जो वहां उस वक्त – जब तक है जान – की शूटिंग कर रहा था। मुलाकात के बाद शाहरुख के पैतरों और धनलिप्सा से मेरे मित्र को बेहद निराशा हुई।

फिर मुंबई में सलमान से मुलाकात की। पहली ही बार में सलमान ने कहा कि यदि फौज की बात है तो मैं जरूर करूंगा। और कोई पैसा भी नहीं लूंगा। सलमान अपने पैसों से दिल्ली आया, गुड़गांव के वेस्ट इन होटेल में प्रोमो शूट कराया और लौट गया। फिर मैराथन के लिए पहुंचा। यह दिलचस्प है कि सलमान का भाषण मैंने लिखा और सलमान ने अपने हिसाब से उसे प़ढ़ा। टीवी ने खबर का शीर्षक दिया, सलमान अभिनेता नहीं, नेता की तरह बोले।

बहरहाल, बतौर पत्रकार मुझे यह भी जानकारी मिली थी कि काले हिरण केस में सलमान बेकसूर है। गोली सैफ ने चलाई थी। हिरन को सैफ ने मारा था। अलबत्ता सलमान ने गुनाह अपने माथे ले लिया..और आज तक मुंह नहीं खोला। यह बात मुझे जोधपुर के विश्नोई समाज के एक मुखिया ने बताई थी और यह भी कहा था, पता नहीं सलमान ने क्यों खुद पर यह बोझ ले लिया..वो तो उस वक्त था भी नहीं मौके पर।

यह दीगर है यदि उस रात विश्नोई मुखिया की ट्रक स्टार्ट हो गया होता तो सैफ, नीलम समेत सबको कुचल कर मारने को बेताब थे विश्नोई लोग..क्योंकि विश्नोई समाज और हिरनो के बीच मां-पुत्र का रिश्ता है। हिरनों को विश्नोई महिलाएं अपना स्तनपान कराती हैं। मैंने खुद भी देखा है।

मैं कतई यह नहीं कह रहा हूं कि सलमान को जो सजा मिली वो गलत है। या फिर जिनकी मौत हुई, उनकी जिंदगी बेशकीमती नहीं थी। लेकिन जिस तरह से फेसबुक पर सलमान को बतौर मुसलमान देखा जा रहा है,.वो वाकई तकलीफ दे रहा है।

कोई मुझे बताए कि महानायक के खिताब पर बैठे अमिताभ बच्चन ने कभी समाज के लिए कुछ किया है…? या शाहरूख ऐसा करता है..?

मेरी जानकारी में फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ दो लोग ऐसे हैं, जो खामोशी से, बिना शोरशराबा किए ना जानी कितनी ही जिंदगियों के लिए कुछ ना कुछ करते रहते हैं..एक सलमान साहब और दूसरे अपने नाना पाटेकर साहब। 

अब बाकियों के बारे में मुझे नहीं पता।

सुमंत भट्टाचार्य के एफबी वॉल से

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