डॉ विवेक द्विवेदी-
सूर्य की ज़िंदगी में अब सिर्फ 22 बड़े चक्कर बाकी हैं… और हम उसी के साथ सफर कर रहे हैं।
ज़रा एक पल के लिए आसमान की ओर देखिए।
हर सुबह उगता हुआ सूरज हमें बिल्कुल वैसा ही दिखाई देता है। ऐसा लगता है जैसे वह हमेशा एक ही जगह पर है। लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है।
हम सब जानते हैं कि पृथ्वी, सूरज के चारों ओर घूमती है। लगभग 365 दिनों में एक चक्कर पूरा होता है और हमारा एक साल बीत जाता है। इसी वजह से मौसम बदलते हैं, दिन-रात होते हैं और समय आगे बढ़ता रहता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सूरज के चारों ओर पृथ्वी घूम रही है, वह खुद भी लगातार दौड़ रहा है? जी हाँ।
सूरज अपनी पूरी सौर मंडल Solar System की फैमिली जिसमें पृथ्वी भी है को साथ लेकर हमारी आकाशगंगा Milky Way के केंद्र के चारों ओर तेज़ रफ्तार से घूम रहा है।
अपने एक चक्कर को पूरा करने में सूरज को लगभग 23 करोड़ साल लगते हैं।

सोचिए… जहाँ हमारा एक साल सिर्फ 365 दिनों का होता है, वहीं सूरज का एक साल 23 करोड़ साल का होता है।
इसे वैज्ञानिक Cosmic Year या Galactic Year कहते हैं।
अब ज़रा समय में पीछे चलते हैं। जब सूरज ने अपनी पिछली बार गैलेक्टिक परिक्रमा पूरी की थी, तब पृथ्वी पर इंसान नहीं थे। तब डायनासोर इस धरती पर कदम रखना शुरू ही कर रहे थे।
यानि डायनासोर से लेकर आज के इंसान तक का पूरा इतिहास, सूरज के लिए सिर्फ एक साल के बराबर है।
करीब 4.6 अरब साल पहले सूरज का जन्म हुआ था। तब से अब तक उसने आकाशगंगा के केवल 20 चक्कर ही पूरे किए हैं। सिर्फ बीस।
अब वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सूरज लगभग 5 अरब साल तक और चमकता रहेगा।
उसके बाद उसका ईंधन खत्म होने लगेगा। वह धीरे-धीरे बहुत बड़ा होकर Red Giant बनेगा और अंत में सिकुड़कर White Dwarf बन जाएगा।
अगर उसकी आज की रफ्तार को देखें, तो उसके पास आकाशगंगा के सिर्फ 22 और चक्कर बाकी हैं।
यानी सुनने में 22 बहुत छोटी संख्या लगती है… लेकिन इन 22 चक्करों में लगभग 5 अरब साल बीत जाएंगे।
हर बार जब सूरज आकाशगंगा का एक चक्कर पूरा करता है, तब तक बहुत कुछ बदल चुका होता है।
- महाद्वीप अपनी जगह बदल लेते हैं।
- नए पहाड़ बन जाते हैं।
- पुराने पहाड़ मिट जाते हैं।
- नई प्रजातियाँ जन्म लेती हैं।
- कई जीव हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं।
और शायद नई सभ्यताएँ भी जन्म लेकर इतिहास बन जाती हैं।
अब ज़रा अपनी कहानी देखिए।
पहले इंसानी शहर बसने से लेकर आज के मोबाइल, इंटरनेट और Artificial Intelligence तक का पूरा इतिहास…
सूरज के एक Cosmic Year का 0.001% भी नहीं है। यानी ब्रह्मांड की घड़ी में हमारी पूरी सभ्यता सिर्फ एक छोटी-सी झलक है।
हम सभी लोग एक ऐसे ग्रह (पृथ्वी) पर बैठे हैं जो इस तारे (सूरज) के चारों ओर लगातार चक्कर लगा रहा है। और…
सूरज अपनी अरबों साल लंबी यात्रा को अपने पूरे सौर मंडल को साथ लेकर Milky Way Galaxy (आकाशगंगा) में लगातार 8 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आगे बढ़ रहा है और आकाश गंगा में चक्कर लगा रहा है।
लेकिन हममें से कोई भी उसकी पूरी यात्रा नहीं देख पाएगा। हाँ… हम उस अनोखे सफर के मुसाफिर ज़रूर हैं।
ब्रह्मांड के सामने हमारी हैसियत बहुत छोटी है, लेकिन इस अद्भुत यात्रा का हिस्सा होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है।


