
समीर शाही-
अयोध्या- रामनगरी में सच दिखाने की कीमत अब खून और डर से वसूली जा रही है। न्यूज़1 इंडिया चैनल की रिपोर्ट के बाद जब निर्मला हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द हुआ, तो कानून के सामने झुकने के बजाय अस्पताल माफिया पत्रकारों पर टूट पड़ा। न्यूज चैनल के कैमरामैन राजा और वाहन चालक मुकेश के साथ सरेआम मारपीट, कैमरा–माइक छीनना—यह सब किसी तात्कालिक उकसावे का नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित गुंडागर्दी का नतीजा है।
सूत्र बताते हैं कि डॉ. आर.के. बनोधा, उनकी पत्नी डॉ. रंजू बनोधा और 12–15 लोगों ने मिलकर अस्पताल परिसर को अखाड़ा बना दिया। यह वही अस्पताल है जिसका लाइसेंस प्रशासन पहले ही रद्द कर चुका है। सवाल यह नहीं कि हमला हुआ—सवाल यह है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी माफिया किस भरोसे इतना बेखौफ था?
बता दे कि कैमरा छीनना सिर्फ उपकरणों की लूट नहीं—यह जनता की आंखों पर पट्टी बांधने की साजिश है। जब पत्रकार प्रशासन की कार्रवाई की पड़ताल करने पहुंचे, तो उन्हें जवाब मिला—लाठी और मुक्कों से। यह घटना बताती है कि अवैध अस्पतालों का नेटवर्क सिर्फ इलाज नहीं, दहशत भी बेचता है।
घटना के बाद पुलिस की तत्परता ने उम्मीद जगाई है, ऐसे में अगर यह कार्रवाई आधी रह गई, तो संदेश जाएगा कि सच दिखाने वालों की कोई सुरक्षा नहीं। इस मामले में कठोर धाराएं, तत्काल गिरफ्तारी और माफिया नेटवर्क की जड़ तक जांच अनिवार्य है।
पुलिस एक्शन—तुरंत और सख्त
घटना की सूचना मिलते ही सीओ अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी और कोतवाल पंकज सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे। पत्रकार की तहरीर लेकर आरोपियों के खिलाफ धर-पकड़ अभियान शुरू कर दिया गया है। सीओ ने स्पष्ट कहा: दोषी किसी भी हालत में बख्शे नहीं जाएंगे।
पत्रकारो की मांग है कि पत्रकारों पर हमला करने वाले सभी नामजद व अज्ञात आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो। लाइसेंस रद्द अस्पताल के संचालन, फंडिंग और संरक्षण की उच्चस्तरीय जांच हो। कवरेज के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जिला-स्तरीय एसओपी लागू हो। यह लड़ाई कैमरे की नहीं, लोकतंत्र की है। अगर आज सच पर हमला बर्दाश्त हुआ, तो कल खामोशी की हुकूमत होगी।
पखवारे भर से जिले में ओवरडोज से महिला मरीज की मौत को लेकर चर्चा का विषय बने निर्मला हॉस्पिटल का मीडिया ट्रायल और कांग्रेस नेता शरद शुक्ला के आंदोलन के बाद हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त होने को जहां पीड़ित परिवार और अभियान की जीत बताया जा रहा है वहीं उसी के बाद कवरेज करने गए पत्रकारो पर हुए इस हमले को कांग्रेस नेता शरद शुक्ला सहित जिले के पत्रकारो और समाजसेवी संघटनों ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कड़ी निंदा करते हुए। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
मरीजों की जिंदगी के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं-सीएमओ
सीएमओ डॉ. सुशील बालियान ने स्पष्ट कहा कि मरीजों की जिंदगी के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निजी अस्पतालों को नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
अयोध्या के पत्रकारों से निर्णायक आह्वान
प्रिय साथियों…
कलम की ताकत अगर सत्ता के सामने झुक जाए, तो सच का गला घुट जाता है। अयोध्या में पत्रकारों पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निर्भीक पत्रकारिता पर हमला है।
जब तक डॉ0 बनौधा और उसके गुंडों के खिलाफ स्पष्ट, नामजद एफआईआर दर्ज नहीं होती… हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं होती, पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक अयोध्या का कोई भी स्वाभिमानी पत्रकार
- किसी सरकारी कार्यक्रम,
- किसी प्रशासनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस,
- किसी फोटो सेशन या दिखावटी संवाद में शामिल न हो।
यह लड़ाई व्यक्ति की नहीं, पेशे की है आज चुप रहे, तो कल खबर लिखने से पहले इजाज़त लेनी पड़ेगी। आज नहीं लड़े,तो कल कैमरा उठाने पर लाठी उठेगी।
यह बहिष्कार मजबूरी नहीं, प्रतिरोध है यह अपील डर की नहीं, सम्मान और स्वाभिमान की घोषणा है। हम सरकार के विरोधी नहीं, लेकिन गुंडों के संरक्षक बन चुके सिस्टम के सामने झुकेंगे भी नहीं।
एक स्वर, एक संकल्प
FIR नहीं — तो कार्यक्रम नहीं, न्याय नहीं — तो सहयोग नहीं। अब फैसला हमें करना है —दरबारी पत्रकार बनना है… या प्रतिरोध की कलम उठानी है
अयोध्या पत्रकार महासंघ


