
Mamta Yadav : आज के पत्रिका में 4 नम्बर पेज पर छपी इस खबर पर नज़र डालिये। इस खबर में जहां गोला लगा है वहां पर गौर करिये। इसमें कोई शक नहीं कि जनसंपर्क से लेकर मकान, दुकान हर सुविधा तक अपात्र पत्रकारों यानी ग़ैरपत्रकारों की घुसपैठ औऱ भरमार है। लेकिन सवाल ये है कि यह पूरी प्रक्रिया जहाँ से शुरू होती है वहाँ लोग तो सरकार के ही बैठते हैं।

मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता किसको क्या मिला, न मुझे चाहिए। पत्रकारों को मिले तो भी कोई गुरेज नहीं लेकिन मेरी आपत्ति हमेशा इस बात पर रही है कि मीडिया और पत्रकार ज्यादा बदनाम हैं विज्ञापन और बाकी सुविधाओं को लेकर लेकिन असल खेल गैर पत्रकार कर रहे हैं। किसी सुविधा को लेने या मना करने का हक आपका है मगर आपकी बिरादरी में घुसकर जो ये कांड कर रहे हैं उनके खिलाफ बोलना भी आपका फ़र्ज़ है।
मैंने कुछ साल पहले कोशिश की थी पर कोई साथ नहीं आया। जागो दुनिया के हक की आवाज उठाने वालों। पत्रिका में नाम और प्रकाशित हो जाते तो मज़ा आता। वैसे मुझे पूरा विश्वास है इस पोस्ट पर सबसे कम प्रतिक्रियाएं आएंगी मगर इसे पढ़ा जरूर जाएगा।
भोपाल की वरिष्ठ पत्रकार और मल्हार मीडिया डॉट कॉम की एडिटर इन चीफ ममता यादव की एफबी वॉल से.
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होकमदेव
June 24, 2018 at 2:36 am
ये चाटूकार लोग है जो कुंडली मारकर अजगर की तरह बंगलो में पड़े हुए हैं। अयोग्य ही अयोग्य मगर सरकार के लिए योग्य है क्योंकि सरकार के हित में जो लिखना रहता हैं
ssantosh shrivastava
June 24, 2018 at 7:09 am
ममता जी यही तो राजनीति का खेल है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अब चौथा स्तंभ नहीं रहा है चाहे वह पत्रकारों की सुविधा का मामला हो या कोई सा भी आज मीडिया मालिकों के परिवार उव उनके चमचों को ही लाभ मिल रहा है । इन्हीं मालिकों के परिजनों व चमचों के अधिस्वीकृत कार्ड बनते हैं वास्तव में जो श्रमजीवी पत्रकार हैं वह आज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं यह भी एक हकीकत है लेकिन इस ओर सरकार का ध्यान है । सत्य की जीत जरुर होगी