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इस पत्रकार की माँ को कैंसर था, बाबा रामदेव के इलाज से हुआ चमत्कार!

मुकेश के गजेंद्र-

कैंसर से निजात पर नवजोत सिंह सिद्धू के बयान के बाद पूरी मेडिकल लॉबी उबल पड़ी है… खूब नसीहतें और चेतावनी दी जा रही हैं. ऐसा चौतरफा दबाव पड़ा कि सिद्धू को दोबारा वीडियो बनाकर एलोपैथी की महिमा बतानी पड़ी है, हालांकि, उन्होंने आयुर्वेद को अभी भी नकारा नहीं है.

इससे जुड़ी मैं एक अपनी सच्ची कहानी बता रहा हूं. हम मां का इलाज देश के सबसे बड़े अस्पताल टाटा मेमोरियल में करा रहे थे. एक समय आया जब उनकी तरफ से जवाब मिल गया. ऐसे वक्त में अचानक मुझे बाबा रामदेव का ध्यान आया. मैंने कोशिश की और हम पतंजलि पहुंच गए. वहां स्वामी रामदेव से मुलाकात के बाद आचार्य बालकृष्ण के निर्देशन में अच्छे वैद्य ने मां को देखा और औषधि लिख दी, जो वहीं से मिल भी गई.

अगले 3 महीने तक वो सारी औषधि दी गई. रूटीन जांच के लिए हम टाटा मुम्बई पहुंचे. रिपोर्ट देखकर डॉक्टर हैरान थे. उन्होंने पूछा कि आपने कुछ और प्रयास किया है क्या?

मैं सकारात्मक रिजल्ट देखकर आयुर्वेद वाली बात बता गया. बस फिर क्या था, उन्होंने हमें डांटना शुरू कर दिया. घर में भी ज्यादातर लोग मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े हैं, तो स्वाभाविक था कि हम उनकी बातों में आ गए. हमने सारी औषधि बंद कर दी.

इसके 3 महीने बाद ही मां नहीं रहीं. मैं जानता हूं कि होनी को कोई भी नहीं टाल सकता, लेकिन आज भी लगता है कि काश उस वक्त उन डॉक्टरों की बात नहीं मानी होती. हमारे पास तो वैसे भी कोई विकल्प नहीं था, ऐसे में उस आखिरी विकल्प को छोड़ना नहीं चाहिए था.

यहां मैं एलोपैथ को कभी भी खारिज नहीं कर रहा, लेकिन ये जरूर कहूंगा कि 6 महीने में कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली दुनिया में आज तक कैंसर का दुरुस्त इलाज नहीं मिल पाया. आखिर क्यों?

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