हिमाचल सीएम ने अमर उजाला को झूठा अखबार कहा, धीमान का इस्तीफा, उदय का प्री-रिटायरमेंट

: कानाफूसी : अमर उजाला हिमाचल की खस्ताहालत को बयान करती एक और खबर सामने आई है। हालांकि खबर कुछ दिन पुरानी है, मगर इस अखबार की दमदार व बेदाग छवि को शर्मसार करने वाली है। सूचना मिली है कि पिछले दिनों अमर उजाला के स्थानीय संपादक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पत्रकारों के बीच पाए गए। पत्रकारवार्ता के दौरान दिल्ली से अमर उजाला में लगी मुख्यमंत्री की खबर के बारे में किए गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने अमर उजाला को झूठा अखबार करार दिया। साथ ही इस खबर को बेबुनियाद बता डाला।

हालांकि यह सब कहना मुख्यमंत्री की पुरानी आदत है, मगर संपादक साहब अपनी अखबार को डिफेंड करने के बजाय सबके सामने मुख्यमंत्री के समक्ष नतमस्तक ही हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री को उनका बड़ा प्रशंसक होने की बात भी कही। इसे देख बाकी पत्रकार दंग रह गए और बात हवा की तरह फैल गई। प्रदेश के नंबर वन अखबार के संपादक को पहले पत्रकार वार्ता में बैठे देख बगले झांक रहे शिमला के पत्रकारों के लिए यह सन्न करने वाली स्थिति थी। अमर उजाला जैसे अखबार की फजीहत इतने से कम नहीं हुई थी कि संपादक जी ने स्टेट ब्यूरो के तौर पर भेजे गए सुरेंद्र धीमान की भी मुख्यमंत्री के समक्ष परेड करवाई। ऐसा लगा मानो अमर उजाला को प्रदेश सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा हो। वहीं यह भी सुगबुगाहट शुरू हो गई कि स्टेट हैड राजेश मंढोत्रा का ट्रांसफर भी सरकार के इशारे पर किया गया।

बताया जा रहा है कि पत्रकारवार्ता के दौरान बने शर्मनाक हालत भी नोएडा के संपादक उदय कुमार के दबाव के चलते पैदा हुए। एक बात और फैली है कि चंडीगढ़ व रोहतक एडिशनों के हाथ से फिसलने के बाद उदय कुमार अब हिमाचल व जम्मू एडिशनों में अपनी हूकुमत कायम रखने के चक्कर में अखबार का बंटाधार करवाने पर तुले हुए हैं। इसके चलते हिमाचल में अखबार का बंटाधार होता दिख रहा है। सभी लोग अखबार को आगे बढ़ाने के बजाय अपनी नौकरी बचाने में लगे हुए हैं। अखबार में जो छप रहा है, उसके चलते पाठकों में इसकी विश्वसनीयता धीरे-धीरे घटती दिख रही है। जिला कांगड़ा में अमर उजाला के दिव्य हिमाचल से पिछड़ने के बाद से चर्चा है कि बाकी जगह भी अखबार के पांव उखड़ने में देर नहीं लगेगी। जब हर कोई नौकरी बचाने में लगा रहेगा तो अखबार की हालत पंजाब जैसी हो जाएगी। वैसे भी संपादकों की राजनीति के चलते धर्मशाला के कोतवाली बाजार में स्थित भरा पूरा कार्यालय बंद हो चुका है। एडिटोरियल पहले ही शिमला भेज दिया गया था और बाकी विभाग नगरोटा बगवां भेज कर अखबार की फजीहत करवा दी गई है। हर कोई चर्चा कर रहा है कि यही हालात रहे तो सच का जोश ठंडा पड़ जाएगा। जब तक अतुल जी थे एडिटोरियल इतना मजबूत था कि एक स्टिंगर तक गर्व से काम करता था, अब तो इस विभाग का कोई माई बाप नहीं बचा है।

सुरेंद्र धीमान ने भी किया किनारा, अमर उजाला छोड़ा

उधर, खबर है कि डिप्टी एडिटर रैंक के सुरेंद्र धीमान को इस रैंक के स्थानीय संपादक के अंडर में काम करने भेज कर उदय कुमार ने अखबार को और ज्यादा मुसीबत में डाल दिया है। पता चला है कि सुरेंद्र धीमान ने खबरों के लिए शिमला में दौड़ने से इनकार कर दिया, जिस पर उनकी स्थानीय संपादक दया शंकर शुक्ला से बहस तक हो गई। इसके बाद धीमान जी मेडिकल डाल कर छुट्टी पर हो लिए। अब सूचना है कि उन्होंने अमर उजाला को अलविदा कह दिया है और हरियाणा में ही कोई दूसरा अखबार ज्वाइन कर लिया है। इस प्रकरण के बाद हिमाचल का स्टेट ब्यूरो लावारिस हालत में है। अब मुख्यमंत्री को खुश करने या फिर सजा देकर भेजे गए राजेश मंढोत्रा को वापस बुलाने के अलावा कोई चारा नहीं दिख रहा है। यह बात तो साफ हो गई है कि जिसे भी जबरन ट्रांसफर करके भेजा जा रहा है वह यहां जम नहीं पा रहा है। ऐसे में देखना है कि प्रबंधन किस तरह हिमाचल में अखबार की लुटिया डूबने से बचा पाता है।

लगता है लुटिया डूबो कर जाएंगे उदय कुमार

अमर उजाला को हिमाचल में नंबर वन बनाने का श्रेय लूटने वाले संपादक उदय कुमार के लिए रिटायरमेंट के समय में बुरा दौर शुरू होता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि मनमानी के लिए मशहूर उदय जाते-जाते अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने की रणनीति में खुद ही फंसते दिख रहे हैं। हर जगह उथल-पुलथ मचाकर उन्होंने एमडी राजुल महेश्वरी को भी कोर्ट कचहरी के चक्कर में डाल दिया है। प्रबंधन ने रविंद्र अग्रवाल के मामले में समझदारी से काम लिया होता तो आज अदालत की अवमानना सहित मजीठिया न लगाने का केस नहीं लगता। रविंद्र ने श्रम विभाग में शिकायत करके संकेत दे दिया था कि या तो उन्हें पूरा वेतन दिया जाए या फिर उनकी घर के पास ट्रांसफर की अपील मान ली जाए। प्रबंधन ने ऐसा नहीं किया, उल्टे उन्हें जम्मू भेज कर खुद ही आग में घी डाल दिया। इसके पीछे भी उदय कुमार की ही रणनीति बताई जाती है। चरचा है कि उदय कुमार अगले साल मार्च में अपने रिटायरमेंट से पहले अखबार की लुटिया डूबो कर ही जाएंगे। 

अमर उजाला, हिमाचल प्रदेश में कार्यरत एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त कानाफूसी में कही गई कोई बात गलत हो तो उसे आप नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए सही बात लिखकर सुधार सकते हैं.



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Comments on “हिमाचल सीएम ने अमर उजाला को झूठा अखबार कहा, धीमान का इस्तीफा, उदय का प्री-रिटायरमेंट

  • Uday kumar and his champu ravinder srivastava trying their best to destroy Jammu amar ujala. they r making rajul maheshwari a fool in the name of kashmir edition of amar ujala

    Reply
  • Rajeshwar Rajesh says:

    First thing : Amar Uajala is not a no. one news paper of Himachal. Who claims this ? and what are the supporting figures? Just take out your BHADAS you are writing any thing ? This news paper is No. One Fraud news paper and nothing else … Ok… Note it and don’t play with figures. This news paper can only publish JHOOTH KA PITARA…

    Reply
  • Rajeshwar Rajesh says:

    First thing : Amar Uajala is not a no. one news paper of Himachal. Who claims this ? and what are the supporting figures? Just to take out your BHADAS you are writing any thing ? This news paper is No. One Fraud news paper and nothing else … Ok… Note it and don’t play with figures. This news paper can only publish JHOOTH KA PITAARA…

    Reply
  • प्रीतम सिंह says:

    उदय कुमार जहां-जहां रहे। वहां वहां उन्होंने बंटाधार ही किया। शिमला में अमर उजाला उदय कुमार ने नंबर-1 नहीं किया। वह किया था टोडरिया की टीम ने। उदय ने अपने चेले राघवेंद्र नारायण, बिज्रेश सिंह, नवीन निगम, निश्छल भटनागर, रामानुज आदि भेजकर दूसरा काम शुरू करवा दिया था।

    Reply
  • जितेंद्र श्रीवास्‍तव says:

    उदय जी को कोसने वालों क्‍या आपने अपनी औकात देखी है। सूरज पर थूकोगे तो वो तुम्‍ही पर पड़ेगा। उदय जी ने अमर उजाला को हिमाचल में जिस ऊंचाई तक पहुंचाया है, उसके लिए आप जैसे असंतुष्‍टों के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

    Reply
  • Jagdeep Singh says:

    अमर उजाला निश्चित तौर पर प्रतिष्ठित समाचार पत्र है लेकिन जिस तरह कि चर्चा है और जो चुनावी माहौल रहा है उससे सभी समाचार पत्रों के साथ साथ समाचार चैनलों की विश्वसनीयता कम ही हुई है…… एक बात और सुरेन्द्र धीमान जी ने अमर उजाला को छोड़कर कोई अखबार नहीं बल्कि क्षेत्रिय चैनल ए वन तहलका ज्वाइन किया है ये उनकी नई परीक्षा है देखें कितना सफल हो पाते हैं……

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code